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Lakhimpur Kheri News: हाईकोर्ट से दिलाएंगे गन्ने का डिफर भुगतान
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गोला की गन्ना विकास समिति में पंचायत करते किसान
गोला गोकर्णनाथ। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन (राकिशसं) की महापंचायत में राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह ने कहा कि वह पेराई सत्र 2009-10 के लगभग 40 रुपये प्रति क्विंटल डिफर भुगतान के लिए हाईकोर्ट जाएंगे और किसानों का डिफर भुगतान कराएंगे। उन्होंने कहा कि गन्ने की सूखी पत्ती जलाने के लिए गन्ना विभाग द्वारा ही परामर्श दिया गया था, लेकिन अब किसानों पर जुर्माना किया जा रहा है, जो बर्दाश्त नहीं होगा।
प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने कहा की चीनी मिल चलने के लिए तैयार है, अब तक सट्टों की कैलेंडरिंग ही नहीं हुई है। उन्होंने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक और सचिव को तीन दिन में कैलेंडर सही कर किसानों की जमीन दर्ज करने को कहा। सभा में चीनी मिल के अधिकारियों को आने का आह्वान किया गया जिस पर बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक चतुर्वेदी पंचायत में आए।
बताया कि बजाज कंपनी एनसीएलटी का केस जीत गई है, इसलिए नए भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। पुराने भुगतान के लिए परसों 25 अक्टूबर को बैठक हुई है, जिसमें बजाज एनर्जी का बकाया 1361.20 करोड़ रुपया किसानों के एस्क्रो के खाते में सीधे सरकार भेजेगी। इससे पुराना भुगतान साफ हो जाएगा। इस पर किसानों ने दीपावली से पूर्व एक-एक पर्ची का भुगतान मांगा। इस पर उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने की बात कही।
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नगर में पहली बार आए राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह का कार्यकर्ताओं ने ममरी पहुंचकर स्वागत किया। सभा को डॉ. रविंद्र नाथ वर्मा, जिला अध्यक्ष मनोज कुमार वर्मा संतोष सिंह आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर राधेश्याम वर्मा, परमेश्वर दीन वर्मा, गुरु प्रसाद वर्मा, नत्थूलाल, सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार वर्मा, बाबा राजेंद्र प्रसाद, राजेश कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
बजाज ग्रुप की चीनी मिलों ने नहीं किया पिछले सत्र का भुगतान
ममरी। किसान की विभिन्न मांगों को लेकर गोला गन्ना विकास समिति पर धरना-प्रदर्शन करने जा रहे राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह का ममरी चौराहे पर कार्यकर्ताओं और किसानों ने स्वागत किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह ने बताया कि उनकी मांगों में चीनी मिलों द्वारा वर्ष 2009 और 2010 में किसानों के खरीदे गए गन्ने का बकाया डिफर दिलाना। राइस मिलों पर किसानों का धान 1500 से 1600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। उन्हें सरकार से निर्धारित मूल्य दिलाना है। बजाज ग्रुप की चीनी मिलों पर किसानों का पिछली सीजन का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान दिलाना है। छुट्टा घूम रहे पशुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्र भेजना आदि मांगें शामिल हैं। संवाद
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प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने कहा की चीनी मिल चलने के लिए तैयार है, अब तक सट्टों की कैलेंडरिंग ही नहीं हुई है। उन्होंने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक और सचिव को तीन दिन में कैलेंडर सही कर किसानों की जमीन दर्ज करने को कहा। सभा में चीनी मिल के अधिकारियों को आने का आह्वान किया गया जिस पर बजाज चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक चतुर्वेदी पंचायत में आए।
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बताया कि बजाज कंपनी एनसीएलटी का केस जीत गई है, इसलिए नए भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। पुराने भुगतान के लिए परसों 25 अक्टूबर को बैठक हुई है, जिसमें बजाज एनर्जी का बकाया 1361.20 करोड़ रुपया किसानों के एस्क्रो के खाते में सीधे सरकार भेजेगी। इससे पुराना भुगतान साफ हो जाएगा। इस पर किसानों ने दीपावली से पूर्व एक-एक पर्ची का भुगतान मांगा। इस पर उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने की बात कही।
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नगर में पहली बार आए राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह का कार्यकर्ताओं ने ममरी पहुंचकर स्वागत किया। सभा को डॉ. रविंद्र नाथ वर्मा, जिला अध्यक्ष मनोज कुमार वर्मा संतोष सिंह आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर राधेश्याम वर्मा, परमेश्वर दीन वर्मा, गुरु प्रसाद वर्मा, नत्थूलाल, सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार वर्मा, बाबा राजेंद्र प्रसाद, राजेश कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
बजाज ग्रुप की चीनी मिलों ने नहीं किया पिछले सत्र का भुगतान
ममरी। किसान की विभिन्न मांगों को लेकर गोला गन्ना विकास समिति पर धरना-प्रदर्शन करने जा रहे राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह का ममरी चौराहे पर कार्यकर्ताओं और किसानों ने स्वागत किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह ने बताया कि उनकी मांगों में चीनी मिलों द्वारा वर्ष 2009 और 2010 में किसानों के खरीदे गए गन्ने का बकाया डिफर दिलाना। राइस मिलों पर किसानों का धान 1500 से 1600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। उन्हें सरकार से निर्धारित मूल्य दिलाना है। बजाज ग्रुप की चीनी मिलों पर किसानों का पिछली सीजन का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान दिलाना है। छुट्टा घूम रहे पशुओं को पकड़कर पशु आश्रय केंद्र भेजना आदि मांगें शामिल हैं। संवाद