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15 बीघा गन्ने की फसल को जंगली हाथियों ने रौंदा
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मझगईं के गुलरा टांडा में हाथियों द्वारा रौंदी गई फसल दिखाता किसान।
- फोटो : LAKHIMPUR
मझगईं (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क के जंगल से निकलकर आए हाथियों के झुंड ने गुलरा टांडा गांव के खेतिहर इलाके में रविवार रात जमकर कहर बरपाया। करीब 15 बीघा गन्ने की फसल को तहस-नहस कर दिया। पार्क की गुलरा चौकी पर तैनात दरोगा और किसानों ने मिलकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। किसानों ने मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
पार्क की गुलरा चौकी से चंद कदम की दूरी पर गुलरा टांडा गांव निवासी जबरे आलम का खेत है। जिसमें गन्ना बोया हुआ है। रविवार रात एक बजे पार्क के जंगल से निकलकर हाथियों के झुंड ने किसान के खेत में जमकर तबाही मचाई। सूचना मिलने पर किसानों के साथ रात में ही मौके पर पहुंचे गुलरा चौकी पर तैनात दरोगा दीपक कुमार व जमुना प्रसाद ने हवाई फायर कर हांका लगाया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा गया। हाथियों के उत्पात से किसान जबरे की 15 बीघा गन्ने की फसल नष्ट हो गई। सोमवार सुबह जानकारी होने पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव और पार्क कर्मियों ने उजाड़ी गई गन्ने की फसल को देखा। साथ ही किसानों को आश्वासन दिया कि उनको जल्द से जल्द मुआवजा दिलाया जाएगा। पीड़ित किसान ने पार्क प्रशासन पर आरोप लगाया है कि एक माह से जंगल से बाहर निकलकर हाथी आ रहे हैं लेकिन कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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पार्क की गुलरा चौकी से चंद कदम की दूरी पर गुलरा टांडा गांव निवासी जबरे आलम का खेत है। जिसमें गन्ना बोया हुआ है। रविवार रात एक बजे पार्क के जंगल से निकलकर हाथियों के झुंड ने किसान के खेत में जमकर तबाही मचाई। सूचना मिलने पर किसानों के साथ रात में ही मौके पर पहुंचे गुलरा चौकी पर तैनात दरोगा दीपक कुमार व जमुना प्रसाद ने हवाई फायर कर हांका लगाया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा गया। हाथियों के उत्पात से किसान जबरे की 15 बीघा गन्ने की फसल नष्ट हो गई। सोमवार सुबह जानकारी होने पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव और पार्क कर्मियों ने उजाड़ी गई गन्ने की फसल को देखा। साथ ही किसानों को आश्वासन दिया कि उनको जल्द से जल्द मुआवजा दिलाया जाएगा। पीड़ित किसान ने पार्क प्रशासन पर आरोप लगाया है कि एक माह से जंगल से बाहर निकलकर हाथी आ रहे हैं लेकिन कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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