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बाघ-तेंदुए जंगल से बाहर न आएं.. जल्द खोदी जाएंगी खाई

Tue, 27 Oct 2020 06:52 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 06:52 PM IST
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Wild Animals
आबादी से सटे जंगल किनारे खड़ा बाघ। (फाइल फोटो) - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। आबादी वाले क्षेत्रों में जंगल से बाघ, तेंदुए और अन्य वन्य जीव न आने पाएं, इसके लिए वन विभाग ने खाईं खोदने की योजना बनाई है, इस योजना के तहत पहले चरण में दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उत्तर निघासन रेंज के मझरा पूरब, दलराजपुर और खैरटिया का चयन किया गया है। यहां एक-दो दिन के अंदर ही खाईं खोदने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में उत्तर निघासन रेंज के मझरा पूरब, दलराजपुर और खैरटिया ऐसे क्षेत्र हैं, जहां जंगल से निकल कर हाथी किसानों की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। इन इलाकों में बाघों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। मझरा पूरब में तो पिछले 19 दिनों के अंदर बाघ ने तीन लोगों को मार डाला है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गुस्सा है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर वन विभाग ने मझरा पूरब जंगल के किनारे गहरी खाईं खोदने की योजना तैयार की है। यह काम एक-दो दिन में शुरू होने की उम्मीद है।
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खोदी जाएगी तीन मीटर चौड़ी खाईं
-उत्तर निघासन रेंज के मझरा पूरब, दलराजपुर और खैरटिया जंगल किनारे जो खाईं खोदी जानी है उसकी चौड़ाई तीन मीटर और गहराई डेढ़ मीटर होगी। पहले चरण में मझरा पूरब जंगल किनारे खाईं खोदी जाएगी। खुदाई से निकली मिट्टी खाईं के एक किनारे पर ऊंचाई में जमा की जाएगी। इससे बाघ और हाथियों को आबादी में आने से रोका जा सकेगा।
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बाघों पर निगरानी के लिए मझरा पूरब जंगल के अंदर लगाए जाएंगे कैमरे
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उत्तर निघासन रेंज के मझरा पूरब में 19 दिनों के अंदर बाघ के हुए ताबड़तोड़ तीन हमलों से वन विभाग चिंता में है। इसके मद्देनजर वन विभाग बाघों की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए मझरा पूरब जंगल के अंदर कैमरे लगाने की तैयारी कर रहा है। इन कैमरों की मदद से बाघों की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद रोकथाम और बचाव की कार्ययोजना बनाई जाएगी।

उत्तर निघासन रेंज जंगल से सटे बाघ और हाथी प्रभावित इलाकों में वन विभाग खाईं खोदने जा रहा है। मझरा पूरब क्षेत्र में यह काम एक-दो दिन में ही शुरू हो जाएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए कैमरा ट्रैपिंग के जरिए बाघों की गतिविधियों का भी बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। जंगल से सटे इलाके में रहने वाले लोगों से आग्रह है कि वे जंगल के किनारे मवेशियों को न ले जाएं।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
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