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LAKHIMPUR KHERI : बेगुनाह बाघ बाइज्जत बरी, कैद से मिली आजादी
Wed, 06 Jul 2022 01:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2022 01:48 AM IST
सार
कुछ दिनों पहले दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में खैरटिया जंगल के पास से बाघ को पिंजरे में कैद किया गया था। कई परीक्षणों से गुजरने के बाद बाघ बेगुनाह साबित हुआ। बाद में पकड़ी गई बाघिन के परीक्षण से यह बात साबित हो गई कि इंसानों का शिकार बाघिन कर रही थी बाघ नही।
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पिंजरे से निकलकर कुछ देर वहीं बैठा रहा बाघ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
करीब एक सप्ताह से पिंजरे में कैद बाघ को मंगलवार सुबह 7:25 बजे दुधवा नेशनल पार्क के कोर जोन जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए आजाद किया गया। पिंजरे से बाहर आकर बाघ कुछ देर तक पिंजरे के बाहर बैठा रहा। इसके बाद वह धीरे धीरे जंगल में चला गया। पिंजरे से निकलने के बाद बाघ कुछ हतप्रभ सा लग रहा था।बाघ को जंगल में छोड़ने से पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञ आईपी गोपन्ना ने उसे रेडियो कॉलर भी लगाया, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। आंखों से ओझल होने तक दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के साथ विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद रही।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में खैरटिया जंगल के पास से 27 जून की रात बाघ पिंजरे में कैद किया गया था। इसे उसी रात कर्तनियाघाट ले जाया गया। विभिन्न परीक्षणों के दौर से गुजरने के बाद बाघ बेगुनाह साबित हुआ। बाद में पकड़ी गई बाघिन के परीक्षण से यह बात साबित हो गई कि इंसानों का शिकार बाघिन कर रही थी बाघ नही। बाघिन के दो दांत टूटे पाए गए थे। जबकि यह बाघ पूरी तरह स्वस्थ था। बेगुनाह साबित होने के बाद वन विभाग ने पकड़ गए बाघ को छोड़ने का निर्णय लिया था। उधर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के रेस्क्यू डिपार्टमेंट के हेड वरिष्ठ वैैैज्ञानिक पराग निगम ने बाघ का परीक्षण करने के बाद उसे जंगल में छोड़ने के लिए फिट पाया।
पिंजरे में कैद बाघ को सोमवार सुबह कर्तनियाघाट से दुधवा नेशनल पार्क लाया गया। रेडियो कॉलर लगाने बाद इसे सोमवार रात में ही जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया था लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से बाघ की रिहाई सुबह तक के लिए टाल दी गई। पिंजरे में रखने के दौरान बाघ के खानपान का विशेष ध्यान रखा गया। इस बीच डाक्टरों की टीम ने एक बार फिर बाघ का बारीकी से स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें बाघ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
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बाघ को जंगल में आजाद करते समय दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, उपनिदेशक कैलाश प्रकाश, उपनिदेशक बफर जोन सुंदरेशा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डॉ. मुदित गुप्ता, परियोजना अधिकारी रोहित रवि, दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, डॉ. खनिन, रेडियो कॉलर विशेषज्ञ आईपी गोपन्ना समेत भारतीय वन्यजीव संस्थान के अधिकारी मौजूद रहे।
दो टीमें करेंगी बाघ की निगरानी
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि बाघ की निगरानी के लिए छह-छह वनकर्मियों की दो टीमें लगाई गई हैं। जो चौबीस घंटे बाघ की निगरानी करेंगी। बाघ को छोड़ने से पहले उसे रेडियो कॉलर लगाया गया है, ताकि बाघ की गतिविधियों और उसके मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में खैरटिया जंगल के पास से 27 जून की रात बाघ पिंजरे में कैद किया गया था। इसे उसी रात कर्तनियाघाट ले जाया गया। विभिन्न परीक्षणों के दौर से गुजरने के बाद बाघ बेगुनाह साबित हुआ। बाद में पकड़ी गई बाघिन के परीक्षण से यह बात साबित हो गई कि इंसानों का शिकार बाघिन कर रही थी बाघ नही। बाघिन के दो दांत टूटे पाए गए थे। जबकि यह बाघ पूरी तरह स्वस्थ था। बेगुनाह साबित होने के बाद वन विभाग ने पकड़ गए बाघ को छोड़ने का निर्णय लिया था। उधर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के रेस्क्यू डिपार्टमेंट के हेड वरिष्ठ वैैैज्ञानिक पराग निगम ने बाघ का परीक्षण करने के बाद उसे जंगल में छोड़ने के लिए फिट पाया।
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पिंजरे में कैद बाघ को सोमवार सुबह कर्तनियाघाट से दुधवा नेशनल पार्क लाया गया। रेडियो कॉलर लगाने बाद इसे सोमवार रात में ही जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया था लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से बाघ की रिहाई सुबह तक के लिए टाल दी गई। पिंजरे में रखने के दौरान बाघ के खानपान का विशेष ध्यान रखा गया। इस बीच डाक्टरों की टीम ने एक बार फिर बाघ का बारीकी से स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें बाघ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
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बाघ को जंगल में आजाद करते समय दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, उपनिदेशक कैलाश प्रकाश, उपनिदेशक बफर जोन सुंदरेशा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डॉ. मुदित गुप्ता, परियोजना अधिकारी रोहित रवि, दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, डॉ. खनिन, रेडियो कॉलर विशेषज्ञ आईपी गोपन्ना समेत भारतीय वन्यजीव संस्थान के अधिकारी मौजूद रहे।
दो टीमें करेंगी बाघ की निगरानी
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि बाघ की निगरानी के लिए छह-छह वनकर्मियों की दो टीमें लगाई गई हैं। जो चौबीस घंटे बाघ की निगरानी करेंगी। बाघ को छोड़ने से पहले उसे रेडियो कॉलर लगाया गया है, ताकि बाघ की गतिविधियों और उसके मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी।