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यहां तो खेतों में रह रहे कई बाघ, कैसे होगी उनकी गणना

Sat, 04 Sep 2021 12:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 12:51 AM IST
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wild animal
लखीमपुर खीरी। टाइगर इस्टीमेशन की तैयारियों के बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जंगल से निकलकर खेतों में रह रहे बाघों की गिनती कैसे होगी। तराई के जिलों खास कर खीरी, पीलीभीत और बहराइच में जंगल से बाहर आकर बड़ी संख्या में बाघ गन्ने के खेतों में प्रवास कर रहे हैं। टाइगर इस्टीमेशन जंगल के अंदर होना है ऐसे में बाहर खेतों में रहने वाले बाघों के गणना में शामिल न हो पाने से सटीक परिणाम आने में संदेह है।
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टाइगर इस्टीमेशन-2022 तीन चरणों में होना है। यह तीनों चरण जंगल के अंदर होंगे। जंगल के अंदर ही कैमरे लगाए जाने हैं। जो बाघ जंगल के बाहर आकर गन्ने के खेतों में रह रहे हैं, उनकी तस्वीर कैमरे में ट्रैप नहीं हो सकेंगी। इस स्थिति में न तो उनकी धारियों का मिलान हो पाएगा और न ही उसका कोई रिकार्ड भारतीय वन्यजीव संस्थान के पास होगा।
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मानव-बाघ संघर्ष अथवा शिकार की स्थिति में बाघ की पहचान कर पाना मुश्किल होगा कि वह बाघ किस क्षेत्र का रहने वाला था। पहले भी इस तरह की समस्या आ चुकी हैं।
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टाइगर इस्टीमेशन के उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि बाघों की गणना नहीं उनका इस्टीमेशन यानि अनुमानीकरण होता है। कैमरा ट्रैपिंग में जो तस्वीरें आती हैं। उनका विश्लेषण करने के बाद जो संख्या निकलती है उसमें परिस्थितियों के अनुसार बाघों की अतिरिक्त संख्या बढ़ा कर अनुमान लगाया जाता है। इस बार भी खीरी पीलीभीत और बहराइच समेत ऐसे जिलों में जहां बाघ जंगल से बाहर निकलकर खेतों में रह रहे हैं उनकी संख्या का अनुमान लगाकर परिणाम में शामिल किया जाएगा।
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धारियों का मिलान न होने से नहीं हो पाती बाघों की पहचान
बाघों की पहचान उनकी त्वचा पर मिलने वाली धारियों से की जाती है। बाघों की धारियों से बाघों की बायोमेट्रिक प्रोफाइल बनती और इसका रिकार्ड भारतीय वन्यजीव संस्थान में रहता है। करीब दो साल पहले बिझौली गांव के पास नहर में मिले बाघिन के शव की पहचान डब्ल्यूआईआई के रिकार्ड में न होने से नहीं हो पाई थी। इसी तरह मैलानी क्षेत्र के एक खेत में बाघिन के मिले शव की भी पहचान नहीं हो सकी थी। इसके गले में नायलान की रस्सी का फंदा कसा हुआ था। इसका रिकार्ड भी डब्ल्यूआईआई के रिकार्ड में नहीं था।

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टाइगर इस्टीमेशन जंगल के अंदर किया जाता है। जंगल से बाहर रहने वाले बाघों की संख्या का अनुमान लगाकर उसे परिणाम में शामिल किया जाता है लेकिन इन बाघों की बायोमेट्रिक प्रोफाइल नहीं बन पाती है।
-संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व
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