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जंगली हाथियों ने अब नगरिया गांव की फसलों को उजाड़ा, किसानों ने पटाखे छोड़कर भगाया
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बांकेगंज से सटे जटपुरा जंगल में मौजूद नेपाली हाथी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। नेपाल के शुक्ला फाटा वन्यजीव विहार से दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट पहुंचे जंगली हाथियों ने शुक्रवार रात भी जमकर उत्पात मचाया। रात करीब नौ से लेकर सुबह नौ बजे तक इन हाथियों ने तीन गांवों में धावा बोला। हालांकि दो जगह जागरूक किसानों ने हाथियों को शोर मचाकर और पटाखे दागकर खदेड़ दिया। जबकि नगरिया गांव में इन हाथियों ने काफी फसल रौंद दी।
बाद में वहां से चलकर हाथी महुरेना बीट जंगल में कुछ समय रुकने के बाद सुबह नौ बजे फिर जटपुरा जंगल में आ गए। वन विभाग की निगरानी टीमें लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हैं।
शुक्रवार रात नौ बजे जटपुरा जंगल से निकलकर हाथी बांकेगंज कस्बे से सटे पूरनपुर गांव के पास खेतों में जा धमके लेकिन गांव के किसान हाथियों के आने की आशंका से सचेत थे। हाथियों को खेतों की ओर बढ़ते देख ग्रामीणों ने आग जलाकर, गोल-पटाखे दागकर और पीपा पीटकर इन्हें खदेड़ दिया।
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पूरनपुर से यह हाथी बड़ी नहर और रेल ट्रैक पारकर बांकेगंज कस्बे से सटे पसियापुर गांव पहुंचे। हाथी खेतों में घुसे ही थे कि वहां भी सतर्क किसानों ने हाथियों को खदेड़ने के लिए वही तरीका अपनाया। जिसके कारण हाथी फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा सके।
पसियापुर से हाथियों ने नगरिया गांव की ओर रुख किया। यहां रात 12 बजे तक खेतों की रखवाली करने के बाद किसान निश्चिंत होकर अपने घर जा चुके थे। हाथियों ने वहां पहुंचकर बेखौफ होकर किसान लेखराम, दिनेश, गजेंद्र पाल सिंह, घुरई लाल, राम सनेही, सत्यपाल सिंह, राम बहादुर,श्याम बिहारी, गोपाल और राजेंद्र की धान, गन्ने की फसलों को रौंद डाला। हाथी यहां करीब एक घंटे रुके। इस बीच हाथियों की चिंघाड़ सुनकर ग्रामीण खेतों में पहुंच गए लेकिन तब तक उनकी फसल बर्बाद हो चुकी थी।
नगरिया गांव से लौटकर हाथी महुरेना जंगल में काफी देर तक चहलकदमी करते रहे। इस बीच निगरानी टीमों को जंगल में हाथियों के पगचिह्न मिले। कुछ देर आराम करने के बाद यह फिर जटपुरा जंगल में वापस आ गए।
नेपाल से आए जंगली हाथियों ने नगरिया गांव के आसपास खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इससे पहले पूरनपुर और पसियापुर गांव के किसानों ने इन हाथियों को खदेड़ दिया था। हाथी अभी जटपुरा जंगल में मौजूद हैं। निगरानी टीमें लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
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बाद में वहां से चलकर हाथी महुरेना बीट जंगल में कुछ समय रुकने के बाद सुबह नौ बजे फिर जटपुरा जंगल में आ गए। वन विभाग की निगरानी टीमें लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हैं।
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शुक्रवार रात नौ बजे जटपुरा जंगल से निकलकर हाथी बांकेगंज कस्बे से सटे पूरनपुर गांव के पास खेतों में जा धमके लेकिन गांव के किसान हाथियों के आने की आशंका से सचेत थे। हाथियों को खेतों की ओर बढ़ते देख ग्रामीणों ने आग जलाकर, गोल-पटाखे दागकर और पीपा पीटकर इन्हें खदेड़ दिया।
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पूरनपुर से यह हाथी बड़ी नहर और रेल ट्रैक पारकर बांकेगंज कस्बे से सटे पसियापुर गांव पहुंचे। हाथी खेतों में घुसे ही थे कि वहां भी सतर्क किसानों ने हाथियों को खदेड़ने के लिए वही तरीका अपनाया। जिसके कारण हाथी फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा सके।
पसियापुर से हाथियों ने नगरिया गांव की ओर रुख किया। यहां रात 12 बजे तक खेतों की रखवाली करने के बाद किसान निश्चिंत होकर अपने घर जा चुके थे। हाथियों ने वहां पहुंचकर बेखौफ होकर किसान लेखराम, दिनेश, गजेंद्र पाल सिंह, घुरई लाल, राम सनेही, सत्यपाल सिंह, राम बहादुर,श्याम बिहारी, गोपाल और राजेंद्र की धान, गन्ने की फसलों को रौंद डाला। हाथी यहां करीब एक घंटे रुके। इस बीच हाथियों की चिंघाड़ सुनकर ग्रामीण खेतों में पहुंच गए लेकिन तब तक उनकी फसल बर्बाद हो चुकी थी।
नगरिया गांव से लौटकर हाथी महुरेना जंगल में काफी देर तक चहलकदमी करते रहे। इस बीच निगरानी टीमों को जंगल में हाथियों के पगचिह्न मिले। कुछ देर आराम करने के बाद यह फिर जटपुरा जंगल में वापस आ गए।
नेपाल से आए जंगली हाथियों ने नगरिया गांव के आसपास खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इससे पहले पूरनपुर और पसियापुर गांव के किसानों ने इन हाथियों को खदेड़ दिया था। हाथी अभी जटपुरा जंगल में मौजूद हैं। निगरानी टीमें लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन