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फिर क्यों पढ़े बच्चे यहां!

Thu, 20 Aug 2015 10:26 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Thu, 20 Aug 2015 10:26 PM IST
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Why read a baby !
हाईकोर्ट ने जनप्रतिनिधियों, अफसरों और जजों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के आदेश दिए हैं, लेकिन जिले के तमाम ऐसे स्कूल हैं, जिनमें न तो बिजली है और न पंखे लगे हैं, बच्चों को बैठने के लिए बेंच तक नसीब नहीं होती। आलम यह है कि जिला मुख्यालय पर कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की भरमार है तो कुछ में एक ही शिक्षक के भरोसे 150 से 200 तक बच्चे हैं। 2300 प्राथमिक स्कूलों में से देहात के कुछ विद्यालयों में बच्चे तो हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। इन बच्चों को पड़ोस के स्कूल से अटैच कर वहां के शिक्षक को भेजा जाता है। यही नहीं जर्जर भवनों के मामले में देहात के स्कूलों की हालत तो और भी बदतर है। कुल मिलाकर सामान्य लोग भी जिन स्कूलों में बच्चों को भेजने से कतराते हैं ऐसे स्कूलों में नेता और अफसर अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे, ये विचारणीय प्रश्न है।
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टिन शेड में स्कूली बच्चों की जान को खतरा
शहर के मोहल्ला कोरियाना मिश्राना में समाज कल्याण विभाग के प्राइमरी कन्या विद्यालय में कुल 40 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां दो शिक्षकों की तैनाती है। विद्यालय टिनशेड में चल रहा है, जिसमें पढ़ाई के समय अध्यापक और छात्रों पर खतरा मंडराता रहता है। सहायक अध्यापक सीमा वर्मा ने बताया कि यहां बच्चों को मिडडेमील नहीं मिलता और न ही यूनिफार्म दी जाती है। उधर इस बाबत जिला समाज कल्याण अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि स्कूल की व्यवस्था प्रबंध कमेटी के जिम्मे रहती है। विभाग द्वारा केवल शिक्षक उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनका वेतन विभाग देता है। मिडडेमील और यूनिफार्म की बाबत शासन को पहले ही अवगत कराया गया, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई।
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इस कंडम भवन में पढ़ाई करते हैं बच्चे
प्राथमिक विद्यालय ईदगाह का यह भवन कंडम घोषित हो चुका है। यहां कक्षा एक से पांच तक 148 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। पहले एक हिस्से को कंडम घोषित किया गया, फिर दूसरे का निर्माण हुआ, लेकिन वह भी कुछ दिनों बाद कंडम हो गया। अब बच्चे इसी स्कूल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। 148 बच्चों को पढ़ाने के लिए एकमात्र शिक्षक संजय त्रिपाठी तैनात हैं। इतने बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती से पढ़ाई के स्तर का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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बच्चे मैदान पर, मास्साब गायब, पढ़ाती मिली पड़ोसी शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय ईदगाह के शिक्षक संजय त्रिपाठी गुरुवार को स्कूल से गायब मिले। भवन कंडम होने के कारण बच्चों की पढ़ाई खुले में होती है। मैदान पर बच्चों को पढ़ा रहीं शिक्षिका ने बताया कि उनकी नियुक्ति पड़ोस स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में हैं। चूंकि ईदगाह में एक ही शिक्षक हैं, इसलिए उनके सरकारी काम से जाने पर वह बच्चों को संभालती हैं। उनका कहना है कि इसकी जानकारी अधिकारियों को भी है।
यह स्कूल है या तबेला
निघासन। तहसील क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मटहिया में 177 बच्चे पंजीकृत है, लेकिन यहां की बिल्डिंग जर्जर हो गई तो ग्रामीणों ने इसमें भूसा और पुआल रखना शुरू कर दिया। कई बार लिखा पढ़ी हुई, लेकिन इसके नवीन भवन का निर्माण नहीं हो सका। मजबूरी में बच्चे खुले में पढ़ाई करते हैं। खंड शिक्षा अधिकारी से इस बाबत बात हुई तो उन्होंने बताया कि नवीन भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन मंजूरी न मिलने के कारण किसी तरह पढ़ाई कराई जा रही है।
कैसी होगी देहात की स्थिति?
जिला मुख्यालय के ईदगाह मोहल्ले स्थित प्राथमिक विद्यालय में 148 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक की तैनाती है, जबकि पास ही स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में मात्र 55 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक समेत चार अध्यापकों की नियुक्ति है। जब यह व्यवस्था जिला मुख्यालय पर है तो देहात में कैसी होगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
यह है प्राथमिक शिक्षा का हाल
- 6 से 14 साल के 58 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं
- 6-14 साल के 2 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते
- कक्षा दो तक के 40 प्रतिशत बच्चे ही शब्द पढ़ पाते हैं
- कक्षा दो तक के 60 प्रतिशत बच्चे ही 0 से 9 तक के अंक पहचान पाते हैं
- कक्षा तीन से पांच तक के 60 प्रतिशत बच्चे सवाल नहीं लगा पाते
विधायक बोले, सरकारी स्कूलों में व्यवस्था अच्छी होगी तो अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएंगे
उत्कर्ष वर्मा, शहर विधायक : एक ही दो साल की बेटी है, अभी पढ़ने नहीं जाती। कहते हैं, प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था उत्तम होगी तो अपने बच्ची को वहां जरूर पढ़ाएंगे।
रोमी साहनी, विधायक पलिया : दो बेटे हैं। बड़े हो गए हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अच्छी होती तो वहीं उनको पढ़ाता। विडंबना है कि अच्छी व्यवस्था न होने के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं करा पाए।
विनय तिवारी, विधायक गोला : बेटा प्राइवेट स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ता है। कहते हैं, सरकारी स्कूलों में भी अब व्यवस्था अच्छी हो रही है। ऐसे में बच्चों को वहां पढ़ाया जा सकता है।

संसाधनों की कमी नहीं मानते बीएसए
बीएसए ओपी राय ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि जिले में साढ़े सात लाख बच्चों में से साढ़े पांच लाख बच्चे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी स्कूलों में ही पढ़ते हैं। यहां संसाधनों की कोई कमी नहीं है। यदि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ते हैं तो हमारे स्कूलों के शिक्षा का स्तर निश्चित रूप से सुधरेगा।

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