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Lakhimpur Kheri News: थाना प्रभारी हटाए गए तो माने परिजन... 20 घंटे बाद किया अंतिम संस्कार

Mon, 05 Aug 2024 03:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 05 Aug 2024 03:24 AM IST
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When the police station in-charge was removed, the family agreed... Last rites were performed after 20 hours.
बिजुआ। छुट्टा पशुओं को भगाने के विवाद में भीरा थाना क्षेत्र के रड़ा बाजार में हुई दो ग्रामीणों की पीटकर हत्या के बाद रविवार को भी गांव में तनाव रहा। थाना प्रभारी को हटाने जाने की मांग पर अड़े परिजनों ने दोपहर दो बजे तक शवों का अंतिम संस्कार नहीं किया। एएसपी के समझाने और थाना प्रभारी के हटने पर परिजनों ने करीब 20 घंटे बाद शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।
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भीरा थाना क्षेत्र के गांव रड़ा बाजार में खेत से भगाए गए छुट्टा जानवरों के घर में घुस जाने पर खूनी संघर्ष हुआ था। मारपीट में घायल रामजीत सिंह (50) व रामलखन सिंह उर्फ गुड्डू की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। दोनों पक्षों के 11 लोग घायल हुए थे। दोहरे हत्याकांड से गांव तनाव का माहौल हो गया। कई थानों की पुलिस और पीएसी गांव में तैनात कर दी गई।
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एसपी गणेश प्रसाद साहा भी गांव पहुंचे। आईजी जोन प्रशांत कुमार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। शाम करीब सात बजे मृतकों के शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। परिजनों ने पलिया-भीरा मार्ग जाम कर दिया। उस समय तो परिजन मान गए। बाद में मृतकों के शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया।
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परिजनों को समझाने पहुंचे अधिकारी
रविवार सुबह से ही रड़ा बाजार का माहौल फिर तनावपूर्ण हो गया। परिजनों ने शवों के अंतिम संस्कार से इन्कार कर दिया। पता चला तो करीब दस थानों की पुलिस, एक बटालियन पीएसी, एएसपी नैपाल सिंह और अन्य अधिकारी गांव पहुंचे। परिजनों की मान-मनौव्वल शुरू की। परिवार वालों की तरफ से करणी सेना के जिलाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह भदौरिया ने भीरा एसओ शिवाजी दुबे को हटाने, मुआवजे की राशि पांच लाख लिखित में देने व आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की। एएसपी नैपाल सिंह ने भीरा एसओ को हटाने और आरोपियों पर एनएसए लगाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने मृतकों के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।


पुलिस की लापरवाही हुई उजागर
रड़ा बाजार में दोनों पक्षों में विवाद काफी दिनों से चल रहा था, लेकिन पुलिस मामले को टालती रही। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाने या कार्रवाई का प्रयास नहीं किया। दोनों पक्षों में आक्रोश बढ़ता रहा। नतीजा यह हुआ कि मामूली विवाद बढ़कर हत्याकांड में बदल गया।
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