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सप्ताह बाद ही सामने आने लगी ‘हरियाली’ की हकीकत

Thu, 21 Jul 2016 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Thu, 21 Jul 2016 11:27 PM IST
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Week later emerging 'green' reality
green - फोटो : amar ujala
24 घंटे में रोपे गए थे 11 लाख 63 हजार पौधे 
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कहीं गायब हुए तो कहीं जानवरों ने उजाड़ा पौधरोपण

विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए प्रदेश भर में एक ही दिन में पांच करोड़ से ज्यादा पौधे रोपे गए। खीरी जिले में 105 स्थलों पर11 लाख 63 हजार 218 पौधे लगाए गए। आनन फानन में पौधरोपण तो हो गया लेकिन पौधों की हिफाजत के कोई इंतजाम नहीं किए गए। नतीजा यह हुआ कि कहीं पौधे जड़ से गायब हो गए तो कहीं जानवरों ने पौधरोपण उजाड़ दिया। एक सप्ताह में लगाए गए पौधों की यह हालत है तो आने वाले दिनों में 50 फीसदी पौधे भी जीवित रह पाएंगे, इसमें संदेह है। 
ग्रीन यूपी क्लीन यूपी अभियान के तहत विश्वस्तर पर पौधरोपण का रिकार्ड बनाने के लिए 11 जुलाई को 24 घंटे के अंदर जिले में 105 स्थानों पर कुल 11 लाख 63 हजार 218 पौधे रोपे गए थे। यहां कुल 119 स्थलों पर 12 लाख 32 हजार 250 पौधे रोपे जाने थे। जिले में 14 चयनित स्थलों पर बाढ़ का पानी भरा होने के कारण वहां पौधरोपण नहीं हो सका। इसके चलते जिले में पौधरोपण का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया। 
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एक सप्ताह बाद जब इस पौधरोपण का जायजा लिया गया तो पता चला कि गांवों के पास किए गए पौधरोपण में से तमाम पौधे गायब हो गए हैं तो तमाम पौधों को जानवरों ने उजाड़ दिया है। कुछ जगह पर पौधरोपण के बाद पानी भर गया। इससे वहां पौधरोपण नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है। किए गए पौधरोपण की देखरेख के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है। खीरी जिले में वन विभाग के दोनों डिवीजनों में करीब सवा सौ वॉचर हैं। जिन पर हाल में हुए पौधरोपण के साथ पुराने जंगल की भी निगरानी की जिम्मेदारी है। 
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उत्तर खीरी वन प्रभाग के दक्षिण निघासन रेंज के छेदुई पतिया और धौरहरा रेंज के कैरातीपुरवा, गनापुर और जंगल मटेरा समेत कई बीटों में एक सप्ताह बाद ही पौधरोपण की हालत बेहद खराब हो गई है। खाली पड़े गड्ढे हरियाली बढ़ाने की कवायद की हकीकत बयां करते नजर आ रहे हैं। धौरहरा रेंज के कैरातीपुरवा और गनापुर में बाढ़ का पानी भर जाने से पौधों के नष्ट होने का खतरा है। जंगल से सटे इलाकों में पौधरोपण काफी हद तक सुरक्षित दिखाई दे रहा है।


हाल में पौधरोपण की वॉचरों से बराबर निगरानी कराई जा रही है। पौधों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में संबंधित वनाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब तक सभी जगह पौधरोपण के सुरक्षित होने की सूचना मिल रही है। 
-संजय विस्वाल, डीएफओ/ नोडल अधिकारी पौधरोपण
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