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24 घंटे के दौरान 101 मिलीमीटर हुई भारी बारिश
सार
चार दिनों से हो रही बारिश से शनिवार को दोपहर बाद लोगों को कुछ घंटे तक राहत मिली, लेकिन 24 घंटे के दौरान 101 मिलीमीटर भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।कुछ स्थानों पर बिजली गिरने से इमारतों को नुकसान पहुंचा है।मौसम विभाग ने रविवार को भी गरज के साथ बारिश होने का अलर्ट जारी किया है।
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विस्तार
लखीमपुर खीरी। चार दिनों से हो रही बारिश से शनिवार को दोपहर बाद लोगों को कुछ घंटे तक राहत मिली, लेकिन 24 घंटे के दौरान 101 मिलीमीटर भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। यह अब तक की सबसे अधिक बारिश है। शनिवार की सुबह आठ बजे से बारिश प्रारंभ हुई। नौ बजे से बादलों ने गरजना शुरू कर दिया। करीब आधे घंटे से अधिक समय बादल गरजते रहे। लोग घरों में दुबक गए। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने से इमारतों को नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने रविवार को भी गरज के साथ बारिश होने का अलर्ट जारी किया है।
बुधवार से मौसम ने करवट बदली थी। अब तक चार दिनों में कुल 179 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग के मानक के अनुसार इसे अत्यधिक बारिश कहा जाएगा। भारी बारिश के कारण दोनों प्रमुख नदियों शारदा व घाघरा का जलस्तर भी लगातार बढ़ने लगा है। घाघरा नदी (गिरिजा बैराज) में सबसे ज्यादा 2.69 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि शारदा नदी में 2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पलिया ब्रिज पर शारदा नदी खतरे के निशान 154.100 मीटर तक पहुंच गई है। वहीं नेपाली नदियों सुहेली व मोहाना का भी जलस्तर बढ़ रहा है।
फसलों को नहीं मिल रहा उबरने का मौका
अक्तूबर में होने वाली बारिश वैसे भी फसलों के लिए नुकसानदायक मानी जाती है लेकिन चार दिनों में हुई अत्यधिक बारिश से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसके अलावा गन्ना व केला की फसल को भी काफी नुकसान हो रहा है। तेज हवा के कारण फसलें खेत में लुढ़क गई हैं। इससे इनका उत्पादन भी कम होने के आसार जताए जा रहे हैं।
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‘पिछले चार दिनों में 179 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जो अत्यधिक भारी वर्षा की श्रेणी में है। इससे सभी फसलों को नुकसान हुआ हैै। मुख्यत: धान को नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों को उबरने में वक्त लगेगा। हालांकि सरकार द्वारा नुकसान की भरपाई की जाएगी। बीमित किसानों को इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा दिलाया जाएगा।’
- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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बुधवार से मौसम ने करवट बदली थी। अब तक चार दिनों में कुल 179 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग के मानक के अनुसार इसे अत्यधिक बारिश कहा जाएगा। भारी बारिश के कारण दोनों प्रमुख नदियों शारदा व घाघरा का जलस्तर भी लगातार बढ़ने लगा है। घाघरा नदी (गिरिजा बैराज) में सबसे ज्यादा 2.69 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि शारदा नदी में 2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पलिया ब्रिज पर शारदा नदी खतरे के निशान 154.100 मीटर तक पहुंच गई है। वहीं नेपाली नदियों सुहेली व मोहाना का भी जलस्तर बढ़ रहा है।
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फसलों को नहीं मिल रहा उबरने का मौका
अक्तूबर में होने वाली बारिश वैसे भी फसलों के लिए नुकसानदायक मानी जाती है लेकिन चार दिनों में हुई अत्यधिक बारिश से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसके अलावा गन्ना व केला की फसल को भी काफी नुकसान हो रहा है। तेज हवा के कारण फसलें खेत में लुढ़क गई हैं। इससे इनका उत्पादन भी कम होने के आसार जताए जा रहे हैं।
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‘पिछले चार दिनों में 179 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जो अत्यधिक भारी वर्षा की श्रेणी में है। इससे सभी फसलों को नुकसान हुआ हैै। मुख्यत: धान को नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों को उबरने में वक्त लगेगा। हालांकि सरकार द्वारा नुकसान की भरपाई की जाएगी। बीमित किसानों को इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा दिलाया जाएगा।’
- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी