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मौसम बेईमान, इंसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:13 PM IST
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मौसम का मिजाज
- फोटो : अमर उजाला
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हीट स्ट्रोक, फूड प्वायजनिंग, वायरस से पीड़ित हैं लोग
अफसरों का दावा, अस्पताल में दवाओं का भरपूर स्टॉक
मौसम का मिजाज आजकल पल-पल बदल रहा है। कभी तेज धूप और कभी उमस के साथ बारिश। मौसम की यह दगाबाजी स्वास्थ्य पर काफी असर डाल रही है। लोग डायरिया, फूड प्वायजनिंग, वायरल आदि की चपेट में आ रहे हैं।
मौसम में बदलाव होते ही बीमारियों ने भी तेजी से पैर पसारे हैं। जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। पेट की बीमारियों से पीड़ित 70 से 80 मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। दो दिन में करीब 225 बच्चे पानी की कमी, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आने, उल्टियों के कारण भर्ती कराए गए हैं। संक्रामक रोगों से निपटने के लिए जिला अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है। संक्रामक रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ने और आपात स्थिति में अन्य वार्डों के मरीजों को यहां शिफ्ट किया जा सकता है।
डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी
जिला अस्पताल के मेडिकल, महिला एवं पुरुष वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ी है। वहीं चिल्ड्रन वार्ड में भी बुखार और डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। मेडिकल महिला वार्ड में 19 महिलाएं भर्ती हैं, जिसमें से अधिकतर मौसमी बीमारियों से पीड़ित हैं वहीं पुरुष वार्ड में भी भर्ती मरीजों की संख्या 23 है इसमें भी अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित हैं।
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बीमारियों के लक्षण और बचाव
हीट स्ट्रोक/डायरिया
लक्षण : तेज प्यास लगना, चक्कर आना, पेट खराब हो जाना, बेहोशी आना, शरीर का तापमान एकाएक बढ़ना
बचाव : भरपेट पानी का सेवन करें, ओआरएस का घोल लें। तला भुना भोजन से परहेज करें। फलों का सेवन अधिक करें
वायरल
लक्षण : गले में जलन होना, छींक, खांसी उल्टी आना, सिर भारी होना, शरीर में दर्द होना, ठंड लगकर बुखार आन।
बचाव : खट्टा नहीं खाएं, साफ पानी पीए, पसीने में नहीं नहाएं, ठंडे पानी से परहेज करें, गले में जलन होने पर गरारे करें
-
हाइपर एसिडिटी
लक्षण : दस्त आना, जी मिचलाना, उल्टियां आना, पेट में जलन होना, खट्टी डकारें आना
बचाव : चाय, कॉफी और अल्कोहल के सेवन से बचें। नींबू पानी, ठंडा दूध दही का सेवन करना
-
पीलिया
लक्षण : त्वचा, आंखों का रंग पीला होना, अत्यधिक कमजोरी आना, भूख न लगना
बचाव : बाहर के खाने से परहेज करें, पानी को उबालकर पीएं, खाने में मसालों का सेवन कम करें।
-
मलेरिया
लक्षण : ठंड के साथ बुखार आना, खाने की इच्छा न करना, हाथ-पैरों में दर्द होना
बचाव : मच्छरदानी, क्वाइल, स्प्रे का प्रयोग करें। घर के बाहर गड्ढ़ों में पानी न रुकने दें। कूलर में पानी बदलते रहें
--
डॉक्टरों की राय
फिजीशियन अमित सिंह बताते हैं कि वायरल पीड़ित व्यक्ति को बार-बार छींक आती है। खांसी से भी वह बेहाल रहता है। अगर वह किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के सामने छींकता या खांसता है तो इससे स्वस्थ्य व्यक्ति भी इसकी चपेट में आसानी से आ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि खांसते और छींकते वक्त स्वच्छ कपड़ा मुंह पर अवश्य रखें।
बुखार आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
बरसात के मौसम में बच्चे डायरिया और बुखार के चपेट में आ जाते हैं। बच्चों को इनसे बचाने के लिए साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहीं दस्त आने पर बच्चे में पानी की कमी होने लगती है। इसलिए बच्चे को ओआरएस का घोल देते रहें। वहीं बुखार होने पर बच्चे को तुरंत समीप के सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
-डॉ. आईबी त्रिपाठी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ।
साफ सफाई का रखें विशेष ध्यान
वर्षा के मौसम में पेट की बीमारियां बढ़ जाती हैं, वहीं मच्छर जनित रोगों के होने की संभावनाएं भी प्रबल हो जाती हैं। ऐसे में मच्छरदानी लगाकर सोएं। पेट की बीमारियों से बचने के लिए साफ सफाई के साथ सतर्क रहने की अधिक जरूरत होती है।
-डॉ.अमित सिंह, फिजीशियन-जिला अस्पताल
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अफसरों का दावा, अस्पताल में दवाओं का भरपूर स्टॉक
मौसम का मिजाज आजकल पल-पल बदल रहा है। कभी तेज धूप और कभी उमस के साथ बारिश। मौसम की यह दगाबाजी स्वास्थ्य पर काफी असर डाल रही है। लोग डायरिया, फूड प्वायजनिंग, वायरल आदि की चपेट में आ रहे हैं।
मौसम में बदलाव होते ही बीमारियों ने भी तेजी से पैर पसारे हैं। जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। पेट की बीमारियों से पीड़ित 70 से 80 मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। दो दिन में करीब 225 बच्चे पानी की कमी, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आने, उल्टियों के कारण भर्ती कराए गए हैं। संक्रामक रोगों से निपटने के लिए जिला अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है। संक्रामक रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ने और आपात स्थिति में अन्य वार्डों के मरीजों को यहां शिफ्ट किया जा सकता है।
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डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी
जिला अस्पताल के मेडिकल, महिला एवं पुरुष वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ी है। वहीं चिल्ड्रन वार्ड में भी बुखार और डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। मेडिकल महिला वार्ड में 19 महिलाएं भर्ती हैं, जिसमें से अधिकतर मौसमी बीमारियों से पीड़ित हैं वहीं पुरुष वार्ड में भी भर्ती मरीजों की संख्या 23 है इसमें भी अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित हैं।
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बीमारियों के लक्षण और बचाव
हीट स्ट्रोक/डायरिया
लक्षण : तेज प्यास लगना, चक्कर आना, पेट खराब हो जाना, बेहोशी आना, शरीर का तापमान एकाएक बढ़ना
बचाव : भरपेट पानी का सेवन करें, ओआरएस का घोल लें। तला भुना भोजन से परहेज करें। फलों का सेवन अधिक करें
वायरल
लक्षण : गले में जलन होना, छींक, खांसी उल्टी आना, सिर भारी होना, शरीर में दर्द होना, ठंड लगकर बुखार आन।
बचाव : खट्टा नहीं खाएं, साफ पानी पीए, पसीने में नहीं नहाएं, ठंडे पानी से परहेज करें, गले में जलन होने पर गरारे करें
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हाइपर एसिडिटी
लक्षण : दस्त आना, जी मिचलाना, उल्टियां आना, पेट में जलन होना, खट्टी डकारें आना
बचाव : चाय, कॉफी और अल्कोहल के सेवन से बचें। नींबू पानी, ठंडा दूध दही का सेवन करना
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पीलिया
लक्षण : त्वचा, आंखों का रंग पीला होना, अत्यधिक कमजोरी आना, भूख न लगना
बचाव : बाहर के खाने से परहेज करें, पानी को उबालकर पीएं, खाने में मसालों का सेवन कम करें।
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मलेरिया
लक्षण : ठंड के साथ बुखार आना, खाने की इच्छा न करना, हाथ-पैरों में दर्द होना
बचाव : मच्छरदानी, क्वाइल, स्प्रे का प्रयोग करें। घर के बाहर गड्ढ़ों में पानी न रुकने दें। कूलर में पानी बदलते रहें
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डॉक्टरों की राय
फिजीशियन अमित सिंह बताते हैं कि वायरल पीड़ित व्यक्ति को बार-बार छींक आती है। खांसी से भी वह बेहाल रहता है। अगर वह किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के सामने छींकता या खांसता है तो इससे स्वस्थ्य व्यक्ति भी इसकी चपेट में आसानी से आ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि खांसते और छींकते वक्त स्वच्छ कपड़ा मुंह पर अवश्य रखें।
बुखार आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
बरसात के मौसम में बच्चे डायरिया और बुखार के चपेट में आ जाते हैं। बच्चों को इनसे बचाने के लिए साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहीं दस्त आने पर बच्चे में पानी की कमी होने लगती है। इसलिए बच्चे को ओआरएस का घोल देते रहें। वहीं बुखार होने पर बच्चे को तुरंत समीप के सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
-डॉ. आईबी त्रिपाठी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ।
साफ सफाई का रखें विशेष ध्यान
वर्षा के मौसम में पेट की बीमारियां बढ़ जाती हैं, वहीं मच्छर जनित रोगों के होने की संभावनाएं भी प्रबल हो जाती हैं। ऐसे में मच्छरदानी लगाकर सोएं। पेट की बीमारियों से बचने के लिए साफ सफाई के साथ सतर्क रहने की अधिक जरूरत होती है।
-डॉ.अमित सिंह, फिजीशियन-जिला अस्पताल