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भीषण गर्मी में वाटरहोल बने वन्यजीवों की संजीवनी
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दुधवा के वाटर होल में पानी पीता बाघ।
बांकेगंज। भीषण गर्मी में तालाब और झीलें सूख गई हैं। नदियों का पानी कम हो गया है। ऐसे में जंगल में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए बने कच्चे और पक्के वाटरहोल उनके लिए संजीवनी साबित हो रहे हैं।
रविवार को दुधवा नेशनल पार्क के वाटरहोल में इत्मिनान से अपनी प्यास बुझाते एक बाघ को देखा गया। बाघ को वाटरहोल में पानी पीते देख सैलानी उसे निहारते रहे और उसकी फोटो कैमरे में कैद कर ली। कुछ देर बाद बाघ जंगल की झाड़ियों में चला गया। जंगल में बने इन वाटरहोल्स में अक्सर बाघ तेंदुआ, बारासिंगा हिरन, चीतल, पाढ़ा समेत तमाम वन्यजीवों को पानी पीते देखा जा रहा है।
उधर, दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए सभी वन कर्मियों को जंगल में बने वाटहोल्स लबालब पानी से भरे रखे जाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्यास लगने पर वन्यजीवों को इधर-उधर भटकना न पड़े। संवाद
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रविवार को दुधवा नेशनल पार्क के वाटरहोल में इत्मिनान से अपनी प्यास बुझाते एक बाघ को देखा गया। बाघ को वाटरहोल में पानी पीते देख सैलानी उसे निहारते रहे और उसकी फोटो कैमरे में कैद कर ली। कुछ देर बाद बाघ जंगल की झाड़ियों में चला गया। जंगल में बने इन वाटरहोल्स में अक्सर बाघ तेंदुआ, बारासिंगा हिरन, चीतल, पाढ़ा समेत तमाम वन्यजीवों को पानी पीते देखा जा रहा है।
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उधर, दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए सभी वन कर्मियों को जंगल में बने वाटहोल्स लबालब पानी से भरे रखे जाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्यास लगने पर वन्यजीवों को इधर-उधर भटकना न पड़े। संवाद
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