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तीन महीने, चार शिकार, कौन है जिम्मेदार
महबूब आलम /पलियाकलां।
Updated Mon, 18 Apr 2016 10:53 PM IST
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बाघिन ने बनाया निवाला
- फोटो : अमर उजाला
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जंगल में घास हो तो शहर की ओर न निकले बाघ, ग्रास मैनेजमेंट न होने से बढ़ी परेशानी
इलाके में इंसान पर बाघिन के हमले की पहली घटना
इसके पहले दो भैंस, एक कुत्ते को बना चुकी है निवाला
तीन महीने, दो दर्जन से अधिक हमले और चार मौत, लखीमपुर जिले में बाघों के बाहर निकल कर आने का यह आंकड़ा चौंका रहा है। आखिर इतनी संख्या में बाघ बाहर क्यों निकल रहे हैं और इसका जिम्मेदार कौन है। एक तरफ बाघ संरक्षण की बात की जा रही है तो दूसरी तरफ वह जंगल के बाहर निकल रहे हैं। इससे बाघों के लिए खतरा बढ़ेगा ही इंसानों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है। देर से जागा वन विभाग अब निगरानी के लिए मचान बनवा रहा है लेकिन जानकारों का कहना है कि जंगल के ग्रास लैंड मैनेजमेंट में कमी बाघों को बाहर निकलने के लिए मजबूर कर रहा है।
बाघ शर्मीले माने जाते हैं और बाहर नहीं निकलते हैं। वह जंगल में हिरन, चीतल और पाड़े का शिकार करता है। चीतल आदि नरम और छोटी घास खाते हैं। अब जंगल का ग्रास लैंड मैनेजमेंट बिगड़ गया है। पिछले काफी समय से जंगल में लंबी-लंबी घास खड़ी है। ये कड़ी होती हैं और इनका क्षेत्रफल काफी बढ़ गया है। लंबी घास छोटी घास को पैदा नहीं होने देती। ये घास जब काटी जाती हैं तभी नई और नरम घास पैदा होती है। घास कटाई न होने से नरम घास का क्षेत्रफल काफी कम हो गया है। ऐसे में चीतल, पाड़े और हिरन अपनी भूख मिटाने के लिए खेतों का रुख कर रहे हैं। नरम घास मिलने के कारण वह जंगल के बाहर ही रुक रहे हैं। ऐसे में अपने शिकार की तलाश में बाघ इनके पीछे पीछे खेतों की ओर आ रहे हैं।
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नरभक्षी होने पर वन विभाग को संशय
इस क्षेत्र में यह पहला मामला है जब बाघिन इंसान पर हमला कर उसे खा गई हो। इसके पहले के तीन हमले में दो भैंसें और एक कुत्ते को बाघ ने खाया था। जिस तरह उसने अंजनी को खाया, उसके नरभक्षी होने की आशंका बढ़ गई है। वहीं वन विभाग का कहना है कि बाघिन को अभी आदमखोर नहीं कहा जा सकता है। उसने किन परिस्थितियों में हमला किया और किसी व्यक्ति को खाया, इसकी पड़ताल जरूरी है। वन विभाग अभी यह भी नहीं तय पा कर रहा है कि हमला करने वाला बाघ है या बाघिन। बकौल रेंजर मनोज शुक्ला, ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने एक बाघिन और दो शावकों को अंजनी का शव खाते देखा। शावकों के साथ होने के कारण शिकार करने वाले जानवर के बाघिन होने की आशंका है। उसके पगमार्क तलाशे जा रहे हैं, जिसे देखने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वह बाघ है या बाघिन। फिलहाल घटनास्थल पर चौकसी बढ़ा दी है। बाघिन की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन का कहना है कि जब तक पगमार्क नहीं मिल जाते, बाघ या बाघिन तय करना मुश्किल है।
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विधायक पहुंचे बिहारीपुरवा, दी सहायता
विधायक रोमी साहनी को जानकारी हुई तो वह गांव पहुंचे और मृतक किसान के घर जाकर परिवार वालों को ढाढ़स बंधाया। उन्होंने कहा कि घटना दुखद है और वन विभाग को बाघ पर नकेल कसने के इंतजाम करने चाहिए। बोले कि मैलानी रेंज में भी एक बाघ कई लोगों को निवाला बनाकर घूम रहा है उसे पकड़ने के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। कहा कि जल्द ही आदमखोर बाघों को नहीं पकड़ा गया तो वह आंदोलन पर मजबूर होंगे। इस दौरान उन्होंने मृतक के घर वालों को दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी और आगे भी मदद का वायदा किया।
बाघों की निगरानी को वन विभाग जागा
रेंजर मैलानी ने सोहनरा भूड़ जंगल के बाहरी किनारों पर बनवाए मचान
बांकेगंज। डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने रास्ता भटककर जंगल के बाहरी किनारों पर पहुंच रहे बाघों की निगरानी के लिए निर्देश जारी किए हैं। डीएफओ ने रेंजर मैलानी डीएस यादव के निर्देशन में वन कर्मियों की टीम गठित कर बाघों के संभावित ठिकानों पर 24 घंटे बारी-बारी से निगरानी के आदेश दिए हैं।
मैलानी रेंज की जटपुरा और सलेमपुर बीट जंगल से सटे बाहरी किनारों पर तीन माह के अंतराल में बाघों के हमलों में तीन लोग असमय ही काल के गाल में समा गए। हाल ही में गांव ढाका में बाघ के हमले में 19 वर्षीय किशोरी किरन की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग से हमलावर बाघ को पकड़ने की मांग को लेकर बांकेगंज-गोला रोड जाम कर दिया था। डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि रेंजर मैलानी के निर्देशन में वन कर्मियों की टीम गठित कर बाघों की 24 घंटे बारी-बारी से निगरानी के निर्देश जारी किए गए है। वनकर्मी सोहनरा भूड गांव के बाहरी किनारे पर मचान बनाकर और गांव ढाका में आबादी के निकट बरौछा नाले में बारी-बारी से मुस्तैदी के साथ बाघ के मूवमेंट और लोकेशन की जानकारी हासिल करेंगे। डीएफओ ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
तीन महीने में बाघ का शिकार हुए चार लोग
पलियाकलां। बाघों के इंसानों की जान लेने की घटनाएं आम होने लगी हैं, जिससे जंगलों के समीपवर्ती ग्रामों के ग्रामीण भयभीत हैं। दुधवा नेशनल पार्क के मैलानी रेंज और दक्षिण सोनारीपुर रेंज के अंतर्गत अब तक बाघ या बाघिन चार लोगों को मार चुके हैं, जिसमें मैलानी और पलिया रेंज मिलाकर पिछले तीन महीनों में यह बाघ के हमले मेें चौथी मौत है। इससे पहले 12 फरवरी को मैलानी की सलेमपुर बीट में बाघ के हमले से कुकरा गांव निवासी रईस की मौत हो गई थी। जबकि 18 मार्च को जटपुरा बीट के गांव सोहनरा भूड़ में भी खेत की रखवाली कर रहे किसान तरसेम सिंह को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया था। अभी दो दिन पहले ही मैलानी रेंज के जटपुरा बीट के राजकिशोर की पुत्री किरन पर भी बाघ ने उस समय हमला कर दिया जब वह अपनी सहेली के साथ गेहूं काटने गई थी। हमले में वह बुरी तरह से घायल हो गई थी और इलाज के दौरान लखनऊ मेडिकल कॉलेज में उसकी मौत हो गई। अब दक्षिण सोनारीपुर रेंज के अंतर्गत ग्राम बिहारीपुरवा में भी खेत गए अंजनी को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया।
वर्ष 2008 में बाघ ने ली थी आठ लोगों की जान
सन 2008 में किशनपुर रेंज में बाघ ने एक-एक कर आठ लोगों को मौत के घाट उतारा था। इस आदमखोर बाघ ने पूरे इलाके में ऐसी दहशत फैलाई कि आसपास के लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतराने लगे थे। इसके अलावा उसने तमाम लोगों को बुरी तरह जख्मी भी किया था।
बाघ के हमले में ये हो चुके हैं घायल
बाघों के लगातार इंसानों पर हमला करने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। बीते 20 नवंबर 2014 को उल्ल नदी के किनारे दोस्तों के साथ घास काटने गए गांव सीतारामपुर निवासी 18 वर्षीय लक्ष्मन पर झाड़ियों में छिपे बाघ ने हमला कर दिया था। 21 दिसंबर 2012 को मड़हा सेंक्चुरी वन क्षेत्र में फूस काटने गए खंजनपुर निवासी इंदर पर बाघ ने हमला कर दिया था। 07 जनवरी 2014 को पहाड़पुर जंगल किनारे खेत की रखवाली कर रहे 10 वर्षीय अजय पर बाघ ने हमला कर घायल कर दिया। 04 मार्च 2015 मैलानी रेंज के खरैटा रेंज में जंगल में शिकारियों पर बाघ ने हमला कर दिया। 09 अप्रैल 2015 को मैलानी रेंज के चाचापुर गांव में जंगल किनारे खेत में कटाई कर रही सुनीता देवी उर्फ सुखिया पर बाघ ने हमला कर दिया। जिससे वह घायल हो गई थी। इससे पूर्व पलिया तहसील के गांव मरौचा में भी खेत में एक किसान के ऊपर बाघ हमला कर भाग गया था।