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वोटर आईडी-आधार हुए फेल, मायूस लौटे मतदाता
लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 13 Oct 2015 11:02 PM IST
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मतदान के दौरान तमाम लोग मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह गए। जबकि इनके पास वोटर आईडी और आधार कार्ड भी था। बावजूद इसके इन्हें मतदान करने से रोक दिया गया, क्योंकि इनके नाम मतदाता सूची में गलत अंकित हो गए थे। जबकि कुछ मतदाता ऐसे भी हैं, जिनके मतदाता सूची सेे नाम ही गायब कर दिए गए। मतदाता सूची की गड़बड़ियों से मतदाता दिन भर हलकान दिखे।
बिजुआ ब्लाक के दाउदपुर में अपना मत डालने के लिए आधार और पर्ची लेकर सुधा देवी पत्नी सुरेश मतदान केंद्र पर पहुंचीं तो पीठासीन अधिकारी ने उनका मतदाता सूची में नाम गलत बताते हुए बैरंग कर दिया। इसके बाद सुधा दोबारा स्टाल पर मतदाता सूची में अपना नाम तलाशने पहुंचीं तो उनका नाम बदला मिला जबकि उनके पति का नाम वही था। अपने आधार के बलबूते दोबारा सुधा मतदान केंद्र पर पहुंची और सूची में नाम गलत होने के लिए बीएलओ को जिम्मेदार ठहराते हुए मतदान का प्रयास किया, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने उनकी एक न सुनी। इसी गांव की चमेली पत्नी नंदकिशोर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह वोटर आईडी और पर्ची लेकर मतदान केंद्र पहुंचीं, तो पीठासीन अधिकारी ने मतदाता सूची में मिलान के बाद उनका नाम गलत ठहरा दिया। जबकि चमेली ने मतदाता पहचान पत्र दिखाते हुए मतदान की अपील की, लेकिन अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ और बिना मतदान किए चमेली का लौटना पड़ा। इसी तरह दाउदपुर निवासी हुसैन खान का नाम मतदाता सूची में हसन खान अंकित हो गया, जिससे यह भी मतदान नहीं कर सके। जबकि शीबा खान, अंबेश, शालू के मतदाता सूची से नाम ही गायब थे। जबकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इन्होंने मतदान किया था। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 20 फीसदी लोगों के नाम मतदाता सूची में गलत तरीके से दर्ज किए गए, जिससे वोट नहीं डाले जा सके। जबकि ग्रामीणों मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर शिकायत की थी।
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बिजुआ ब्लाक के दाउदपुर में अपना मत डालने के लिए आधार और पर्ची लेकर सुधा देवी पत्नी सुरेश मतदान केंद्र पर पहुंचीं तो पीठासीन अधिकारी ने उनका मतदाता सूची में नाम गलत बताते हुए बैरंग कर दिया। इसके बाद सुधा दोबारा स्टाल पर मतदाता सूची में अपना नाम तलाशने पहुंचीं तो उनका नाम बदला मिला जबकि उनके पति का नाम वही था। अपने आधार के बलबूते दोबारा सुधा मतदान केंद्र पर पहुंची और सूची में नाम गलत होने के लिए बीएलओ को जिम्मेदार ठहराते हुए मतदान का प्रयास किया, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने उनकी एक न सुनी। इसी गांव की चमेली पत्नी नंदकिशोर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह वोटर आईडी और पर्ची लेकर मतदान केंद्र पहुंचीं, तो पीठासीन अधिकारी ने मतदाता सूची में मिलान के बाद उनका नाम गलत ठहरा दिया। जबकि चमेली ने मतदाता पहचान पत्र दिखाते हुए मतदान की अपील की, लेकिन अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ और बिना मतदान किए चमेली का लौटना पड़ा। इसी तरह दाउदपुर निवासी हुसैन खान का नाम मतदाता सूची में हसन खान अंकित हो गया, जिससे यह भी मतदान नहीं कर सके। जबकि शीबा खान, अंबेश, शालू के मतदाता सूची से नाम ही गायब थे। जबकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इन्होंने मतदान किया था। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 20 फीसदी लोगों के नाम मतदाता सूची में गलत तरीके से दर्ज किए गए, जिससे वोट नहीं डाले जा सके। जबकि ग्रामीणों मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर शिकायत की थी।
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