फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   villagers feared by tigers because tiger killed child

बाघ का खौफ: हाथों में लाठी-डंडे लेकर पहरेदारी कर रहे ग्रामीण

Thu, 17 Sep 2020 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 01:52 AM IST
विज्ञापन
villagers feared by tigers because tiger killed child
लखीमपुर खीरी के चकदहा गांव में हाथों में लाठी डंडा लेकर पहरेदारी करते ग्रामीण। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
ईसानगर-धौरहरा (लखीमपुर खीरी) ईसानगर वन बीट गनापुर के चकदहा गांव के मजरा चमारनपुरवा में बाघ के हमले में 12 वर्षीय किशोर की मौत के बाद से गांव में दहशत है। ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर गांव से खेतों तक पहरेदारी कर रहे हैं। उधर, वन विभाग की वॉचर टीम ने घटनास्थल का जायजा लेकर पदचिह्नों की भी पड़ताल की। इतनी बड़ी घटना के बाद भी किसी अधिकारी के मौके पर न पहुंचने से लोगों में गुस्सा है।
विज्ञापन

मजरा चमारनपुरवा में सोमवार की रात घर के बाहर से पुतान के बेटे बृजेश को बाघ गन्ने के खेत में खींच ले गया था। बाद में उसका अधखाया शव बरामद हुआ था। इस संबंध में मंगलवार को गांव में पहुंचे वन कर्मियों ने दावा किया कि हमला बाघ ने नहीं बल्कि किसी हिंसक वन्य जीव ने किया, बुधवार को उन्होंने तेंदुए के होने की भी आशंका जाहिर की।
विज्ञापन

बुधवार को ग्रामीणों कुन्नू, तीरथराम, प्रमोद, रामखेलावन आदि ने वन विभाग की लापरवाही पर आक्रोश जाहिर किया। इन लोगों का कहना था कि एक माह पहले गांव के बाहर गन्ने के खेत में बाघ देखा गया था बावजूद इसके सूचना देने के बाद भी वन विभाग ने सुध नहीं ली। अधिकारी समय रहते ध्यान देते तो हालात ऐसे नहीं बनते।
विज्ञापन
विज्ञापन

इधर, मंगलवार को किसी हिंसक पशु के हमले का दावा कर रहे वन कर्मियों का बुधवार को कहना था कि पगचिह्न तेंदुए के हैं। रेंजर अनिल शाह ने बताया कि क्षेत्र को चिह्नित कर 12 कैमरे लगाए जाएंगे। ग्रामीणों को सतर्क रहने और समूह में खेतों में जाने की सलाह दी जा रही है। दावा किया कि वन विभाग की टीम बराबर गश्त कर रही है।
एक साल में दो बच्चे बने वन्य जीवों का शिकार, फिर भी महकमा सुस्त
ईसानगर। चकदहा गांव में एक साल के अंदर दो बच्चों समेत कई मवेशियों का शिकार कर चुके बाघ और तेंदुओं की चहलकदमी को लेकर महकमा सुस्त नजर आ रहा है। आलम यह है कि हादसे के बाद कुछ दिनों तक तो विभागीय कर्मी कांबिंग करने की खानापूर्ति करते हैं लेकिन बाद में कोई इधर मुड़कर भी नहीं देखता। हादसे के बाद दहशतजदा लोग अब घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं और बच्चों को भी अकेला नहीं छोड़ रहे। गांव निवासी रितेश, रामकिशोर यादव, मैकू यादव, सोबरन, राजितराम आदि ने बताया कि पूरे गांव में दहशत का माहौल है। सबसे अधिक खतरा बच्चों को है, क्योंकि बाघ और तेंदुए ज्यादातर बच्चों को ही अपना निशाना बनाते हैं।
ग्रामीण बोले-वन विभाग का रवैया असंतोषजनक
करीब एक साल से गांव के आसपास बाघ व तेंदुए चहलकदमी कर रहे है। वन विभाग सिर्फ हिंसक पशु बताकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया, जिससे कई लोग काल के गाल में समा गए।
-हरीश कुमार
बच्चे की मौत से गांव वाले काफी दहशत में है। लोग मजदूरी करने तक नहीं जा रहे है। घरों से बच्चों एवं महिलाओं को बाघ के डर के कारण बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। पीड़ित परिवार को थोड़ी आर्थिक मदद देकर वन विभाग ने इति श्री कर ली है।
-छोटेलाल यादव
एक साल में दर्जनों बार गांव के अंदर तक बाघ और तेंदुए आए। सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी, पर वन विभाग के अधिकारी लापरवाह बने रहे। सोमवार को बाघ के हमले में एक बच्चे की जान चली गई, बावजूद इसके वन विभाग खामोश है।
-रामसागर यादव
ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीण अकेले गांव से नहीं निकल रहे हैं। महिलाओं और बच्चों ने खेत पर जाना बंद कर दिया है। 26 मार्च 20 को गांव के पास डुडकी में बच्ची को तेंदुए ने मार दिया था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण खौफजदा हैं।
बाघ की दस्तक ने उड़ा दी ग्रामीणों की नींद
ममरी। मोहम्मदी रेंज क्षेत्र में बाघ के हमले फिर बढ़ जाने से क्षेत्र में दहशत है। आलम यह है कि ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। गन्ने के खेतों में डेरा जमा चुका बाघ कभी पशुओं पर तो कभी ग्रामीणों पर हमला कर रहा है। हैरत की बात तो यह है कि इन घटनाओं की जानकारी देने के बाद भी महकमे के अधिकारी गंभीर नजर नहीं आते। घटना के बाद वनकर्मी मौके पर जाकर गांव वालों को सतर्क रहने का पाठ पढ़ाकर लौट जाते हैं।

क्षेत्र में बाघ की दस्तक और घटनाओं पर एक नजर
07 जून-सुंदरपुर के 35 वर्षीय सुशील बाघ के हमले में गंभीर घायल।
30 जून-बाघ ने सुंदरपुर में बैल को मार डाला।
04 जुलाई-बाघ ने सुंदरपुर में एक बैल की फिर जान ली।
05 जुलाई-बाघ ने जमुनहा में गाय को मार डाला।
19 जुलाई-सुंदरपुर में रमेश के घर में घुसा तेंदुआ।
05 अगस्त-बाघ ने नीलगाय को मार डाला।
12 अगस्त-बाघ ने सुंदरपुर में बछड़े को मार डाला।
27 अगस्त-बाघ ने रमेश की बकरी को मार डाला।
07 सितंबर-बाघ ने सजनिया में गाय को मार डाला।
13 सितंबर-बाघ का सुंदरपुर के दीपक शर्मा पर हमला।
अभयपुर में पकड़ा उत्पाती बंदर दुधवा में छोड़ा
धौरहरा। कई दिनों से एक बंदर अभयपुर गांव में काफी उत्पात मचा रहा था। कई लोगों को काट भी लिया, जिसकी शिकायत ग्राम प्रधान जगदीश रस्तोगी ने रेंजर अनिल शाह से की। बुधवार को मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जाल लगाकर बंदर को पकड़कर दुधवा में छोड़ दिया। बंदर के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed