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कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की रफ्तार बेहद धीमी

Mon, 29 Nov 2021 12:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 12:13 AM IST
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Very slow in making malnourished children malnourished
जिला अस्पताल के कुपोषित वार्ड में भर्ती बच्चे।
जिला अस्पताल के कुपोषण वार्ड के दस बेड पर पांच बच्चे भर्ती
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जिले में अतिकुपोषित 11487 और कुपोषित बच्चों की संख्या 37102
लखीमपुर खीरी। शासन की ओर से जिले में कुपोषण मिटाने के लिए चलाई जा रही मुहिम अब हांफने लगी है। जिम्मेदार अधिकारी कुपोषित बच्चों को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे 10 बेड के कुपोषण वार्ड में पांच बच्चे भर्ती कराए गए हैं। यहां बता दें कि जिले में अतिकुपोषित 11487 और कुपोषित बच्चों की संख्या 37102 है।
कुपोषण का कलंक मिटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से लेकर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग लगा हुआ है। बावजूद इसके जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। वहीं बच्चों को तंदुरुस्ती को लेकर न तो स्वास्थ्य विभाग गंभीर है और न ही बाल विकास एवं पुष्टाहार, जबकि बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए जिला अस्पताल में दस बेड़ का एक अलग वार्ड है। इसमें बच्चों को भर्ती कर नि:शुल्क इलाज के साथ पौष्टिक आहार मिलता है। मगर, जिम्मेदार कुपोषित बच्चों को वार्ड में भर्ती कराने तक की गंभीरता नहीं दिखा रहे, जबकि वार्ड में भर्ती बच्चों की माताओं को रोजाना 50 रुपये भत्ता भी मिलता है।
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पोषण पुनर्वास केंद्र की दिव्या बताती हैं कि वार्ड में बच्चों को भर्ती कर डॉक्टर की सलाह पर पौष्टिक आहार दिया जाता है। बच्चे की मां को भी आहार मिलता है। भर्ती बच्चे की मां को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता भी दिया जाता है। वहीं आंगनबाड़ी, आशा वर्कर के कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने पर उन्हें भी 50 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा फालोअप करने पर भी निर्धारित धनराशि मिलती है।
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जिले में 1306 बच्चे गंभीर कुपोषित
जिले में कुपोषित मैम श्रेणी में कुल 10612 बच्चे हैं, जबकि गंभीर रूप से कुपोषित सैम श्रेणी में कुल 1306 बच्चे शामिल हैं। इसमें बेहजम में 75, मितौली में 71, पसगवां में 98, धौरहरा में 285, गोला में 31, बांकेगंज में 29, बिजुआ में 42, पलिया में 45, निघासन में 104, फूलबेहड़ में 106, रमियाबेहड़ में 196, मोहम्मदी में 48, ईसानगर में 44, नकहा में 89 एवं शहर में इनकी संख्या 17 है।

आंगनबाड़ी, आशा वर्कर सहित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर वार्ड में भर्ती करवाती हैं। जहां पर बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
- डॉ. संतोष मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी, जिला अस्पताल
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