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Lakhimpur Kheri News: आधी-जुलाई बीत जीने के बाद भी नहीं मिला यूनिफार्म, बैग का पैसा
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लखीमपुर खीरी। परिषदीय विद्यालयों का नवीन सत्र आधा बीत चुका है लेकिन अब भी स्कूलों के बच्चे पुरानी और फटी यूनिफार्म के साथ स्कूल पहुंच रहे हैं। प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी अभिभावकों के खाते में जूता-मोजा, बैग इत्यादि का पैसा नहीं पहुंचा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से कार्यवाही पूरी की जा चुकी है। पैसा डीबीटी के जरिए खातों में जाएगा।
जिले में 3106 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व संविलियन स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पांच लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। हर साल स्कूल खुलते ही बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस, बैग व जूता मोजा खरीदने के लिए धनराशि भेज दी जाती थी लेकिन इस बार अभी तक एक भी अभिभावक के खाते में धनराशि नहीं भेजी गई है।
विभाग शासन को डाटा भेजने की बात कह रहा है। पैसा न पहुंच पाने के चलते स्कूल बच्चे निर्धारित यूनिफार्म के बजाए रंग-बिरंगे कपड़ों में स्कूल पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि गर्मियों की छुट्टियों से पहले ही विभाग ने नए सत्र में बच्चों के नामांकन कराए और उनका आधार आदि का डाटा फीड कराया था।
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पंजीकृत बच्चों का करीब 92 प्रतिशत डाटा आधार से फीड किया जा चुका है। महज आठ प्रतिशत छात्र-छात्राओं के डाटा फीड होने का कार्य जारी है। कहा कि शासन स्तर से ही डीबीटी होता है। इसलिए किसी भी दिन पैसा अभिभावकों के खातों में पहुंच सकता है।
-प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए
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जिले में 3106 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व संविलियन स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पांच लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। हर साल स्कूल खुलते ही बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस, बैग व जूता मोजा खरीदने के लिए धनराशि भेज दी जाती थी लेकिन इस बार अभी तक एक भी अभिभावक के खाते में धनराशि नहीं भेजी गई है।
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विभाग शासन को डाटा भेजने की बात कह रहा है। पैसा न पहुंच पाने के चलते स्कूल बच्चे निर्धारित यूनिफार्म के बजाए रंग-बिरंगे कपड़ों में स्कूल पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि गर्मियों की छुट्टियों से पहले ही विभाग ने नए सत्र में बच्चों के नामांकन कराए और उनका आधार आदि का डाटा फीड कराया था।
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पंजीकृत बच्चों का करीब 92 प्रतिशत डाटा आधार से फीड किया जा चुका है। महज आठ प्रतिशत छात्र-छात्राओं के डाटा फीड होने का कार्य जारी है। कहा कि शासन स्तर से ही डीबीटी होता है। इसलिए किसी भी दिन पैसा अभिभावकों के खातों में पहुंच सकता है।
-प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए