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किसी को यूक्रेन की सेना कर रही परेशान, तो ज्यादातर बंकर में फंसे
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रोमानिया बॉर्डर पर खड़े छात्र।
वतन वापसी के लिए वहां की कई यूनिवर्सिटी छात्रों को बस से भेज रहीं रोमानिया
पलिया के संपूर्णानगर के नबील अहमद भी यूक्रेन में हैं फंसे, कुल संख्या हुई 15
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्रों की वतन वापसी की उम्मीद जोर पकड़ने तो लगी है, लेकिन उसमें लगने वाली देरी से परिजन परेशान हैं। परिजन का कहना है कि ज्यादातर छात्र बंकरों में ही फंसे हैं, जो छात्र किसी तरह वहां से रोमामिना के लिए निकले हैं उन्हें यूक्रेन सेना कागजी कार्यवाही, वीजा आदि के लिए रोक रही है।
सरकार की भारतीय छात्रों की वतन वापसी की पहल के बाद यूक्रेन की तमाम यूनिवर्सिटी छात्रों को बस से रोमानिया भेज रही हैं, जहां से वीजा और अन्य कागजी कार्यवाही के बाद छात्रों को भारत वापस लाया जा रहा है, लेकिन इसमें लगने वाली देरी पर परिजन ने सरकार से अपने लाडलों की जल्द स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है। उधर, पलिया के संपूर्णानगर के नबील अहमद के भी यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिली है, जिससे यह आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया है।
रोमानिया बॉर्डर पर फंसा अनुराग, तो अब्दुल मन्नान का पता नहीं
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन के टरनोपिल शहर में फंसा मोहम्मदी का अनुराग यादव वतन वापसी की राह में एक कदम आगे तो बढ़ गया, लेकिन 24 घंटे बीतने के बाद भी वह रविवार को रोमानिया बॉर्डर पर ही फंसा हुआ था। वहीं, खजुरिया के अब्दुल मन्नान बंकर से निकलकर बस के जरिये रोमानिया बॉर्डर के लिए रवाना तो हुए हैं, लेकिन शनिवार से उनसे कोई बात नहीं हो पाई है, जिससे उन्हें अब बेटे की चिंता सताने लगी है।
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अनुराग यादव के पिता अरविंद यादव बताते हैं कि यूनिवर्सिटी प्रशासन बसों के जरिये छात्रों को रोमानिया बॉर्डर तक छोड़ रहा है, जिससे हवाई मार्ग से वह भारत में दाखिल हो सकें, लेकिन वीजा और तमाम कागजी दस्तावेजों की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि 24 घंटे बाद भी उनका बेटा रोमानिया बॉर्डर पर फंसा हुआ है। उसके पास खाने पीने का सामान खत्म हो गया है, जबकि रोमानिया के अधिकारी और कर्मचारी जरा भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टरपोनिल से रोमानिया बॉर्डर 650 किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिये यूनिवर्सिटी प्रशासन भारतीय छात्रों को रोमानिया, पोलैंड और हंग्री के बॉर्डर तक छोड़ रहा है, इससे बच्चे की घर वापसी की उम्मीद तो बंधी है, लेकिन इसमें लगने वाली देरी निराश कर रही है। सरकार को इस दिशा में कुछ करना चाहिये और बिना वीजा के छात्रों को सीधे स्वदेश वापसी सुनिश्चित करानी चाहिये।
उधर, पलिया क्षेत्र के खजुरिया निवासी अब्दुल मन्नान अंसारी के पिता बकरीदन अंसारी ने बताया कि उनका पुत्र बंकर में छिपा हुआ था, जिसके बाद उससे बात हुई थी तो वह बस से रोमानिया बार्डर के लिए निकला था। दो बसों में करीब 88 छात्र रोमानिया बार्डर के लिए रवाना हुए थे। बस से निकलने की जानकारी होने के बाद से अभी तक बेटे से कोई भी संपर्क नहीं हो सका है। किसी अधिकारी या किसी कार्यालय से भी कोई फोन आदि नहीं आया है। जिससे बेटे की चिंता सता रही है। बेटा सुरक्षित हो और रोमानिया बार्डर तक पहुंच जाता है तो वहां से भी भारत सरकार को छात्रों को लाने की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि सभी सुरक्षित वापस भारत आ सके।
संपूर्णानगर के नबील अहमद खान भी फंसे हैं बंकर में
संपूर्णानगर। कस्बे के चिकित्सक डॉ. इजहार अहमद खान ने बताया कि उनके छोटे भाई अबरार अहमद खान मूल निवासी संपूर्णानगर के हैं और वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं। उनका पुत्र नबील अहमद खान करीब दो साल पहले मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। कुछ माह पहले ही घर आया था और उसके बाद छुट्टी पूरी कर वापस यूक्रेन गया था।
नबील के चचेरे भाई डॉ. आईए खान ने बताया कि वह बंकर में फंसा हुआ है और उसको कोई सहायता नहीं मिल पा रही है। खाने-पीने की वस्तुओं की भी कमी है। पलिया केएसडीएम डॉ. अमरेश कुमार से बात हुई थी उन्होंने भी आश्वासन दिया है कि परेशान न हों जो भी सूचना मिले उसे साझा करें।
हमने बच्चों से कहा है कि अब जैसे हो अपने हॉस्टल पहुंचो
पलिया/संपूर्णानगर। पलिया तहसील क्षेत्र के चार मेडिकल के छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। इसमें एक पलिया के मोहल्ला किसान द्वितीय का है तो बाकी संपूर्णानगर क्षेत्र के गोविंदनगर, खजुरिया व संपूर्णानगर के हैं। इनके परिजन की मानें तो यूक्रेन में अब यूक्रेनी सेना द्वारा भारतीय छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। हमने बच्चों से कहा है कि अब जैसे हो अपने हॉस्टल पहुंचो
गोविंदनगर निवासी ओमप्रकाश सिंह का पुत्र शिवम सिंह यूक्रेन में फंसा हुआ है। पिता ओमप्रकाश का कहना है कि बच्चे पोलैंड बार्डर पर पहुंचे गए हैं, लेकिन अब यूक्रेन पुलिस द्वारा उनपर लाठीचार्ज किया जा रहा है। यूक्रेनी सेना उनको प्रताड़ित कर रही है। ऐसे में हमने बच्चों से कहा है कि अब जैसे हो अपने हॉस्टल पहुंचो और अपनी जान बचाओ। बताया कि पाकिस्तान द्वारा अपने बच्चों को वहां से वीजा बनवाकर ले जाया जा रहा है और भारत सरकार भी बच्चे वापस ला रही है, लेकिन दो-दो सौ बच्चे ही लाए जा रहे हैं। ऐसे में बाकी बचे बच्चों पर यूक्रेनी सेना क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर रही है।
पलिया के मोहल्ला किसान द्वितीय निवासी मुकेश गोयल के पुत्र ऋषभ गोयल यूक्रेन में फंसे हैं। ऋषभ के पिता मुकेश ने बताया कि फिलहाल उनका पुत्र हॉस्टल के नीचे बने बंकर में अन्य छात्रों के साथ छुपा हुआ है, वहां पर आसपास बम के धमाके तो हो रहे हैं लेकिन जब तक बंकर में है सुरक्षित हैं। पूरे इलाके में यूक्रेन प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है, जिसके चलते जो जहां है वहीं पर छिपा हुआ है। उनका पुत्र भी हॉस्टल के बंकर में मौजूद है, यहां हॉस्टल की तरफ से खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कर्फ्यू लगा होने से आखिर कब तक ऐसे ही छिपा जा सकता है। भारत सरकार बच्चों को वापस जल्द से जल्द लाने की व्यवस्था करे।
संपूर्णानगर के छात्र नबील अहमद खान के चाचा डॉ. इजहार अहमद खान ने बताया कि बीती रात भाई से बात हुई थी तो वह बता रहे थे कि नबील बंकर में छिपा हुआ है और आसपास तेजी से ब्लॉस्ट हो रहे हैं। इस तरह छिपकर छात्र अब अपने दिन व रात काट रहे हैं। खाने-पीने की सुविधाएं भी धीरे-धीरे बंकर में समाप्त हो रही हैं। ऐसे में किस तरीके से छात्र कब तक छिपकर अपनी जान बचाते रहेंगे। भारत सरकार जल्द से जल्द यूक्रेन में बसे सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाए।
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पलिया के संपूर्णानगर के नबील अहमद भी यूक्रेन में हैं फंसे, कुल संख्या हुई 15
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्रों की वतन वापसी की उम्मीद जोर पकड़ने तो लगी है, लेकिन उसमें लगने वाली देरी से परिजन परेशान हैं। परिजन का कहना है कि ज्यादातर छात्र बंकरों में ही फंसे हैं, जो छात्र किसी तरह वहां से रोमामिना के लिए निकले हैं उन्हें यूक्रेन सेना कागजी कार्यवाही, वीजा आदि के लिए रोक रही है।
सरकार की भारतीय छात्रों की वतन वापसी की पहल के बाद यूक्रेन की तमाम यूनिवर्सिटी छात्रों को बस से रोमानिया भेज रही हैं, जहां से वीजा और अन्य कागजी कार्यवाही के बाद छात्रों को भारत वापस लाया जा रहा है, लेकिन इसमें लगने वाली देरी पर परिजन ने सरकार से अपने लाडलों की जल्द स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है। उधर, पलिया के संपूर्णानगर के नबील अहमद के भी यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिली है, जिससे यह आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया है।
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रोमानिया बॉर्डर पर फंसा अनुराग, तो अब्दुल मन्नान का पता नहीं
लखीमपुर खीरी। यूक्रेन के टरनोपिल शहर में फंसा मोहम्मदी का अनुराग यादव वतन वापसी की राह में एक कदम आगे तो बढ़ गया, लेकिन 24 घंटे बीतने के बाद भी वह रविवार को रोमानिया बॉर्डर पर ही फंसा हुआ था। वहीं, खजुरिया के अब्दुल मन्नान बंकर से निकलकर बस के जरिये रोमानिया बॉर्डर के लिए रवाना तो हुए हैं, लेकिन शनिवार से उनसे कोई बात नहीं हो पाई है, जिससे उन्हें अब बेटे की चिंता सताने लगी है।
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अनुराग यादव के पिता अरविंद यादव बताते हैं कि यूनिवर्सिटी प्रशासन बसों के जरिये छात्रों को रोमानिया बॉर्डर तक छोड़ रहा है, जिससे हवाई मार्ग से वह भारत में दाखिल हो सकें, लेकिन वीजा और तमाम कागजी दस्तावेजों की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि 24 घंटे बाद भी उनका बेटा रोमानिया बॉर्डर पर फंसा हुआ है। उसके पास खाने पीने का सामान खत्म हो गया है, जबकि रोमानिया के अधिकारी और कर्मचारी जरा भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टरपोनिल से रोमानिया बॉर्डर 650 किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिये यूनिवर्सिटी प्रशासन भारतीय छात्रों को रोमानिया, पोलैंड और हंग्री के बॉर्डर तक छोड़ रहा है, इससे बच्चे की घर वापसी की उम्मीद तो बंधी है, लेकिन इसमें लगने वाली देरी निराश कर रही है। सरकार को इस दिशा में कुछ करना चाहिये और बिना वीजा के छात्रों को सीधे स्वदेश वापसी सुनिश्चित करानी चाहिये।
उधर, पलिया क्षेत्र के खजुरिया निवासी अब्दुल मन्नान अंसारी के पिता बकरीदन अंसारी ने बताया कि उनका पुत्र बंकर में छिपा हुआ था, जिसके बाद उससे बात हुई थी तो वह बस से रोमानिया बार्डर के लिए निकला था। दो बसों में करीब 88 छात्र रोमानिया बार्डर के लिए रवाना हुए थे। बस से निकलने की जानकारी होने के बाद से अभी तक बेटे से कोई भी संपर्क नहीं हो सका है। किसी अधिकारी या किसी कार्यालय से भी कोई फोन आदि नहीं आया है। जिससे बेटे की चिंता सता रही है। बेटा सुरक्षित हो और रोमानिया बार्डर तक पहुंच जाता है तो वहां से भी भारत सरकार को छात्रों को लाने की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि सभी सुरक्षित वापस भारत आ सके।
संपूर्णानगर के नबील अहमद खान भी फंसे हैं बंकर में
संपूर्णानगर। कस्बे के चिकित्सक डॉ. इजहार अहमद खान ने बताया कि उनके छोटे भाई अबरार अहमद खान मूल निवासी संपूर्णानगर के हैं और वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं। उनका पुत्र नबील अहमद खान करीब दो साल पहले मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। कुछ माह पहले ही घर आया था और उसके बाद छुट्टी पूरी कर वापस यूक्रेन गया था।
नबील के चचेरे भाई डॉ. आईए खान ने बताया कि वह बंकर में फंसा हुआ है और उसको कोई सहायता नहीं मिल पा रही है। खाने-पीने की वस्तुओं की भी कमी है। पलिया केएसडीएम डॉ. अमरेश कुमार से बात हुई थी उन्होंने भी आश्वासन दिया है कि परेशान न हों जो भी सूचना मिले उसे साझा करें।
हमने बच्चों से कहा है कि अब जैसे हो अपने हॉस्टल पहुंचो
पलिया/संपूर्णानगर। पलिया तहसील क्षेत्र के चार मेडिकल के छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। इसमें एक पलिया के मोहल्ला किसान द्वितीय का है तो बाकी संपूर्णानगर क्षेत्र के गोविंदनगर, खजुरिया व संपूर्णानगर के हैं। इनके परिजन की मानें तो यूक्रेन में अब यूक्रेनी सेना द्वारा भारतीय छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। हमने बच्चों से कहा है कि अब जैसे हो अपने हॉस्टल पहुंचो
गोविंदनगर निवासी ओमप्रकाश सिंह का पुत्र शिवम सिंह यूक्रेन में फंसा हुआ है। पिता ओमप्रकाश का कहना है कि बच्चे पोलैंड बार्डर पर पहुंचे गए हैं, लेकिन अब यूक्रेन पुलिस द्वारा उनपर लाठीचार्ज किया जा रहा है। यूक्रेनी सेना उनको प्रताड़ित कर रही है। ऐसे में हमने बच्चों से कहा है कि अब जैसे हो अपने हॉस्टल पहुंचो और अपनी जान बचाओ। बताया कि पाकिस्तान द्वारा अपने बच्चों को वहां से वीजा बनवाकर ले जाया जा रहा है और भारत सरकार भी बच्चे वापस ला रही है, लेकिन दो-दो सौ बच्चे ही लाए जा रहे हैं। ऐसे में बाकी बचे बच्चों पर यूक्रेनी सेना क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर रही है।
पलिया के मोहल्ला किसान द्वितीय निवासी मुकेश गोयल के पुत्र ऋषभ गोयल यूक्रेन में फंसे हैं। ऋषभ के पिता मुकेश ने बताया कि फिलहाल उनका पुत्र हॉस्टल के नीचे बने बंकर में अन्य छात्रों के साथ छुपा हुआ है, वहां पर आसपास बम के धमाके तो हो रहे हैं लेकिन जब तक बंकर में है सुरक्षित हैं। पूरे इलाके में यूक्रेन प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है, जिसके चलते जो जहां है वहीं पर छिपा हुआ है। उनका पुत्र भी हॉस्टल के बंकर में मौजूद है, यहां हॉस्टल की तरफ से खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कर्फ्यू लगा होने से आखिर कब तक ऐसे ही छिपा जा सकता है। भारत सरकार बच्चों को वापस जल्द से जल्द लाने की व्यवस्था करे।
संपूर्णानगर के छात्र नबील अहमद खान के चाचा डॉ. इजहार अहमद खान ने बताया कि बीती रात भाई से बात हुई थी तो वह बता रहे थे कि नबील बंकर में छिपा हुआ है और आसपास तेजी से ब्लॉस्ट हो रहे हैं। इस तरह छिपकर छात्र अब अपने दिन व रात काट रहे हैं। खाने-पीने की सुविधाएं भी धीरे-धीरे बंकर में समाप्त हो रही हैं। ऐसे में किस तरीके से छात्र कब तक छिपकर अपनी जान बचाते रहेंगे। भारत सरकार जल्द से जल्द यूक्रेन में बसे सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाए।