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Lakhimpur Kheri News: गोदावरी में चारे की कमी और सर्दी से दो दर्जन गायों की मौत
Sun, 04 Jan 2026 12:19 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:19 AM IST
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धनगढ़ी (नेपाल)। कैलाली जिले की गोदावरी नगरपालिका-सात स्थित एक गोशाला में भूख, प्यास और सर्दी के कारण करीब दो दर्जन गायों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों और पशु प्रेमियों में काफी गुस्सा है।
स्थानीय किसानों की फसलों को बचाने के लिए छुट्टा पशुओं और गायों को पकड़कर तार-बाड़ से घिरी एक अस्थाई गोशाला में रखा गया था। गोशाला में उनके रख-रखाव के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गायों के लिए चारे और पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की सर्दी में गायों के पास सिर छिपाने की जगह नहीं थी, जिससे वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थीं।
बीमार पशुओं के लिए इलाज और दवाइयों का अभाव था। नेपाली कांग्रेस के युवा नेता लोक राज पांडे ने इस घटना को हृदयविदारक बताते हुए कहा कि चारे की कमी और सर्दी ही इन मौतों की मुख्य वजह है। स्थानीय व्यापारी दिल्लीराज अवस्थी ने भी सामूहिक रूप से गो माता की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया। हैरानी की बात यह है कि यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले जनवरी 2024 में भी लक्ष्मी सामुदायिक वन में बनी गोशाला में दर्जनों पशुओं की इसी तरह मौत हुई थी। बार-बार हो रही इन घटनाओं से स्पष्ट है कि स्थानीय निकाय छुट्टा पशुओं के प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और गोशाला में बचे हुए पशुओं के लिए तुरंत चारे और गर्म बिछावन तथा चिकित्सा की व्यवस्था की जाए।
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स्थानीय किसानों की फसलों को बचाने के लिए छुट्टा पशुओं और गायों को पकड़कर तार-बाड़ से घिरी एक अस्थाई गोशाला में रखा गया था। गोशाला में उनके रख-रखाव के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गायों के लिए चारे और पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की सर्दी में गायों के पास सिर छिपाने की जगह नहीं थी, जिससे वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थीं।
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बीमार पशुओं के लिए इलाज और दवाइयों का अभाव था। नेपाली कांग्रेस के युवा नेता लोक राज पांडे ने इस घटना को हृदयविदारक बताते हुए कहा कि चारे की कमी और सर्दी ही इन मौतों की मुख्य वजह है। स्थानीय व्यापारी दिल्लीराज अवस्थी ने भी सामूहिक रूप से गो माता की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया। हैरानी की बात यह है कि यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले जनवरी 2024 में भी लक्ष्मी सामुदायिक वन में बनी गोशाला में दर्जनों पशुओं की इसी तरह मौत हुई थी। बार-बार हो रही इन घटनाओं से स्पष्ट है कि स्थानीय निकाय छुट्टा पशुओं के प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और गोशाला में बचे हुए पशुओं के लिए तुरंत चारे और गर्म बिछावन तथा चिकित्सा की व्यवस्था की जाए।