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डीसीबी बैंक मैनेजर सहित दो कैशियर हटाए गए
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- फोटो : सोशल मीडिया
उपमहाप्रबंधक और वरिष्ठ शाखा प्रबंधक ने शुरू की जांच
डीसीबी तिकुनिया में भूमिहीनों के खाते खोलकर गेहूं ब्रिकी का पैसा निकालने का मामला
निघासन। जिला सहकारी बैंक की तिकुनिया शाखा में भूमिहीनों के नाम खाता खोलकर गेहूं ब्रिकी का एक करोड़ से अधिक रुपया निकाले जाने के मामले में दोषी मैनेजर और दो कैशियर को जीएम ने हटा दिया है। इस मामले में उप महाप्रबंधक और वरिष्ठ शाखा प्रबंधक को जांच सौंपी गई है। उधर, तिकुनिया से हटाकर एक कैशियर का बेलरायां शाखा में स्थानांतरण करने से खाता धारकों ने नाराजगी जताते हुए कैशियर को निलंबित करने की मांग की है।
निघासन तहसील के गौरिया और दरेरी के 70 लोगों के राशन कार्ड पूर्ति विभाग ने इसलिए निरस्त कर दिए कि उनके खाते में लाखों रुपये गेहूं बिक्री का आया था। इस बात की भनक इन लोगों को नहीं थी कि इनके नाम से खाता खुल गए हैं। मिथलेश, अमीना, साबिरा आदि ने जानकारी करने के बाद जिला सहकारी बैंक में हंगामा काटा था। उसके बाद मामले में जांच शुरू हुई। प्रथम दृष्टया जांच में मैनेजर गिरजा दयाल राना, कैशियर शोभित वर्मा, सतीश सिंह दोषी पाए गए। तीनों को बैंक से हटाकर इनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई है।
पीड़ितों का आरोप है कि यह सारे फर्जी खाते कैशियर शोभित वर्मा ने खुलवाए थे। उसे तिकुनिया के पड़ोस की शाखा बेलरायां में तैनात किया गया है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए इन्हें निलंबित कर जिले से बाहर किया जाए, तभी निष्पक्ष जांच संभव है। उधर, आरोपी कैशियर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है।
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दो अधिकारियों को जांच सौंपी गई है। इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच प्रभावित न हो इसलिए पूरे स्टाफ को हटा दिया गया है। बेलरायां में कैशियर न होने के कारण शोभित को भेजा गया था। उसे भी वहां से शीघ्र हटाया जाएगा।
- हरिश्चंद्र भार्गव, जनरल मैनेजर, जिला सहकारी बैंक
घोटालेबाजों का नार्को टेस्ट कराने की मांग
बैंक कर्मचारी समेत खाता खुलवाने वाले कोआपरेटिव विभाग के अधिकारी और कर्मचारी का नार्को टेस्ट कराया जाए। सारा भ्रष्टाचार सामने आ जाएगा। किसानों का गेहूं और धान ब्रिकी नहीं हो रहा है और अधिकारी कर्मचारी मौज कर रहे हैं। इस मामले की यदि गंभीरता से जांच की गई तो करोडों का घोटाला निकलेगा।
- राजीव गुप्ता, प्रसपा, प्रदेश सचिव
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डीसीबी तिकुनिया में भूमिहीनों के खाते खोलकर गेहूं ब्रिकी का पैसा निकालने का मामला
निघासन। जिला सहकारी बैंक की तिकुनिया शाखा में भूमिहीनों के नाम खाता खोलकर गेहूं ब्रिकी का एक करोड़ से अधिक रुपया निकाले जाने के मामले में दोषी मैनेजर और दो कैशियर को जीएम ने हटा दिया है। इस मामले में उप महाप्रबंधक और वरिष्ठ शाखा प्रबंधक को जांच सौंपी गई है। उधर, तिकुनिया से हटाकर एक कैशियर का बेलरायां शाखा में स्थानांतरण करने से खाता धारकों ने नाराजगी जताते हुए कैशियर को निलंबित करने की मांग की है।
निघासन तहसील के गौरिया और दरेरी के 70 लोगों के राशन कार्ड पूर्ति विभाग ने इसलिए निरस्त कर दिए कि उनके खाते में लाखों रुपये गेहूं बिक्री का आया था। इस बात की भनक इन लोगों को नहीं थी कि इनके नाम से खाता खुल गए हैं। मिथलेश, अमीना, साबिरा आदि ने जानकारी करने के बाद जिला सहकारी बैंक में हंगामा काटा था। उसके बाद मामले में जांच शुरू हुई। प्रथम दृष्टया जांच में मैनेजर गिरजा दयाल राना, कैशियर शोभित वर्मा, सतीश सिंह दोषी पाए गए। तीनों को बैंक से हटाकर इनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई है।
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पीड़ितों का आरोप है कि यह सारे फर्जी खाते कैशियर शोभित वर्मा ने खुलवाए थे। उसे तिकुनिया के पड़ोस की शाखा बेलरायां में तैनात किया गया है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए इन्हें निलंबित कर जिले से बाहर किया जाए, तभी निष्पक्ष जांच संभव है। उधर, आरोपी कैशियर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है।
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दो अधिकारियों को जांच सौंपी गई है। इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच प्रभावित न हो इसलिए पूरे स्टाफ को हटा दिया गया है। बेलरायां में कैशियर न होने के कारण शोभित को भेजा गया था। उसे भी वहां से शीघ्र हटाया जाएगा।
- हरिश्चंद्र भार्गव, जनरल मैनेजर, जिला सहकारी बैंक
घोटालेबाजों का नार्को टेस्ट कराने की मांग
बैंक कर्मचारी समेत खाता खुलवाने वाले कोआपरेटिव विभाग के अधिकारी और कर्मचारी का नार्को टेस्ट कराया जाए। सारा भ्रष्टाचार सामने आ जाएगा। किसानों का गेहूं और धान ब्रिकी नहीं हो रहा है और अधिकारी कर्मचारी मौज कर रहे हैं। इस मामले की यदि गंभीरता से जांच की गई तो करोडों का घोटाला निकलेगा।
- राजीव गुप्ता, प्रसपा, प्रदेश सचिव