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थाली से दूर हो गईं सब्जियां
लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 15 Apr 2015 07:41 PM IST
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बेमौसम बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव का सबसे बुरा असर सब्जियों के उत्पादन पर पड़ा है। 50 फीसदी से अधिक सब्जियों की फसल चौपट हो चुकी है। गर्मी के सीजन की सब्जियां तो बाजार में आ गई हैं, लेकिन इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। रसोई का बजट बिगड़ने के साथ ही आम आदमी की थाली से मौसमी सब्जियां गायब हो रही हैं।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी-मार्च में बोई जाने वाली सब्जियाें की पौध बार-बार बारिश के चलते खराब हो गई। जो पौधे तैयार हुए उनमें तापमान में कमी के कारण फल नहीं आए। लौकी, भिंडी, तोरई, कद्दू, खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजे की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। सब्जियों के जो पौधे उग आए थे वे बारिश में गल गए जो सब्जियां बोई गई थीं उनका जमाव नहीं हो पाया। बार-बार की बारिश से केले की फसल को भी नुकसान हुआ है। कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि तापमान में कमी से प्याज की आड़ी कमजोर होगी।
सब्जी आढ़ती जमाल अहमद का कहना है कि सब्जियों पर महंगाई इस पूरे सीजन रहने की संभावना है। प्याज का उत्पादन कम होने से इसका असर पूरे साल रहने की आशंका है। मौसमी सब्जियाें के उत्पादन में कमी आने से इस गर्मी के सीजन में लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। सब्जियां महंगी होने से सब्जी व्यापार पर भी बुरा असर पड़ रहा है, इससे व्यापारी भी परेशान हैं।
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सब्जियों का तुलनात्मक भाव प्रति किलो
सब्जियां वर्तमान अप्रैल 2014 में
लौकी 30 रुपया 15 रुपया
भिंडी 80 रुपया 20 रुपया
करेला 80 रुपया 25 रुपया
तोरई 80 रुपया 15 रुपया
कद्दू 20 रुपया 10 रुपया
परवल 80 रुपया 60 रुपया
बार-बार बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव से सब्जियों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। सब्जियों की उगी हुई पौध बारिश में गल गई। जो फसल उग रही थी उसका जमाव नहीं हो पाया। मौसम की मार से सब्जियों का उत्पादन करीब 50 फीसदी कम हो गया है।
-डॉ. प्रदीप कुमार विसेन, कृषि वैज्ञानिक
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कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी-मार्च में बोई जाने वाली सब्जियाें की पौध बार-बार बारिश के चलते खराब हो गई। जो पौधे तैयार हुए उनमें तापमान में कमी के कारण फल नहीं आए। लौकी, भिंडी, तोरई, कद्दू, खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजे की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। सब्जियों के जो पौधे उग आए थे वे बारिश में गल गए जो सब्जियां बोई गई थीं उनका जमाव नहीं हो पाया। बार-बार की बारिश से केले की फसल को भी नुकसान हुआ है। कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि तापमान में कमी से प्याज की आड़ी कमजोर होगी।
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सब्जी आढ़ती जमाल अहमद का कहना है कि सब्जियों पर महंगाई इस पूरे सीजन रहने की संभावना है। प्याज का उत्पादन कम होने से इसका असर पूरे साल रहने की आशंका है। मौसमी सब्जियाें के उत्पादन में कमी आने से इस गर्मी के सीजन में लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। सब्जियां महंगी होने से सब्जी व्यापार पर भी बुरा असर पड़ रहा है, इससे व्यापारी भी परेशान हैं।
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सब्जियों का तुलनात्मक भाव प्रति किलो
सब्जियां वर्तमान अप्रैल 2014 में
लौकी 30 रुपया 15 रुपया
भिंडी 80 रुपया 20 रुपया
करेला 80 रुपया 25 रुपया
तोरई 80 रुपया 15 रुपया
कद्दू 20 रुपया 10 रुपया
परवल 80 रुपया 60 रुपया
बार-बार बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव से सब्जियों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। सब्जियों की उगी हुई पौध बारिश में गल गई। जो फसल उग रही थी उसका जमाव नहीं हो पाया। मौसम की मार से सब्जियों का उत्पादन करीब 50 फीसदी कम हो गया है।
-डॉ. प्रदीप कुमार विसेन, कृषि वैज्ञानिक