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अव्यवस्था के बीच एमसीएच विंग में मरीजों का इलाज शुरू
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मोतीपुर ओपीडी में मरीजों को देखते डॉक्टर।
पहले दिन करीब 600 मरीजों ने एमसीएच विंग जाकर कराया इलाज
तेज आंधी और बारिश ने बढ़ाई स्टाफ एवं मरीजों की मुश्किलें
रास्ता कच्चा होने के कारण अस्पताल तक जाना हुआ दूभर
ओयल-खीरी। जिला अस्पताल में ओपीडी बंद कर सोमवार से एमसीएच विंग में मरीजों को देखा जाने लगा। हालांकि पहले दिन मरीजों की संख्या बेहद कम रही। करीब 600 मरीजों ने ही एमसीएच विंग जाकर डॉक्टर को दिखाकर दवाएं ली। पहले ही दिन हुई बारिश ने मरीज से लेकर स्टाफ की मुश्किलें बढ़ा दी। बरसात होने से लोगों को कच्चे रास्ते पर चलना दुश्वार हो गया। वहीं वार्ड तैयार न होने के कारण मरीजों की भर्ती करने की प्रक्रिया भी बंद रही।
सोमवार को पहले दिन मरीज और स्टाफ लोगों से जानकार करते हुए एससीएच विंग पहुंचे। इसके बाद पर्चा बनने के साथ मरीजों को देखने की शुरूआत हुई। करीब 11 बजे शुरू हुई बारिश के कारण पहले दिन करीब 400 नए और 200 पुराने पर्चे पर मरीज देखे गए। आंधी-बारिश के चलते अस्पताल की बिजली भी चली गई, जिससे वहां पर अंधेरा छा गया। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि न तो अभी वार्ड तैयार हैं और न ही पूरी तरह से ओपीडी ही। ऐसे में मरीजों को भर्ती करने के बजाय सिर्फ दवाएं देकर घर भेज दिया जा रहा। पैथोलॉजी लैब शुरू होने पर पहले दिन 20 लोगों की जांच हुई।
अस्पताल व्यवस्थित कराने में लगे रहे सीएमएस
एमसीएच विंग के सीएमएस डॉ. अवनीश चंद्र श्रीवास्तव अस्पताल परिसर का भ्रमण कर जिला अस्पताल से आये सामान की शिफ्टिंग कराते रहे, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए। उन्होंने बताया कि एक दो दिन में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन आ जाने से मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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पहले दिन हुई ओपीडी
मानसिक रोग- 40
बुजुर्ग मरीज- 28,
अस्थि रोग- 23
फिजीशियन डॉ. राजकुमार वर्मा- 14,
फिजीशियन डॉ. आईके राम चंदानी- पांच
आंधी से क्षतिग्रस्त हुआ इमरजेंसी गेट, भरा पानी
अचानक तेज आई आंधी और बारिश से एमसीएच का इमरजेंसी गेट क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे परिसर में पानी भर गया। इस पर सीएमएस ने सफाई कर्मियों से पानी निकलवाया। हवा इतनी तेज थी कि छत पर लगी कई प्लेटें भी निकलकर फर्श पर आ गिरीं।
बारिश के चलते मुख्य मार्ग पर हुआ दलदल
हाइवे से अस्पताल तक मार्ग कच्चा है। बारिश होने से इस पर दलदल हो गया। ऐसे में मरीज और स्टाफ बेहद मुश्किलों से अस्पताल तक पहुंच सके। कच्चे रास्ते पर पानी भरने से हुई फिसलन लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। स्टाफ का कहना है कि कम से कम रोड बनने के बाद ही अस्पताल को यहां शिफ्ट करना था।
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तेज आंधी और बारिश ने बढ़ाई स्टाफ एवं मरीजों की मुश्किलें
रास्ता कच्चा होने के कारण अस्पताल तक जाना हुआ दूभर
ओयल-खीरी। जिला अस्पताल में ओपीडी बंद कर सोमवार से एमसीएच विंग में मरीजों को देखा जाने लगा। हालांकि पहले दिन मरीजों की संख्या बेहद कम रही। करीब 600 मरीजों ने ही एमसीएच विंग जाकर डॉक्टर को दिखाकर दवाएं ली। पहले ही दिन हुई बारिश ने मरीज से लेकर स्टाफ की मुश्किलें बढ़ा दी। बरसात होने से लोगों को कच्चे रास्ते पर चलना दुश्वार हो गया। वहीं वार्ड तैयार न होने के कारण मरीजों की भर्ती करने की प्रक्रिया भी बंद रही।
सोमवार को पहले दिन मरीज और स्टाफ लोगों से जानकार करते हुए एससीएच विंग पहुंचे। इसके बाद पर्चा बनने के साथ मरीजों को देखने की शुरूआत हुई। करीब 11 बजे शुरू हुई बारिश के कारण पहले दिन करीब 400 नए और 200 पुराने पर्चे पर मरीज देखे गए। आंधी-बारिश के चलते अस्पताल की बिजली भी चली गई, जिससे वहां पर अंधेरा छा गया। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि न तो अभी वार्ड तैयार हैं और न ही पूरी तरह से ओपीडी ही। ऐसे में मरीजों को भर्ती करने के बजाय सिर्फ दवाएं देकर घर भेज दिया जा रहा। पैथोलॉजी लैब शुरू होने पर पहले दिन 20 लोगों की जांच हुई।
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अस्पताल व्यवस्थित कराने में लगे रहे सीएमएस
एमसीएच विंग के सीएमएस डॉ. अवनीश चंद्र श्रीवास्तव अस्पताल परिसर का भ्रमण कर जिला अस्पताल से आये सामान की शिफ्टिंग कराते रहे, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए। उन्होंने बताया कि एक दो दिन में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन आ जाने से मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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पहले दिन हुई ओपीडी
मानसिक रोग- 40
बुजुर्ग मरीज- 28,
अस्थि रोग- 23
फिजीशियन डॉ. राजकुमार वर्मा- 14,
फिजीशियन डॉ. आईके राम चंदानी- पांच
आंधी से क्षतिग्रस्त हुआ इमरजेंसी गेट, भरा पानी
अचानक तेज आई आंधी और बारिश से एमसीएच का इमरजेंसी गेट क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे परिसर में पानी भर गया। इस पर सीएमएस ने सफाई कर्मियों से पानी निकलवाया। हवा इतनी तेज थी कि छत पर लगी कई प्लेटें भी निकलकर फर्श पर आ गिरीं।
बारिश के चलते मुख्य मार्ग पर हुआ दलदल
हाइवे से अस्पताल तक मार्ग कच्चा है। बारिश होने से इस पर दलदल हो गया। ऐसे में मरीज और स्टाफ बेहद मुश्किलों से अस्पताल तक पहुंच सके। कच्चे रास्ते पर पानी भरने से हुई फिसलन लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। स्टाफ का कहना है कि कम से कम रोड बनने के बाद ही अस्पताल को यहां शिफ्ट करना था।