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बाघिन के गले में प्लास्टिक की रस्सी का फंदा..साहब कह रहे शिकार की आशंका

Wed, 12 Aug 2020 02:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2020 02:11 AM IST
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Trap of a plastic rope around the tigress's neck ... fear of hunting, Sahab
घटनास्थल पर मौजूद डीटीआर के एफडी, साथ में डीडी बफरजोन। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटे एक खेत में बाघिन का शव मिलने से मंगलवार को हड़कंप मच गया। बाघिन के गले में प्लास्टिक की मजबूत रस्सी का फंदा होने से पूरे इलाके में चर्चा है कि शिकार हुआ है, जबकि सारे प्रमाणों को दरकिनार कर अफसर शिकार की आशंका जता रहे हैं। इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि बाघिन के गले में फंदा लगा होने से वह कुछ खा-पी नहीं सकी और उसकी भूख-प्यास से मौत हो गई। गले पर जख्म की बात भी दर्शाई गई है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट में बांकेगंज कस्बे के निकट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास एक खेत में मिले बाघिन के शव के गले में पड़ी प्लास्टिक की रस्सी भी शिकार की ओर ही इशारा कर रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने शव का निरीक्षण करने के बाद यह अनुमान लगाया है कि बाघिन की मौत मंगलवार की सुबह ही हुई है, जबकि उसके गले में पड़ा फंदा तीन-चार दिन पहले का प्रतीत हो रहा है। शव पाए जाने के स्थान पर उस बाघिन के ताजे पगचिह्न भी मिले है। इससे वन विभाग के अधिकारी यह अनुमान लगा रहे हैं कि किसी शिकारी ने पहले इस बाघिन को फंदे में फंसाया होगा, लेकिन बाघिन फंदे सहित भागने में कामयाब रही। इस बीच गले में पड़ा रस्सी का फंदा भागते समय इधर-उधर उलझ कर उसके गले में कसता चला गया। सांस लेने में हो रही दिक्कत के बावजूद बाघिन भागती रही और चरी के खेत में आकर उसकी सांसे रुक गई और उसकी मौत हो गई। वन विभाग तमाम आशंकाओं को ही केंद्र बिंदु में रखकर मामले की गहराई से छानबीन कर रहा है।
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गले में फंदे का पहला मामला
खाबड़, कुड़का और जहर देकर बाघों के शिकार के तो कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन गले में फंदा बनाकर बाघिन के शिकार का यह पहला मामला सामने आया है। इससे यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि संभवत: किन्हीं छोटे-मोटे शिकारियों ने खेतों में आने वाले शाकाहारी वन्यजीवों का शिकार करने के लिए फंदा लगाया होगा, जिसमें दुुर्भाग्यवश यह बाघिन फंस गई।
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पीसीसीएफ (वन्यजीव ) ने घटनास्थल का निरीक्षण किया
बाघिन की मौत की सूचना मिलने पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) सुनील कुमार पांडेय मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से वार्ता कर पूरी जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न पहलुओं पर जांच के आदेश दिए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट: फंदा लगने के बाद भूख-प्यास से तड़प कर हुई बाघिन की मौत
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल के निकट खेत में मिले बाघिन के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने मंगलवार शाम करीब छह बजे मैलानी रेंज परिसर के गेस्ट हाउस में किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि बाघिन की मौत भूख और प्यास से हुई। डॉक्टरों का अनुमान है कि बाघिन के गले में फंदा फंसने से पिछले कई दिनों से वह कुछ खा-पी नहीं पा रही थी। इससे वह लगातार कमजोर होती चली गई। उसका पेट भी खाली था। इसी के चलते उसकी मौत हो गई।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया तीन डॉक्टरों के पैनल से बाघिन के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। डॉक्टरों ने बाघिन की उम्र सात से आठ वर्ष बताई है। उसके सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। बाघिन के गले में नायलान की रस्सी का फंदा फंसा होने के कारण उसकी रगड़न से गर्दन के नीचे घाव भी मिला है। उन्होंने बताया कि पैनल में आवीआरआई बरेली के डॉ करिकलन, डॉ दया शंकर के अलावा मैलानी पशु चिकित्सालय के डॉ जगदेव सिंह शामिल थे। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन के शव को जला दिया। इस मौके पर डीटीआर एफडी संजय पाठक समेत वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
पिछले दो साल में अस्वाभाविक मौत में मारे गए चार बाघ
वर्ष 2019: दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला रेंज के बिझौली गांव के पास बड़ी नहर में एक बाघिन का शव मिला
वर्ष 2019: दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर जंगल में 27 मार्च को शिकारियों के बनाए गए लोहे के जाल में फंसकर बाघ की मौत
वर्ष 2020: दो जून को दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला रेंज में बिझौली गांव के पास अविकसित बाघ शावक का भ्रूण मिला।
वर्ष 2020: 11 अगस्त दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे चरी के खेत में एक बाघिन का शव मिला
नहरों में भी मिल चुके है बाघों के शव
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे खेत में मिले बाघिन के शव से पहले भी जंगल से होकर निकली नहरों और नदियों में बाघ-बाघिन और तेंदुओं के शव मिलते रहे हैं। इन घटनाओं की जांच में अधिकतर मामले शिकार के ही सामने आए हैं।
वन्यजीव विशेषक्ष डॉ वीपी सिंह के अनुसार जंगल से सटे खेतों में बाघ और तेंदुओं का शिकार करने के लिए शिकारी कई तरीके इस्तेमाल करते हैं। इसमें जहर देकर हत्या करना सबसे आसान तरीका है। इसके अलावा कुड़का, खाबड़ का इस्तेमाल भी किया जाता है लेकिन गले में प्लास्टिक की रस्सी का फंदा डालकर हत्या करने का यह पहला मामला है।

नहर में उतराते मिले बाघों के शव
वर्ष 2013: दुधवा के किशनपुर अभयारण्य से होकर निकली खीरी ब्रांच बड़ी नहर में फरधान के पास बाघ का शव उतराता मिला
वर्ष 2014: शारदा नहर में सात वर्षीय बाघ का शव उतराता मिला
वर्ष 2017: डीटीआर के कतर्निया घाट डिवीजन में नहर के अंदर जुलाई में बाघ का शव उतराता मिला।
वर्ष 2018: भारत-नेपाल सीमा से सटे संपूर्णानगर रेंज के सुतिया नाले में सड़ा-गला तेंदुए का शव मिला
वर्ष 2018: किशनपुर सेंक्चुरी की चलतुआ बीट में गुस्साई ग्रामीणों की भीड़ ने हमला बोलकर बाघिन की पीट-पीट कर हत्या की।
मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे चरी के खेत में बाघिन के गले में पड़े फंदे से शिकार की आशंका जताई जा रही है। मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन
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