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ट्रेनें बंद होने से दूर हो गया लखीमपुर, बरेली, लखनऊ

Sat, 15 Oct 2016 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज।
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज। Updated Sat, 15 Oct 2016 11:55 PM IST
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Trains from being turned off Lakhimpur, Bareilly, Lucknow
रेल - फोटो : अमर उजाला
- सैकड़ों लोगों के सामने रोजी-रोजगार का संकट
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मीटर गेज ट्रेनों के बंद होने से जैसे गोला, लखीमपुर, बरेली और लखनऊ की दूरी बढ़ गई हो। सस्ता सफर अब सपना बन गया। टुकड़ों-टुकड़ों में यहां के लोगों को मंहगे दामों पर सफर करना मजबूरी बन गया है।
एक तो गोला, मैलानी, लखीमपुर, बरेली और लखनऊ को जोड़ने के लिए अभी तक न कोई रोडवेज बसें है न कोई समुचित साधन। कुछ प्राइवेट बसें जरूर चलती हैं, लेकिन उनका किराया आम यात्रियों को वहन कर पाना मुश्किल पड़ रहा है। इलाके के सैकड़ों लोग प्रतिदिन गोला, लखीमपुर और महीने में तकरीबन 15 दिन बरेली और लखनऊ रोजी रोजगार के लिए जाते हैं। इसके अलावा सैकड़ों विद्यार्थी भी प्रतिदिन पढ़ाई के लिए आते-जाते है। अभी तक वह ट्रेनों में एमएसटी बनवाकर वे आसानी से सफर कर लिया करते थे, लेकिन अब ट्रेनों के बंद होने के बाद सड़क मार्ग से मंहगा किराया खर्च कर उन्हें रोजी-रोजगार के लिए शहरों में जाना पड़ रहा है। जिससे उनके पूरे दिन की कमाई किराए में ही खर्च हो रही है। इससे लोग परेशान हैं।
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 ब्राडगेज ट्रेनें शुरू होने में अभी एक साल से अधिक का समय लग सकता है। ऐसे में बहुतों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। बहुत से लोग लखीमपुर और लखनऊ के काम छोड़कर बांकेगंज कस्बा और गोला में ही काम तलाशने में जुट गए हैं।
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ये था मीटर गेज ट्रेनों का किराया.....
पैसेंजर ट्रेन... बांकेगंज से गोला और लखीमपुर 10 रुपया, लखनऊ 40 रुपया, बरेली 35 रुपया, मैलानी 10 रुपया।
एक्सप्रेस ट्रेन... बांकेगंज से गोला और लखीमुपर 30 रुपया, लखनऊ और बरेली 70 रुपया, मैलानी 30 रुपया।

बांकेगंज से प्राइवेट बसों का किराया..... बांकेगंज से गोला 10 रुपया, बांकेगंज से लखनऊ 150 रुपया, लखीमपुर- 40 रुपया, बांकेगंज से दिल्ली 375, बरेली 175 रुपया।

क्या कहते हैं मजदूरी पेशा लोग...
कस्बा निवासी गबन का कहना है कि बांकेगंज से वह 185 रुपये की एमएसटी बनवाकर प्रतिदिन दिहाड़ी मजदूरी के लिए ट्रेनों से लखीमपुर आते-जाते थे। ट्रेनें बंद होने के बाद सड़क मार्ग से मंहगा किराया खर्च करना पड़ेगा। जिससे अब लखीमपुर बहुत दूर हो गया है।
कोठीपुर गांव निवासी गुड्डू का कहना है कि वह बांकेगंज से एमएसटी बनवाकर गोला और लखीमपुर प्रतिदिन पल्लेदारी करने आता जाता था। जिसके लिए एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में एक दिन की दिहाड़ी से पूरे महीने ट्रेन से आते-जाते थे। ट्रेनें बंद होने से उसके सामने रोजी रोजगार का संकट पैदा हो गया।
बांकेपुर गांव निवासी पटरी दुकानदार शिव पूजन का कहना है कि गांव में परचून दुकान में दैनिक उपयोग वस्तुओं की खरीदारी के लिए वह महीने में 15 दिन ट्रेन की एमएसटी बनवाकर लखीमपुर और गोला आता-जात था। ट्रेनें बंद होने पर उसे सड़क मार्ग से मंहगा किराया खर्च करना पड़ता है। 

दिहाड़ी मजदूर आदेश कुमार का कहना है ब्राडगेज अमान परिवर्तन के लिए मेगा ब्लाक के बाद मीटर गेज ट्रेनें बंद होने से सैकड़ों दिहाड़ी मजदूर पेशा लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। जहां प्रतिदिन ट्रेनों में सस्ता किराया खर्च कर लखनऊ तक मजदूरी के लिए जाते थे, वहीं सड़क मार्ग से मजदूरी करने जाना अब सपना हो गया है।
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