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यातायात नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, एक घर से उठीं चार अर्थियां

Sun, 03 Jul 2022 11:29 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 11:29 PM IST
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Traffic rules were ignored, four meanings rose from one house
घरवालों को मदद का दिलासा देतीं एसडीएम श्रद्धा सिंह।
एक बाइक पर सवार थे चारों, नहीं रोक सके लोग अपनी आंख के आंसू
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देर शाम गांव पहुंचे शवों का पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
महेवागंज। यातायात नियमों की अनदेखी और एक ही बाइक पर चार-चार लोगों के सवार होकर यात्रा करने की जरा सी लापरवाही ने एक ही परिवार के चार सदस्यों की जान ले ली। एक घर से चार-चार अर्थियां उठने से पल भर में परिवार समेत गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। उधर, पुलिस ने बस चालक को हिरासत में तो ले लिया, लेकिन उसका नाम बताने से कतराती रही। हादसे के बाद से लोगों में काफी गुस्सा है।
कोतवाली सदर के गांव धौरहरा खंबारखेड़ा निवासी बुजुर्ग श्रीराम के परिवार पर रविवार की सुबह दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटा, बहू, पत्नी और पोती समेत चार लोगों की सड़क हादसे जान चली गई। हंसता खेलता परिवार एक झटके में बिखर गया। परिवार के मुखिया बुजुर्ग श्रीराम और मृतक सरवन की पत्नी ज्योति का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन के करून क्रंदन से गांव की गलियां भी सिहर उठ रही हैं।
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मृतक सरवन के बड़े भाई रमाकांत ने बताया कि वह दो भाई थे। सरवन छोटा था। दोनों भाई मिलकर खेती-किसानी कर जीविका चलाते थे। हादसे की खबर उन्हें सुबह करीब साढ़े आठ बजे मिली तो परिवार में चीख पुकार मच गई। घर पर मौजूद ज्योति पत्नी सरवन और पुत्री लकी की मौत की खबर सुनकर गश खाकर गिर पड़ी। उधर, चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग घर पर आ गए। घटना के बारे में सुनकर सभी अवाक रह गए। गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। आसपास के लोग और महिलाएं बिलख रहे परिवार वालों को ढांढस बंधा रहे थे।
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ओवरटेक बनी हादसे की वजह
महेवागंज। हादसे के बाद सड़क किनारे लगे जिस सूखे पेड़ की वजह से यह हादसा होना बताया जा रहा था वह पेड़ कुछ ही देर में काट कर हटा दिया गया। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो ट्रक से ओवरटेक के चक्कर में हादसा हुआ। हालांकि मानक से ज्यादा सवारियां, फिटनेस की अनदेखी और गति पर लगाम न होना व अनट्रेंड चालकों के हाथों स्टेयरिंग होना कोई नई बात नहीं। पुलिस और परिवहन विभाग हादसे के बाद बगले झांकते नजर आते है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिस ने बस और उसके चालक को बस अड्डे से हिरासत में ले लिया था। इसके बावजूद बस चालक का नाम बताने से पुलिस कतराती दिखी।

सड़क हादसे में चार की मौत से बिखर गया परिवार
महेवागंज। शनिवार शाम घर से बहन की बीमार सास को देखने मां व भाभी के साथ निकले सरवन को क्या पता था कि अब वह दुबारा कभी लौटकर घर नही पहुंच पाएगा। रविवार की सुबह करीब आठ बजे बहन की ससुराल फूलबेहड़ के पकरिया गांव से एक बाइक पर चार लोग सवार होकर अपने घर आ रहे थे। घर से करीब एक किलोमीटर पहले ही बस की चपेट में आने से चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
श्रीराम के दो पुत्र रमा कांत व सरवन थे। दोनों की शादी भी हो चुकी थी। पिता के बुजुर्ग होने से सरवन किसानी करता था तो रमाकांत भैंसों को चारा देना व दूध निकालने का काम किया करते थे। श्रीराम के मुताबिक, दोनों भाइयों में खूब बनती थी। सरवन की पत्नी ज्योति मानो सुध बुध खो बैठी है। संवाद

बच्चों के सिर से उठा मां का साया
प्रज्ञा की मौत ने उसके पति रमाकांत को झकझोर कर रख दिया। वही तीनो बच्चे अमन (11), अमित (7) और एक बेटी लक्ष्मी (09) के सिर से मां की गोद छिन गई। पूरे परिवार की जिम्मेदारी रमाकांत के कंधों पर आ गई है।
जरा सी चूक जिंदगी पर पड़ भारी,

ट्रैफिक विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं
महेवागंज। सड़क हादसों में ट्रैफिक नियमों का अगर पालन सही से किया गया होता तो जान बच सकती थी। यह बात अक्सर हादसे के बाद सामने आती है। पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाता है। बाइक चला रहे सरवन ने हेलमेट नहीं लगाया था। वहीं दो सवारियों के बजाय बाइक पर चार लोगों को बैठाया। उधर, ज्यादा सवारियों और पेनाल्टी से बचने के लिए बसों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगा पा रही है। ट्रैफिक नियमो की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लखीमपुर- ढखेरवा रुट पर चलने वाली बसों से आये दिन हादसे का सबब बनती है। संवाद


घटनास्थल से पोस्टमार्टम हाउस तक रही गहमागहमी
महेवागंज। मासूम समेत सड़क पर चार शव बिखरे देख लोगों की आंखों में आंसू छलक आये। रोते-बिलखते परिवार वाले भी पहुंच गए। शवों को रोड के किनारे दूर तक पड़े देख उनके होश उड़ गए। महिलाएं और पुरुषों की चीत्कार से वहां मौजूद लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। शाम करीब चार बजे सभी शवों का पोस्टमार्टम हो सका। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचे तो शवों को देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। गांव की गलियां भी करून क्रंदन से सिहर उठी। चार मौत से गांव में कई घरों के चूल्हे तक नहीं जले। संवाद
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