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खेत बचाने के लिए ग्रामीणों ने डेढ़ किलोमीटर नहर खोद मोड़ा नदी का रुख

Tue, 15 Jun 2021 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 12:28 AM IST
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To save the farm, the villagers dug one and a half kilometer canal, turned towards the river
सुहेली नदी की धार मोड़ने के बाद नकउहा नाले में जाता पानी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

वर्षों से सुहेली नदी की सिल्ट से जलमग्न थी किसानों की कई एकड़ जमीन

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पलियाकलां। सुहेली नदी की गोद में समाई कई एकड़ जमीन वापस लाने के लिए ग्रामीणों ने अपने दम पर करीब डेढ़ किलोमीटर तक नहर खोदकर नदी का रुख मोड़ दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि सरकारों और वन विभाग की तरफ से तमाम अड़चनों से परेशान होकर उन्होंने जनप्रतिनिधियों के सहयोग सेे सुहेली नदी का रुख नकउहा नाले की ओर मोड़ दिया है, जिससे अब नदी का पानी नाले में जाने लगा है, जिससे उनकी कई एकड़ जमीन नदी के अतिक्रमण से मुक्त हो सकेगी।
सुहेली नदी साल 2010 से ही सिल्ट की वजह से अपना रूप बदलने लगी थी। असल दिक्कत 2015 में सामने आई जब पलिया-दुधवा रोड के पुल से पर्वतिया घाट तक करीब दस किलोमीटर क्षेत्र में 10 से 12 फुट ऊंची गाद जमा हो गई थी। इसके बाद नदी अपना रुख मोड़ते हुए खेतों की ओर बह चली, जिससे किसानों की कई एकड़ जमीन नदी में समा गई। किसान खेतों में पानी होने के चलते भुखमरी की कगार पर आ गए।
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ग्रामीणों ने बताया कि इसको लेकर वह 2016 में विधायक रोमी साहनी सेे मिले और मौके के हालात दिखाए। विधायक ने यह मुद्दे विधानसभा में उठाया और मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया। विधायक की लगातार कोशिशों के बाद सुहेली की डिसिल्टिंग के लिए पिछले वर्ष करीब 12 करोड़ रुपये का बजट भी पास हुआ, लेकिन वन विभाग की एनओसी नहीं मिली, जिसके चलते हालात जस के तस रहे।
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वर्षों के बाद भी हालात में कोई परिवर्तन न देख किसानों ने विधायकों से फिर बात की। इसके बाद सुहेली की धार को नकउहा नाले की ओर मोड़ने के प्रयास शुरू हुए। विधायक के सहयोग से ग्रामीणों ने अब तकरीबन डेढ़ किलोमीटर तक लंबी नहर खोदकर सुहेली नदी का रुख बदल दिया है, जिससे अब नदी का पानी खेतों को छोड़कर नकउहा नाले की ओर जाने लगा है। नदी के पानी को नाले की ओर जाता देख किसानों के चेहरे खिल उठेे हैं।

यह गांव थे प्रभावित

मकनपुर, बिलहिया, फुलवरिया, बंशीनगर, फरसहिया, अतरनगर, देवीपुर, गजरौला, चंबरबोझ समेत दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां के ग्रामीण बाढ़ और अपनी जमीन नदी में समा जाने से परेशान थे। फिलहाल इस नाले से उनको काफी राहत मिलेगी।

वन विभाग ने सुहेली नदी की सफाई के लिए एनओसी नहीं दी। अब सुहेली की धार को नकउहा नाले की ओर मुड़वा दिया गया है। यह सारी मेहनत ग्रामीणों की है, उनकी खुशी में मेरी खुशी है। - रोमी साहनी, विधायक, पलिया

एनओसी के लिए फाइल शासन में भेजे पांच साल से अधिक हो चुके हैं। एनओसी का स्थानीय स्तर से कोई लेना देना नहीं। जब भी उच्च स्तर से एनओसी प्राप्त होगी तो उसके हिसाब से कार्य किया जाएगा। - मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क

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