{"_id":"656a29a57b9d0b1bff048ae4","slug":"till-now-only-21-percent-paddy-has-been-purchased-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1002-10357-2023-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: अब तक महज 21 फीसदी हुई धान खरीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: अब तक महज 21 फीसदी हुई धान खरीद
विज्ञापन
मंडी में लगे खरीदे गए धान के बोरे
लखीमपुर खीरी। एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई थी। शासन की तरफ से मिले लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारी ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं, लेकिन 50 प्रतिशत लक्ष्य पूरा होना भी मुश्किल लग रहा है। हाल यह है कि दो महीने बाद भी महज 21 प्रतिशत की खरीद हो सकी है, जबकि लक्ष्य 2.50 लाख मीट्रिक टन है।
पांच कंपनियों के कुल 169 केंद्रों पर धान खरीद की जा रही है। दो महीने पूरे हो चुके हैं। बीच के दिनों में धान खरीद ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी थी लेकिन अब फिर से केंद्रों पर सन्नाटा दिखाई दे रहा है। मंडी में केंद्रों पर मौजूद केंद्र प्रभारियों का कहना है कि अब भी किसानों की फसल का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। कई बार आधार में नाम गलत होने, गाटा संख्या गलत होने के अलावा तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इन्हीं सब झंझटों से बचने के लिए किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर न आकर आढ़तों की ओर रुख कर रहा है। शुक्रवार को मंडी में 1950 रुपये प्रति क्विंटल धान की खरीद की जा रही थी। डिप्टी आरएमओ संतोष पटेल ने बताया कि अभी तक 21 प्रतिशत यानी करीब 50 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। खरीद बढ़ाने को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
मंडी में ही लगा है धान का स्टाक
सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान को राइस मिलों पर न भेजकर मंडी समिति में ही स्टाक किया जा रहा है। ऐसे में धान के बोरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि धान बचाने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। बीते दिनों चोरों ने मंडी के पीछे हिस्से में प्रवेश करते हुए चार बोरा धान पर हाथ साफ कर दिया था। हालांकि दीपावली की रात में भी चोरों ने धान के बोरों को चुराने का प्रयास किया, लेकिन चौकीदार ने हल्ला मचाते हुए किसी तरह धान चोरी होने से बचाया था।
बोरो को बनाया तख्त, मच्छरदानी में गुजार रहे रात
टिन शेड के नीचे स्टाक किए गए लाखों क्विंटल धान को बचाने के लिए क्रय केंद्र प्रभारियों ने खुद के चौकीदार लगाए हैं। खरीद तेजी के साथ न होने के चलते चौकीदारों की तनख्वाह भी समय से नहीं निकल पा रही है। ऐसे में चौकीदार ने धान को बचाने के लिए बोरों को तख्त बना लिया है। साथ ही मच्छरदानी में रात गुजारनी पड़ रही है। मौजूदा समय में पड़ रही ठंड से भी बचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल सब जानते हुए भी विभागीय अधिकारी आंखें मूंदें हैं।
लक्ष्य पूरा करने में किया जाता है खेल
शासन स्तर से मिले लक्ष्य के बाद उसे पूरा करने में खेल किया जाता है। विभागीय अधिकारी सही आंकड़े देने से भी बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अधिकारी राइस मिलाें के मालिकों से सांठगांठ करते हुए सरकारी रेट पर धान खरीदकर लक्ष्य पूरा कर लेंगे। वहीं राइस मिलर्स को मोटा मुनाफा भी कराते हैं।
विज्ञापन
पांच कंपनियों के कुल 169 केंद्रों पर धान खरीद की जा रही है। दो महीने पूरे हो चुके हैं। बीच के दिनों में धान खरीद ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी थी लेकिन अब फिर से केंद्रों पर सन्नाटा दिखाई दे रहा है। मंडी में केंद्रों पर मौजूद केंद्र प्रभारियों का कहना है कि अब भी किसानों की फसल का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। कई बार आधार में नाम गलत होने, गाटा संख्या गलत होने के अलावा तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इन्हीं सब झंझटों से बचने के लिए किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर न आकर आढ़तों की ओर रुख कर रहा है। शुक्रवार को मंडी में 1950 रुपये प्रति क्विंटल धान की खरीद की जा रही थी। डिप्टी आरएमओ संतोष पटेल ने बताया कि अभी तक 21 प्रतिशत यानी करीब 50 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। खरीद बढ़ाने को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
मंडी में ही लगा है धान का स्टाक
सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान को राइस मिलों पर न भेजकर मंडी समिति में ही स्टाक किया जा रहा है। ऐसे में धान के बोरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि धान बचाने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। बीते दिनों चोरों ने मंडी के पीछे हिस्से में प्रवेश करते हुए चार बोरा धान पर हाथ साफ कर दिया था। हालांकि दीपावली की रात में भी चोरों ने धान के बोरों को चुराने का प्रयास किया, लेकिन चौकीदार ने हल्ला मचाते हुए किसी तरह धान चोरी होने से बचाया था।
बोरो को बनाया तख्त, मच्छरदानी में गुजार रहे रात
टिन शेड के नीचे स्टाक किए गए लाखों क्विंटल धान को बचाने के लिए क्रय केंद्र प्रभारियों ने खुद के चौकीदार लगाए हैं। खरीद तेजी के साथ न होने के चलते चौकीदारों की तनख्वाह भी समय से नहीं निकल पा रही है। ऐसे में चौकीदार ने धान को बचाने के लिए बोरों को तख्त बना लिया है। साथ ही मच्छरदानी में रात गुजारनी पड़ रही है। मौजूदा समय में पड़ रही ठंड से भी बचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल सब जानते हुए भी विभागीय अधिकारी आंखें मूंदें हैं।
लक्ष्य पूरा करने में किया जाता है खेल
शासन स्तर से मिले लक्ष्य के बाद उसे पूरा करने में खेल किया जाता है। विभागीय अधिकारी सही आंकड़े देने से भी बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अधिकारी राइस मिलाें के मालिकों से सांठगांठ करते हुए सरकारी रेट पर धान खरीदकर लक्ष्य पूरा कर लेंगे। वहीं राइस मिलर्स को मोटा मुनाफा भी कराते हैं।