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Lakhimpur Kheri News: गर्मी में प्यास से तड़प कर जा रही बाघ-तेंदुओं की जान
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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में 40 दिन के अंदर ताबड़तोड़ चार बाघों और एक तेंदुए की मौत से वन विभाग में तहलका मचा हुआ है। मारे गए बाघों में से दो बाघों और एक तेंदुए की मौत आपसी संघर्ष में होना बताया गया। इन बाघ और तेंदुओं की मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में इनके पेट खाली पाए गए। यहां तक कि इनकी आंतों में पानी भी नहीं मिली। इससे इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि डिहाइड्रेशन से हुई।
दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन यह दावा करता रहा है कि दुधवा में बाघ और तेंदुओं के लिए भोजन और पानी की कमी नहीं है। इसके बावजूद पोस्टमार्टम में इनके पेट खाली मिलने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व को सफाई देते नहीं बन रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भी तेंदुए की मौत भूख और प्यास से हुई है। जबकि वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जो बाघ और तेंदुए हाल में मरे हैं वे या तो बीमार थे या घायल। ऐसी दशा में न वे शिकार कर पाए और न ही पानी तक पहुंच सके, इसके चलते उनकी मौत हुई है।
एनटीसीए की टीम अब बाघ और तेंदुओं की मौत के कारणों की जांच करते समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ साथ दुधवा की पारिस्थितिकी और भोजन, पानी की उपलब्धता की भी व्यापक स्तर पर जांच करेगी।
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वजन के हिसाब से बाघ-तेंदुए की होती है पानी की खुराक
दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दया शंकर बताते हैं कि बाघ और तेंदुओं के पानी की खुराक उनके वजन के हिसाब से होती है। एक बाघ का वजन 90 किलो से लेकर तीन क्विंटल तक हो सकता है। सर्दियों के मौसम में बाघ एक दिन में 10 से 15 लीटर और गर्मियों के मौसम में 20 से 25 लीटर पानी पीता है। किसी तरह घायल होने या बीमार होने की स्थिति में शिकार न कर पाना और पानी के स्त्रोत तक न पहुंच पाना स्वाभाविक है। हाल में भीषण गर्मी के दौरान हुई बाघों और तेंदुओं की मौत के कारणों में डिहाइड्रेशन पहलू पर भी जांच हो सकती है।
बाहरी जानवरों के संक्रमण से तो नहीं बीमार हो रहे बाघ और तेंदुए
जंगल से बाहर निकलने पर बाघ और तेंदुए छुट्टा और पालतू जानवरों के संपर्क में आ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ इस बात को लेकर भी आशंकित हैं कि कहीं बाघ और तेंदुए छ़ुट्टा और पालतू जानवरों के संपर्क में आने से संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि बाघ और तेंदुए कुत्तों का भी शिकार कर लेते हैं। बताते हैं कि एक बार नेपाल के बाघों में कुत्तों से ऐसी बीमारी फैली कि नेपाल में कई बाघों की मौत हो गई थी। वन्यजीव विशेषज्ञ अब इस बात की भी जांच कराने की मांग कर रहे हैं कि कहीं बाघ तेंदुओं में कोई ऐसी बीमारी तो नहीं फैल रही।
दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ तेंदुए के लिए न भोजन की कमी है न पानी की। मरे हुए बाघों के पेट में भोजन पानी के न मिलने के पीछे उनकी कोई बीमारी या घायल होना हो सकता है। फिलहाल विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी बाघ की मौतों पर गहराई से जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो सकेगा।
- डॉ. रंगाराजू टी., उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन यह दावा करता रहा है कि दुधवा में बाघ और तेंदुओं के लिए भोजन और पानी की कमी नहीं है। इसके बावजूद पोस्टमार्टम में इनके पेट खाली मिलने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व को सफाई देते नहीं बन रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भी तेंदुए की मौत भूख और प्यास से हुई है। जबकि वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जो बाघ और तेंदुए हाल में मरे हैं वे या तो बीमार थे या घायल। ऐसी दशा में न वे शिकार कर पाए और न ही पानी तक पहुंच सके, इसके चलते उनकी मौत हुई है।
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एनटीसीए की टीम अब बाघ और तेंदुओं की मौत के कारणों की जांच करते समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ साथ दुधवा की पारिस्थितिकी और भोजन, पानी की उपलब्धता की भी व्यापक स्तर पर जांच करेगी।
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वजन के हिसाब से बाघ-तेंदुए की होती है पानी की खुराक
दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दया शंकर बताते हैं कि बाघ और तेंदुओं के पानी की खुराक उनके वजन के हिसाब से होती है। एक बाघ का वजन 90 किलो से लेकर तीन क्विंटल तक हो सकता है। सर्दियों के मौसम में बाघ एक दिन में 10 से 15 लीटर और गर्मियों के मौसम में 20 से 25 लीटर पानी पीता है। किसी तरह घायल होने या बीमार होने की स्थिति में शिकार न कर पाना और पानी के स्त्रोत तक न पहुंच पाना स्वाभाविक है। हाल में भीषण गर्मी के दौरान हुई बाघों और तेंदुओं की मौत के कारणों में डिहाइड्रेशन पहलू पर भी जांच हो सकती है।
बाहरी जानवरों के संक्रमण से तो नहीं बीमार हो रहे बाघ और तेंदुए
जंगल से बाहर निकलने पर बाघ और तेंदुए छुट्टा और पालतू जानवरों के संपर्क में आ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ इस बात को लेकर भी आशंकित हैं कि कहीं बाघ और तेंदुए छ़ुट्टा और पालतू जानवरों के संपर्क में आने से संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि बाघ और तेंदुए कुत्तों का भी शिकार कर लेते हैं। बताते हैं कि एक बार नेपाल के बाघों में कुत्तों से ऐसी बीमारी फैली कि नेपाल में कई बाघों की मौत हो गई थी। वन्यजीव विशेषज्ञ अब इस बात की भी जांच कराने की मांग कर रहे हैं कि कहीं बाघ तेंदुओं में कोई ऐसी बीमारी तो नहीं फैल रही।
दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ तेंदुए के लिए न भोजन की कमी है न पानी की। मरे हुए बाघों के पेट में भोजन पानी के न मिलने के पीछे उनकी कोई बीमारी या घायल होना हो सकता है। फिलहाल विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी बाघ की मौतों पर गहराई से जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो सकेगा।
- डॉ. रंगाराजू टी., उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व