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तराई के सुरक्षित जंगलों में भी महफूज नहीं बाघ

Wed, 27 Jan 2021 11:44 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jan 2021 11:44 PM IST
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Tiger is not safe even in the safe forests of Terai
बांकेगंज। बाघों का प्राकृतिक आवास माने जाने वाले तराई के जंगलों में भी बाघ अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। आए दिन हो रही बाघों की अस्वाभाविक मौत और शिकार की घटनाओं को लेकर वन विभाग सकते में है।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला रेंज की सिकंदरपुर बीट में एक मादा बाघ शावक की मौत से बाघों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि शावक का शिकार कर शव खेत में फेंका गया है। इससे पहले भी दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास चरी के खेत में एक बाघिन का शव मिला था, जिसके गले में नायलॉन की रस्सी का फंदा कसा था। दम घुटने से इस बाघिन की मौत हुई थी। इस बाघिन की धारियों के मिलान से इस बात का खुलासा हुआ था कि मृत मिली बाघिन दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल की थी ही नहीं। इससे यह प्रतीत होता है कि बाघिन के शव को भी कहीं दूसरी जगह से लाकर यहां डाला गया था।
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करीब डेढ़ माह पहले दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में दो शिकारी पकड़े गए थे, जिनके पास से शिकार के उपकरण बरामद हुए थे। बाद में जब जंगल में लगे कैमरों की तस्वीर खंगाली गईं तो उनमें से एक कैमरे में ऐसी तस्वीर मिली जिसे देखकर वन विभाग के होश उड़ गए। इस तस्वीर में एक बाघ की गर्दन में नायलॉन रस्सी का फंदा पड़ा था। यह बाघ अब भी फंदा लटकाए जंगल में घूम रहा है। इस बाघ को बेहोश करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कामयाबी नहीं मिली है।
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करीब डेढ़ साल पहले दक्षिण खीरी वन प्रभाग के ही गोला रेंज बिझौली गांव के पास निकली बड़ी नहर में एक बाघिन का शव उतराता मिला था। इसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आर्गेनोफॉस्फेट नामक जहर से मौत होने की पुष्टि हुई थी। इससे पहले भी नहरों में उतराते हुए कई बार बाघों के शव मिल चुके हैं।

गोला रेंज की सिकंदरपुर बीट जंगल से तीन किलोमीटर दूर गन्ने के खेत में मिले मादा बाघ शावक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तौर पर कुछ कहा जा सकता है। अभी शिकार का कयास लगाना गलत होगा। बाघों की सुरक्षा के प्रति वन विभाग पूरी तरह संवेदनशील है।
- समीर कुमार, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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