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Lakhimpur Kheri News: मूड़ा अस्सी और जवाहर गांव के बीच गन्ने में छिपा है बाघ
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गन्ने के आसपास कांबिंग करती रेस्क्यू टीम। संवाद
ममरी। वन विभाग की टीम को रविवार रात क्षेत्र में चहलकदमी कर रहे बाघ की लोकेशन मूड़ा अस्सी और मूड़ा जवाहर गांव के बीच गन्ने के खेत में मिली है। टीम ने खेत के आसपास घेराबंदी कर दी है। बाघ को बेहोश करने के लिए एक अस्थायी मचान बनाया गया है। साथ ही दोनों गांवों के बीच पिंजरे भी लगाए गए हैं।
डिप्टी रेंजर राम नरेश वर्मा ने बताया कि शनिवार रात बाघ की लोकेशन काजरकोरी गांव के पास मिली थी। बाघ अब मूड़ा अस्सी और मूड़ा जवाहर गांव के बीच आ गया है। कैमरों की फुटेज का निरीक्षण डब्लूडब्लूएफ की विशेषज्ञ टीम कर रही है। इसकी जानकारी गोपनीय रखी जा रही है। रेंजर नरेशपाल सिंह ने बताया कि वनकर्मियों और डॉक्टरों की टीम बाघ को रेस्क्यू करने की कोशिश में लगी हुई है। जहां बाघ की लोकेशन मिल रही है, टीम ने उस स्थान की घेराबंदी कर ली है। ग्रामीणों ने भी बाघ के मूड़ा अस्सी और मूड़ा जवाहर के बीच मौजूद होने की पुष्टि की है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय विश्वाल ने बताया कि गन्ने के खेतों में हलचल कर रहा बाघ सतर्क होकर बार-बार स्थान बदल रहा है। इस वजह से बाघ को मचान से बेहोश करने का प्रयास किया जा रहा है। पशुचिकित्सक डॉ. दया और डाॅ. नितेश कुमार कटियार वनकर्मियों के साथ क्षेत्र को आइसोलेट कर बाघ को बेहोश कर पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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डिप्टी रेंजर राम नरेश वर्मा ने बताया कि शनिवार रात बाघ की लोकेशन काजरकोरी गांव के पास मिली थी। बाघ अब मूड़ा अस्सी और मूड़ा जवाहर गांव के बीच आ गया है। कैमरों की फुटेज का निरीक्षण डब्लूडब्लूएफ की विशेषज्ञ टीम कर रही है। इसकी जानकारी गोपनीय रखी जा रही है। रेंजर नरेशपाल सिंह ने बताया कि वनकर्मियों और डॉक्टरों की टीम बाघ को रेस्क्यू करने की कोशिश में लगी हुई है। जहां बाघ की लोकेशन मिल रही है, टीम ने उस स्थान की घेराबंदी कर ली है। ग्रामीणों ने भी बाघ के मूड़ा अस्सी और मूड़ा जवाहर के बीच मौजूद होने की पुष्टि की है।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय विश्वाल ने बताया कि गन्ने के खेतों में हलचल कर रहा बाघ सतर्क होकर बार-बार स्थान बदल रहा है। इस वजह से बाघ को मचान से बेहोश करने का प्रयास किया जा रहा है। पशुचिकित्सक डॉ. दया और डाॅ. नितेश कुमार कटियार वनकर्मियों के साथ क्षेत्र को आइसोलेट कर बाघ को बेहोश कर पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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गन्ने के आसपास कांबिंग करती रेस्क्यू टीम। संवाद