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खीरी: मवेशी चराने खेत पर गए युवक को बाघ ने मार डाला
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निघासन (लखीमपुर खीरी) में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद भड़के ग्रामीणों को समझाते सपा नेता और
- फोटो : LAKHIMPUR
निघासन (लखीमपुर खीरी)। साथियों के साथ मवेशियों को चराने गए युवक की बाघ के हमले में मौत हो गई। साथियों के शोर मचाने पर बाघ अधखाया शव छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। बाद में मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम और ग्रामीणों में नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए खेत में ही प्रदर्शन शुरू कर दिया और डीएफओ को मौके पर बुलाने पर अड़ गए। तिकुनियां थाने के प्रभारी निरीक्षक ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते रहे। बाद में प्रधान जसवंत मौके पर पहुंचे और उन्होंने किसानों को समझाया, जिस पर वे माने और उन्होंने शव पोस्टमार्टम के लिए वन विभाग के अफसरों को सौंप दिया।
शनिवार को गांव मंझरा पूरब निवासी स्व. बदलू का बेटा अवधेश यादव (30) गांव के ही झब्बू, महावीर सहित पांच लोगों के साथ मवेशी चराने के लिए गया था। अवधेश जंगल किनारे अपने खेत में कटे धान को देखने के लिए मवेशी चराते हुए पहुंच गया। दोपहर करीब एक बजे अवधेश की दो भैंसें सरयू नदी के गाय घाट पर पानी पीने के लिए चलीं र्गइं। कुछ देर तक जब भैंसें वापस नहीं आईं तो अवधेश उनके पीछे चला गया। वह भैंसों को हांककर आ रहा था कि इसी बीच झाड़ी में छुपे बाघ ने उस पर हमला कर दिया। बाघ अवधेश को घसीटता हुआ जंगल की ओर चला गया। बाघ को जाता हुआ देखकर अन्य ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए धान के पुआल को आग लगा दी। शोर सुनकर बाघ शव को छोड़कर जंगल में चला गया। सूचना पर तिकुनियां थाने के प्रभारी निरीक्षक हनुमान प्रसाद पहुंचे। गुस्साए ग्रामीणों ने उनकी एक नहीं सुनी और डीएफओ को बुलाने की मांग पर अड़े। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए देने से इनकार कर दिया। इस बीच बेलरायां रेंजर दिनेश बडोला भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की पर वे नहीं माने। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले भी इसी जगह बाघ ने प्यारे लाल को मौत के घाट उतारा था। इस घटना के बाद भी बाघ को पकड़ने की कोशिश नहीं की गई। ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और डीएफओ के मौके पर आने पर ही शव सौंपने की बात कही। बाद में जानकारी पर प्रधान जसवंत पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों को समझाया। जिस पर वे लोग मान गए और उन्होंने शव पोस्टमार्टम के लिए सौंप दिया।
18 दिन में बाघ के हमले में तीन ग्रामीणों की मौत से दहशत
निघासन। दुधवा टाइगर रिजर्व जोन के जंगल से सटे इस तहसील क्षेत्र में बाघ के हमले में युवक की मौत से दहशत है। 18 दिनों में बाघ के हमले में तीन मौतें हो चुकी हैं तो धौरहरा और निघासन में नौ माह में छह लोगों को बाघ मौत के घाट उतार चुका है। कई घटनाएं होने के बाद भी वन विभाग इसे लेकर लापरवाही बरत रहा है। जिससे ग्रामीणों में लगातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
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निघासन के बेलरायां रेंज में बाघ के हमले का यह पहला मामला नहीं है। छह अक्तूबर को दलराजपुर निवासी ज्ञान सिंह (60) को बाघ ने उस समय मार डाला, जब वह खेत देखने के लिए गए थे। उनका अधखाया शव बरामद हुआ था। इसके बाद नौ अक्तूबर को मवेशी चराने गए मझरा पूरब निवासी प्यारे लाल (66) का अधखाया शव जंगल से बरामद हुआ था। इन घटनाओं को लोग भूल भी नहीं पाए थे कि बाघ ने इसी गांव के अवधेश यादव (30) को मौत के घाट उतार दिया। इन घटनाओं को लेकर लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। उनका कहना है कि एक तरफ बाघ के लगातार हमले जारी हैं तो दूसरी और वन विभाग कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं कर रहा।
लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी नहीं चेता वन विभाग
दुधवा टाइगर रिजर्व जोन के जंगल से सटे गांवों में बाघ, तेंदुआ और हाथी का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। लगातार हो रहे हमले से लोगों की जिंदगी खतरे में है। बाघ और तेंदुए के हमले से मौत के अलावा कई लोग घायल भी हो चुके हैं। वन विभाग जब किसी ग्रामीण की मौत होती है तो खानापूरी के लिए सक्रिय होता है, उसके बाद फिर कोई ध्यान नहीं देता।
जानवरों को रास नहीं आ रहा जंगल किनारे इंसानी दखल
जंगल किनारे इंसानी दखल जानवरों को रास नहीं आ रहा है। जंगल किनारे बने नदी के घाटों पर जंगली जानवर पानी पीने के लिए आते है। मंझरा में एक मौत के बाद उसी जंगल के किनारे बने गाय घाट को डेंजर जोन घोषित किया गया था। बावजूद इसके वहां ग्रामीणों का आनाजाना जारी रहा।
भाइयों में सबसे छोटा था अवधेश
रामगोपाल ने बताया कि उसके पिता बदलू और मां राजरानी की मौत करीब सात साल पहले हो गई थी। रामगुलाम, रामकुमार और उसके बाद अवधेश सबसे छोटा था और सबका प्रिय था। उसकी दिसंबर में शादी होने वाली थी।
गाय घाट पर दूसरी घटना से दहशत
नौ अक्तूबर को गाय घाट पर मवेशी चराने गए प्यारे लाल को भी बाघ ने हमला कर मार डाला था। उसका अधखाया शव जंगल से बरामद हुआ था। अब अवधेश को भी इसी घाट पर बाघ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया।
बाघ और तेंदुए के हमले में इन लोगों की गईं जान
- 26 मार्च 2020 को धौरहरा के डुडकी पुरवा में तेेंदुए के हमले से (10) बालिका रोशनी की मौत।
- 14 सितंबर 2020 को धौरहरा के चकदहा के चमारनपुरवा निवासी (12) ब्रजेश को तेंदुए ने हमला कर मार डाला था।
- 27 सितंबर 2020 को धौरहरा के बेलागढ़ी के साहबदीन पुरवा निवासी (13) वर्षीय चंदन पर तेंदुए ने हमला किया, जिससे उनका मौत हो गई।
-06 अक्तूबर 2020 को निघासन के गांव दलराजपुर निवासी ज्ञान सिंह (60) की बाघ के हमले में मौत हो गई।
- 09 अक्तूबर 2020 को निघासन के गांव मंझरा पूरब निवासी प्यारे लाल (66) को बाघ ने हमला कर मार डाला।
-24 अक्तूबर 2020 को निघासन के गांव मंझरा पूरब निवासी अवधेश यादव (30) की बाघ के हमले में मौत।
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ये हुए जख्मी
-30 अप्रैल 2020 को धौरहरा के गांव बंशीबेली निवासी अजय (12) बाघ के हमले में घायल
- 07 जनवरी 2020 को धौरहरा के गांव गिरदा निवासी बालकराम (15), दूबर (60) बाघ के हमले में घायल।
- 17 सितंबर 2020 बफर जोन भीरा रेंज के गांव छैरासी बीट में बाइक सवारों पर बाघ का हमला, तीन घायल
गाय घाट पर जाने के लिए ग्रामीणों को पहले से ही मना किया गया था। बाघ के हमले से अवधेश की मौत का दुख है। वन विभाग बाघ को पकड़ने के लिए अभियान चलाएगा।
-दिनेश कुमार बडोला, बेलरायां रेंजर
जंगल से सटे गांव के लोगों को पहले से ही जंगली जानवरों के होने के बारे में अवगत करा दिया गया था। तिकुनियां में लोगों को सतर्क करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया गया था। इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं। उनसे आग्रह है कि जंगल न जाएं।
- अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफर जोन
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शनिवार को गांव मंझरा पूरब निवासी स्व. बदलू का बेटा अवधेश यादव (30) गांव के ही झब्बू, महावीर सहित पांच लोगों के साथ मवेशी चराने के लिए गया था। अवधेश जंगल किनारे अपने खेत में कटे धान को देखने के लिए मवेशी चराते हुए पहुंच गया। दोपहर करीब एक बजे अवधेश की दो भैंसें सरयू नदी के गाय घाट पर पानी पीने के लिए चलीं र्गइं। कुछ देर तक जब भैंसें वापस नहीं आईं तो अवधेश उनके पीछे चला गया। वह भैंसों को हांककर आ रहा था कि इसी बीच झाड़ी में छुपे बाघ ने उस पर हमला कर दिया। बाघ अवधेश को घसीटता हुआ जंगल की ओर चला गया। बाघ को जाता हुआ देखकर अन्य ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए धान के पुआल को आग लगा दी। शोर सुनकर बाघ शव को छोड़कर जंगल में चला गया। सूचना पर तिकुनियां थाने के प्रभारी निरीक्षक हनुमान प्रसाद पहुंचे। गुस्साए ग्रामीणों ने उनकी एक नहीं सुनी और डीएफओ को बुलाने की मांग पर अड़े। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए देने से इनकार कर दिया। इस बीच बेलरायां रेंजर दिनेश बडोला भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की पर वे नहीं माने। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले भी इसी जगह बाघ ने प्यारे लाल को मौत के घाट उतारा था। इस घटना के बाद भी बाघ को पकड़ने की कोशिश नहीं की गई। ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और डीएफओ के मौके पर आने पर ही शव सौंपने की बात कही। बाद में जानकारी पर प्रधान जसवंत पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों को समझाया। जिस पर वे लोग मान गए और उन्होंने शव पोस्टमार्टम के लिए सौंप दिया।
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18 दिन में बाघ के हमले में तीन ग्रामीणों की मौत से दहशत
निघासन। दुधवा टाइगर रिजर्व जोन के जंगल से सटे इस तहसील क्षेत्र में बाघ के हमले में युवक की मौत से दहशत है। 18 दिनों में बाघ के हमले में तीन मौतें हो चुकी हैं तो धौरहरा और निघासन में नौ माह में छह लोगों को बाघ मौत के घाट उतार चुका है। कई घटनाएं होने के बाद भी वन विभाग इसे लेकर लापरवाही बरत रहा है। जिससे ग्रामीणों में लगातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
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निघासन के बेलरायां रेंज में बाघ के हमले का यह पहला मामला नहीं है। छह अक्तूबर को दलराजपुर निवासी ज्ञान सिंह (60) को बाघ ने उस समय मार डाला, जब वह खेत देखने के लिए गए थे। उनका अधखाया शव बरामद हुआ था। इसके बाद नौ अक्तूबर को मवेशी चराने गए मझरा पूरब निवासी प्यारे लाल (66) का अधखाया शव जंगल से बरामद हुआ था। इन घटनाओं को लोग भूल भी नहीं पाए थे कि बाघ ने इसी गांव के अवधेश यादव (30) को मौत के घाट उतार दिया। इन घटनाओं को लेकर लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। उनका कहना है कि एक तरफ बाघ के लगातार हमले जारी हैं तो दूसरी और वन विभाग कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं कर रहा।
लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी नहीं चेता वन विभाग
दुधवा टाइगर रिजर्व जोन के जंगल से सटे गांवों में बाघ, तेंदुआ और हाथी का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। लगातार हो रहे हमले से लोगों की जिंदगी खतरे में है। बाघ और तेंदुए के हमले से मौत के अलावा कई लोग घायल भी हो चुके हैं। वन विभाग जब किसी ग्रामीण की मौत होती है तो खानापूरी के लिए सक्रिय होता है, उसके बाद फिर कोई ध्यान नहीं देता।
जानवरों को रास नहीं आ रहा जंगल किनारे इंसानी दखल
जंगल किनारे इंसानी दखल जानवरों को रास नहीं आ रहा है। जंगल किनारे बने नदी के घाटों पर जंगली जानवर पानी पीने के लिए आते है। मंझरा में एक मौत के बाद उसी जंगल के किनारे बने गाय घाट को डेंजर जोन घोषित किया गया था। बावजूद इसके वहां ग्रामीणों का आनाजाना जारी रहा।
भाइयों में सबसे छोटा था अवधेश
रामगोपाल ने बताया कि उसके पिता बदलू और मां राजरानी की मौत करीब सात साल पहले हो गई थी। रामगुलाम, रामकुमार और उसके बाद अवधेश सबसे छोटा था और सबका प्रिय था। उसकी दिसंबर में शादी होने वाली थी।
गाय घाट पर दूसरी घटना से दहशत
नौ अक्तूबर को गाय घाट पर मवेशी चराने गए प्यारे लाल को भी बाघ ने हमला कर मार डाला था। उसका अधखाया शव जंगल से बरामद हुआ था। अब अवधेश को भी इसी घाट पर बाघ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया।
बाघ और तेंदुए के हमले में इन लोगों की गईं जान
- 26 मार्च 2020 को धौरहरा के डुडकी पुरवा में तेेंदुए के हमले से (10) बालिका रोशनी की मौत।
- 14 सितंबर 2020 को धौरहरा के चकदहा के चमारनपुरवा निवासी (12) ब्रजेश को तेंदुए ने हमला कर मार डाला था।
- 27 सितंबर 2020 को धौरहरा के बेलागढ़ी के साहबदीन पुरवा निवासी (13) वर्षीय चंदन पर तेंदुए ने हमला किया, जिससे उनका मौत हो गई।
-06 अक्तूबर 2020 को निघासन के गांव दलराजपुर निवासी ज्ञान सिंह (60) की बाघ के हमले में मौत हो गई।
- 09 अक्तूबर 2020 को निघासन के गांव मंझरा पूरब निवासी प्यारे लाल (66) को बाघ ने हमला कर मार डाला।
-24 अक्तूबर 2020 को निघासन के गांव मंझरा पूरब निवासी अवधेश यादव (30) की बाघ के हमले में मौत।
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ये हुए जख्मी
-30 अप्रैल 2020 को धौरहरा के गांव बंशीबेली निवासी अजय (12) बाघ के हमले में घायल
- 07 जनवरी 2020 को धौरहरा के गांव गिरदा निवासी बालकराम (15), दूबर (60) बाघ के हमले में घायल।
- 17 सितंबर 2020 बफर जोन भीरा रेंज के गांव छैरासी बीट में बाइक सवारों पर बाघ का हमला, तीन घायल
गाय घाट पर जाने के लिए ग्रामीणों को पहले से ही मना किया गया था। बाघ के हमले से अवधेश की मौत का दुख है। वन विभाग बाघ को पकड़ने के लिए अभियान चलाएगा।
-दिनेश कुमार बडोला, बेलरायां रेंजर
जंगल से सटे गांव के लोगों को पहले से ही जंगली जानवरों के होने के बारे में अवगत करा दिया गया था। तिकुनियां में लोगों को सतर्क करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया गया था। इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं। उनसे आग्रह है कि जंगल न जाएं।
- अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफर जोन