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Lakhimpur Kheri News: मार्ग कटता देख हड़कंप, ग्रामीण खुद रोकने में जुटे
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शंकरपुरवा में कटान करती शारदा नदी। संवाद
महेवागंज/फूलबेहड़। शारदा नदी में हो रहे कटान से बेचनपुरवा गांव को जाने वाला इकलौता खड़ंजा मार्ग कटता देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। प्रशासन और बाढ़ खंड ने भी हाथ खड़े किए तो सोमवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर खुद ही कटान रोकने की कोशिशें शुरू कर दी।
ग्रामीणों ने कटान रोकने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। पेड़ों की डाल व बांस, बल्ली... जिसे जो मिला, लगाकर कटान रोकने के प्रयास में जुटे हैं। शारदा नदी धीरे-धीरे धोबियाना, शंकरपुरवा, पकरियापुरवा और बेचन पुरवा गांव की तरफ बढ़ रही है। चार गांवों की दो हजार से अधिक की आबादी पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।
बरसात से पहले कोई जतन न होने से धोबियाना गांव को जाने वाला मार्ग कट चुका है। कटान बढ़ता देख पीड़ितों ने अपने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया। अभी भी लोग घरों का बचाखुचा सामान सुरक्षित जगह पर पंहुचाने में जुटे हैं। मौजूदा समय में हो रहे कटान से बेचन पुरवा गांव के लोग चिंतित हैं। गांव को जाने वाला खड़ंजा सोमवार को कटने लगा तो मुन्ना, बेचन, बृजभान, गुड्डू, राजेश आदि ग्रामीण कटान स्थल पर पेड़ों की डाल व बांस, बल्ली लेकर पहुंच गए।
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ग्रामीणों को उम्मीद है, कटान रुक सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव जाने का यही एक मात्र रास्ता है। अगर यह रास्ता कट गया तो गांव से सामान निकालना मुश्किल हो जाएगा।
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ग्रामीणों ने कटान रोकने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। पेड़ों की डाल व बांस, बल्ली... जिसे जो मिला, लगाकर कटान रोकने के प्रयास में जुटे हैं। शारदा नदी धीरे-धीरे धोबियाना, शंकरपुरवा, पकरियापुरवा और बेचन पुरवा गांव की तरफ बढ़ रही है। चार गांवों की दो हजार से अधिक की आबादी पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।
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बरसात से पहले कोई जतन न होने से धोबियाना गांव को जाने वाला मार्ग कट चुका है। कटान बढ़ता देख पीड़ितों ने अपने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया। अभी भी लोग घरों का बचाखुचा सामान सुरक्षित जगह पर पंहुचाने में जुटे हैं। मौजूदा समय में हो रहे कटान से बेचन पुरवा गांव के लोग चिंतित हैं। गांव को जाने वाला खड़ंजा सोमवार को कटने लगा तो मुन्ना, बेचन, बृजभान, गुड्डू, राजेश आदि ग्रामीण कटान स्थल पर पेड़ों की डाल व बांस, बल्ली लेकर पहुंच गए।
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ग्रामीणों को उम्मीद है, कटान रुक सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव जाने का यही एक मात्र रास्ता है। अगर यह रास्ता कट गया तो गांव से सामान निकालना मुश्किल हो जाएगा।