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डीएम साहब, यहां भी बड़े कष्टों में हैं गोमाता
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लखीमपुर खीरी। धौरहरा की बबुरी नरूपुर एवं ईसानगर के महरिया स्थित गोआश्रय स्थल में गोवंश की मौतों पर जब डीएम ने नाराजगी जताई तो जिम्मेदारों ने इलाज के साथ गोवंश की देखरेख भी शुरू कर दी, लेकिन अभी भी नगर पालिका से लेकर ग्राम पंचायतों में बने स्थाई गोआश्रय स्थल में गोवंशों की हालत काफी बदत्तर है। न तो वहां पर इनके खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सूखे और हरे चारे की व्यवस्था है और न ही बारिश और धूप से बचने की। ऐसे में बेचोर गोवंश बरसात एवं मलमूत्र से उपजे कीचड़ में ही रहने को मजबूर हैं।
अस्थाई गोआश्रय स्थल का हाल है बेहाल
नगर पालिका ने लोहिया भवन के पीछे बनी पानी की टंकी के नीचे अस्थाई गोआश्रय स्थल बना रखा है। यहां रखे गए गोवंशों का हाल बेहाल है। न तो उन्हें पेट भर हरा चारा मिल पा रहा है और न हीं पीने को साफ पानी ही। छांव के लिए पानी की टंकी के साथ पीछे पड़ा टीने शेड़। जहां पर बारिश के दौरान कीचड़ हो जाता है और बेचारे गोवंश उसी में रहने को मजबूर हैं।
बरसात में भी खुले आसमान के नीचे रह रहे गोवंश
खंबारखेड़ा गांव में पालिका की स्थाई गोशाला है। इस पांच बीघा गोआश्रय स्थल में करीब 207 गोवंश हैं, लेकिन उनके लिए धूप एवं बारिश से बचने के लिए टीनशेड़ तक नहीं है। इस कारण गोवंश खुले में रहकर धूप, गर्मी और बारिश की मार झेलने को मजबूर हैं। हरे चारे के नाम पर खानापूर्ति कर गोवंश को सिर्फ सूखा भूसा ही खाने को मिल रहा है। इसे खुले हुए दो माह हुए हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं एवं देखरेख के अभाव में एक दर्जन से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है।
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गोआश्रय स्थल पर टीन शेड की कमी है। गंदगी के कारण बीमारियां फैल रही हैं। जिसके बारे में कई बार पालिका प्रशासन को सूचना दी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। संक्रमण से बचाव के लिए सभी का टीकाकरण कर दिया गया है।
डॉ.यशवंत सिंह, उप पशु चिकित्साधिकारी, पतरासी
अस्थाई एवं स्थाई गोआश्रय स्थल पर चारे पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। बीमार होने की दशा में उनका उचित इलाज भी कराया जाता है। गोवंश की सेवा में लगे कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि गोवंश को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल सूचित करें।
आरआर अंबेश, ईओ, नगर पालिका
स्कूली बच्चों के लिए खतरा बने गोवंशीय
जंगबहादुरगंज। पसगवां में लावारिस घूम रहे गोवंशीय पशु स्कूली बच्चों के लिए खतरा बन गए हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय और बा स्कूल जेबीगंज मोहम्मदी मार्ग के किनारे है और बाजार भी है। इन स्कूलों के पास गोवंशीय पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इस बावत पीडी /प्रभारी बीडीओ राम कृपाल चौधरी का कहना है समस्या का समाधान धीरे-धीरे होगा। गोवंशीय आश्रय स्थल में से नौ का निर्माण हो चुका है।
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अस्थाई गोआश्रय स्थल का हाल है बेहाल
नगर पालिका ने लोहिया भवन के पीछे बनी पानी की टंकी के नीचे अस्थाई गोआश्रय स्थल बना रखा है। यहां रखे गए गोवंशों का हाल बेहाल है। न तो उन्हें पेट भर हरा चारा मिल पा रहा है और न हीं पीने को साफ पानी ही। छांव के लिए पानी की टंकी के साथ पीछे पड़ा टीने शेड़। जहां पर बारिश के दौरान कीचड़ हो जाता है और बेचारे गोवंश उसी में रहने को मजबूर हैं।
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बरसात में भी खुले आसमान के नीचे रह रहे गोवंश
खंबारखेड़ा गांव में पालिका की स्थाई गोशाला है। इस पांच बीघा गोआश्रय स्थल में करीब 207 गोवंश हैं, लेकिन उनके लिए धूप एवं बारिश से बचने के लिए टीनशेड़ तक नहीं है। इस कारण गोवंश खुले में रहकर धूप, गर्मी और बारिश की मार झेलने को मजबूर हैं। हरे चारे के नाम पर खानापूर्ति कर गोवंश को सिर्फ सूखा भूसा ही खाने को मिल रहा है। इसे खुले हुए दो माह हुए हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं एवं देखरेख के अभाव में एक दर्जन से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है।
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गोआश्रय स्थल पर टीन शेड की कमी है। गंदगी के कारण बीमारियां फैल रही हैं। जिसके बारे में कई बार पालिका प्रशासन को सूचना दी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। संक्रमण से बचाव के लिए सभी का टीकाकरण कर दिया गया है।
डॉ.यशवंत सिंह, उप पशु चिकित्साधिकारी, पतरासी
अस्थाई एवं स्थाई गोआश्रय स्थल पर चारे पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। बीमार होने की दशा में उनका उचित इलाज भी कराया जाता है। गोवंश की सेवा में लगे कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि गोवंश को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल सूचित करें।
आरआर अंबेश, ईओ, नगर पालिका
स्कूली बच्चों के लिए खतरा बने गोवंशीय
जंगबहादुरगंज। पसगवां में लावारिस घूम रहे गोवंशीय पशु स्कूली बच्चों के लिए खतरा बन गए हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय और बा स्कूल जेबीगंज मोहम्मदी मार्ग के किनारे है और बाजार भी है। इन स्कूलों के पास गोवंशीय पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इस बावत पीडी /प्रभारी बीडीओ राम कृपाल चौधरी का कहना है समस्या का समाधान धीरे-धीरे होगा। गोवंशीय आश्रय स्थल में से नौ का निर्माण हो चुका है।