{"_id":"5752e62f4f1c1bbe53109735","slug":"then-a-patchwork-of-national-program-was-started-with-preparations","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो आधी अधूरी तैयारियों के साथ कर दी गई राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो आधी अधूरी तैयारियों के साथ कर दी गई राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:20 AM IST
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जांच में पता चला है कि दवाई को खासतौर पर नशे के लिए ही बनाया गया था।
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चौथे दिन भी सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा की सुविधा नहीं मिली
दवाएं और स्टेशनरी छोड़िए, डॉक्टरों को नहीं मिल पा रही बैठने की जगह
सभी 22 डॉक्टरों की नियुक्ति की पुष्टि नहीं
केंद्र सरकार ने कैंसर, मधुमेह, ह्दय रोग आदि की रोकथाम के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत तो पहली जून को जिले में विशेष पायलट प्रोजेक्ट के तहत कर दी, लेकिन चार दिन बाद भी जिले के मरीजों को यूनानी चिकित्सा मिलना शुरू नहीं हो सकी है। वजह है सीएचसी पर इलाज शुरू करने के लिए यूनानी चिकित्सकों को कमरा तक नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं अब तक यूनानी चिकित्सकों की टीम को दवाएं और स्टेशनरी तक नहीं मिल सकी है। इससे उद्घाटन के चौथे दिन भी जिले में यूनानी चिकित्सा शुरू नहीं हो सकी है। उधर इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के दावे हैं कि हर सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा टीम को व्यवस्थाएं मुहैय्या करा दी गई हैं और इलाज भी शुरू करा दिया गया है।
पहली जून को यूपी में खीरी से शुरू हुए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के मंत्री आए थे। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद येस्सो नाईक और यूपी सरकार के स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ एसपी यादव लखीमपुर पहुंचकर इसका उद्घाटन किया था। इससे लोगों को उम्मीद बंधी कि नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन ऑफ कैंसर, डायबिटीज एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) कार्यक्रम से इन रोगों का इलाज यूनानी चिकित्सा से बेहतर होगा। क्योंकि अब तक इन रोगों को इलाज सिर्फ एलोपैथी से हो रहा था, जो बेहद महंगा होने के बावजूद स्थाई न था। लोगों की उम्मीद के विपरीत चौथे दिन भी सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा न मिलने से लोगों में मायूसी है। आलम यह है कि जिले में सीएचसी पर पहुंचने वाले यूनानी चिकित्सकों ने अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा दी, लेकिन फिर वे गायब हो गए। बांकेगंज सीएचसी पर आने के तुरंत बाद ही टीम छुट्टी लेकर वापस चली गई तो धौरहरा पहुंची टीम किराए पर कमरा लेकर दवाओं और स्टेशनरी आने का इंतजार कर रही है। गोला गोकर्णनाथ और मोहम्मदी की टीम का भी पता नहीं चल रहा है, जबकि फरधान में पहुंची टीम कुछ मरीजों को परामर्श दे रही है। यही हाल रमियाबेहड़, पलिया, मितौली और पसगवां का भी है। इस कार्यक्रम के नोडल अफसर डॉ रविन्द्र शर्मा बताते हैं कि केंद्र से 22 चिकित्सकों के अलावा फार्मेसिस्ट और अन्य स्टाफ मिला है, जिन्हें सभी सीएचसी पर तैनात किया गया है। अभी सभी की उपस्थिति नहीं मिल पाई है। दवाएं और स्टेशनरी मिलते ही एक फार्मेट पर मरीजों का ब्यौरा भरा जाएगा और उसी से इलाज शुरू होगा। कुल मिलाकर टीम को सीएचसी पर कमरा दिलाने, दवाओं की पहले से व्यवस्था करने और स्टेशनरी आदि पहले से व्यवस्थित किए बिना ही कार्यक्रम की शुरुआत किए जाने से ही शायद यह दिक्कतें आ रही हैं।
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सीएचसी पर पहुंचने वाले मरीज हो रहे बैरंग
यूनानी चिकित्सा के लिए सीएचसी पर मरीज पहुंचने लगे हैं। शुक्रवार को निघासन में डायबिटीज के मरीज बिन्द्रा, सुच्चा सिंह, जाहिद, पेट दर्द से परेशान रामेश्वरी, जमुना प्रसाद पहुंचे, लेकिन इलाज की व्यवस्था न होने से लौट गए। इसी तरह धौरहरा में राजदीप और स्वामी दयाल को यूनानी चिकित्सा का लाभ नहीं मिल सका। उधर गोला गोकर्णनाथ की सीएचसी पर भी मरीज उमड़े, लेकिन मायूस होकर लौट गए। इसी तरह हर सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा पद्धति का क्रेज तो दिख रहा है, लेकिन इलाज शुरू न होने से लोगों में मायूसी है।
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निघासन सीएचसी में चक्कर लगा रही टीम, नहीं मिला कमरा
निघासन। सीएचसी पर पहुंची यूनानी चिकित्सा की टीम चार दिन से प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास चक्कर लगा रही है, लेकिन काम शुरू करने के लिए उसे कमरा नहीं मिल सका है। बता दें कि चार दिन पहले ही यूनानी चिकित्सक मोहम्मद जाफर, लोक अनुदेशक आयुष कुमार, फार्मेसिस्ट जावेद, एमटीसी मोहम्मद सलीम की नियुक्ति की गई थी। इन लोगों ने सीएचसी में पहुंचकर ज्वाइनिंग भी कर ली। आरोप है कि यह लोग चार दिनों से सीएचसी प्रभारी से एक कमरा देने के लिए कह रहे हैं, जिसमें वह जांच कर सकें। इस बाबत सीएचसी प्रभारी लालजी पासी ने बताया कि जिले से कोई भी लिखित आदेश नहीं आया है और न ही सीएचसी में कोई कमरा रूम खाली है, जो हम दे सकें।
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हर सीएचसी अधीक्षक को यूनानी चिकित्सा टीम के बैठने और इलाज शुरू करने के लिए व्यवस्था के निर्देश दे दिए गए हैं। सीएचसी पर टीम पहुंच भी गई हैं। इलाज शुरू न हो पाने की जानकारी नहीं है। इसे दिखवाएंगे। हर हालत में सोमवार से लोगों को सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा का लाभ दिलाया जाएगा।
-अरुण कुमार, सीएमओ
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दवाएं और स्टेशनरी छोड़िए, डॉक्टरों को नहीं मिल पा रही बैठने की जगह
सभी 22 डॉक्टरों की नियुक्ति की पुष्टि नहीं
केंद्र सरकार ने कैंसर, मधुमेह, ह्दय रोग आदि की रोकथाम के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत तो पहली जून को जिले में विशेष पायलट प्रोजेक्ट के तहत कर दी, लेकिन चार दिन बाद भी जिले के मरीजों को यूनानी चिकित्सा मिलना शुरू नहीं हो सकी है। वजह है सीएचसी पर इलाज शुरू करने के लिए यूनानी चिकित्सकों को कमरा तक नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं अब तक यूनानी चिकित्सकों की टीम को दवाएं और स्टेशनरी तक नहीं मिल सकी है। इससे उद्घाटन के चौथे दिन भी जिले में यूनानी चिकित्सा शुरू नहीं हो सकी है। उधर इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के दावे हैं कि हर सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा टीम को व्यवस्थाएं मुहैय्या करा दी गई हैं और इलाज भी शुरू करा दिया गया है।
पहली जून को यूपी में खीरी से शुरू हुए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के मंत्री आए थे। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद येस्सो नाईक और यूपी सरकार के स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ एसपी यादव लखीमपुर पहुंचकर इसका उद्घाटन किया था। इससे लोगों को उम्मीद बंधी कि नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन ऑफ कैंसर, डायबिटीज एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) कार्यक्रम से इन रोगों का इलाज यूनानी चिकित्सा से बेहतर होगा। क्योंकि अब तक इन रोगों को इलाज सिर्फ एलोपैथी से हो रहा था, जो बेहद महंगा होने के बावजूद स्थाई न था। लोगों की उम्मीद के विपरीत चौथे दिन भी सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा न मिलने से लोगों में मायूसी है। आलम यह है कि जिले में सीएचसी पर पहुंचने वाले यूनानी चिकित्सकों ने अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा दी, लेकिन फिर वे गायब हो गए। बांकेगंज सीएचसी पर आने के तुरंत बाद ही टीम छुट्टी लेकर वापस चली गई तो धौरहरा पहुंची टीम किराए पर कमरा लेकर दवाओं और स्टेशनरी आने का इंतजार कर रही है। गोला गोकर्णनाथ और मोहम्मदी की टीम का भी पता नहीं चल रहा है, जबकि फरधान में पहुंची टीम कुछ मरीजों को परामर्श दे रही है। यही हाल रमियाबेहड़, पलिया, मितौली और पसगवां का भी है। इस कार्यक्रम के नोडल अफसर डॉ रविन्द्र शर्मा बताते हैं कि केंद्र से 22 चिकित्सकों के अलावा फार्मेसिस्ट और अन्य स्टाफ मिला है, जिन्हें सभी सीएचसी पर तैनात किया गया है। अभी सभी की उपस्थिति नहीं मिल पाई है। दवाएं और स्टेशनरी मिलते ही एक फार्मेट पर मरीजों का ब्यौरा भरा जाएगा और उसी से इलाज शुरू होगा। कुल मिलाकर टीम को सीएचसी पर कमरा दिलाने, दवाओं की पहले से व्यवस्था करने और स्टेशनरी आदि पहले से व्यवस्थित किए बिना ही कार्यक्रम की शुरुआत किए जाने से ही शायद यह दिक्कतें आ रही हैं।
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सीएचसी पर पहुंचने वाले मरीज हो रहे बैरंग
यूनानी चिकित्सा के लिए सीएचसी पर मरीज पहुंचने लगे हैं। शुक्रवार को निघासन में डायबिटीज के मरीज बिन्द्रा, सुच्चा सिंह, जाहिद, पेट दर्द से परेशान रामेश्वरी, जमुना प्रसाद पहुंचे, लेकिन इलाज की व्यवस्था न होने से लौट गए। इसी तरह धौरहरा में राजदीप और स्वामी दयाल को यूनानी चिकित्सा का लाभ नहीं मिल सका। उधर गोला गोकर्णनाथ की सीएचसी पर भी मरीज उमड़े, लेकिन मायूस होकर लौट गए। इसी तरह हर सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा पद्धति का क्रेज तो दिख रहा है, लेकिन इलाज शुरू न होने से लोगों में मायूसी है।
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निघासन सीएचसी में चक्कर लगा रही टीम, नहीं मिला कमरा
निघासन। सीएचसी पर पहुंची यूनानी चिकित्सा की टीम चार दिन से प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास चक्कर लगा रही है, लेकिन काम शुरू करने के लिए उसे कमरा नहीं मिल सका है। बता दें कि चार दिन पहले ही यूनानी चिकित्सक मोहम्मद जाफर, लोक अनुदेशक आयुष कुमार, फार्मेसिस्ट जावेद, एमटीसी मोहम्मद सलीम की नियुक्ति की गई थी। इन लोगों ने सीएचसी में पहुंचकर ज्वाइनिंग भी कर ली। आरोप है कि यह लोग चार दिनों से सीएचसी प्रभारी से एक कमरा देने के लिए कह रहे हैं, जिसमें वह जांच कर सकें। इस बाबत सीएचसी प्रभारी लालजी पासी ने बताया कि जिले से कोई भी लिखित आदेश नहीं आया है और न ही सीएचसी में कोई कमरा रूम खाली है, जो हम दे सकें।
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हर सीएचसी अधीक्षक को यूनानी चिकित्सा टीम के बैठने और इलाज शुरू करने के लिए व्यवस्था के निर्देश दे दिए गए हैं। सीएचसी पर टीम पहुंच भी गई हैं। इलाज शुरू न हो पाने की जानकारी नहीं है। इसे दिखवाएंगे। हर हालत में सोमवार से लोगों को सीएचसी पर यूनानी चिकित्सा का लाभ दिलाया जाएगा।
-अरुण कुमार, सीएमओ