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श्रमिकों को नहीं मिल रहा है योजनाओं का लाभ
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 30 Apr 2015 06:44 PM IST
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प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए एक दर्जन से अधिक योजनाएं चला रखी हैं लेकिन जागरूकता के अभाव में श्रमिकों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। तमाम ऐसे संस्थान हैं जो मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दे रहे हैं। श्रमिकों के काम करने की स्थितियां बेहद खराब हैं। असंगठित मजदूरों की हालत तो और भी खराब है।
बताते चलें कि ग्रामीण और खेतिहर मजदूरों के लिए सरकार जहां मनरेगा जैसी योजना चला रही है वहीं भवन एवं अन्य निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के लिए श्रम विभाग करीब 15 कल्याणकारी योजनाएं चला रहा है। बावजूद इसके मजदूरों की हालत बदतर है। हालत यह है पॉवर कारपोरेशन जैसे विभाग में भी मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं मिल पा रही है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से जहां आठ घंटे से अधिक काम लिया जाता है वहीं तय मजदूरी और बीमा जैसी अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि इसके पीछे जागरूकता का अभाव सबसे बड़ा कारण हैं। जिले में एक अनुमान के मुताबिक लगभग 70,000 श्रमिक हैं, इनमें से श्रम विभाग में मात्र 17,000 मजदूरों का पंजीकरण है। श्रम विभाग ने पिछले वर्ष श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत लगभग 700 श्रमिकों को साइकिल और 500 मजदूरों को सोलर लाइट बांटी थी लेकिन जागरूकता के अभाव में तमाम मजदूर इससे वंचित रह गए।
नहीं बंटे 11 करोड़
जिले में श्रमिकों को लाभ देने के लिए लगभग 11 करोड़ से अधिक की धनराशि शेष है लेकिन श्रम विभाग योजनाओं का लाभ उन्हीं श्रमिकों को दे सकता है जो पंजीकृत हैं। इस कारण अभी तक केवल एक करोड़ चौरासी लाख रुपये का लाभ ही श्रमिकों को मिल पाया है। शेष रुपये विभाग के पास अवशेष हैं।
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यह हैं श्रमिकों के लिए योजनाएं
सहायक श्रमायुक्त एमके पांडे ने बताया कि श्रमिकों के लिए श्रम विभाग शिशु हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, बालिका मदद योजना, अक्षमता पेंशन योजना, दुर्घटना सहायता योजना, पुत्री विवाह अनुदान योजना, मृत्यु एवं अंत्येष्टि सहायता योजना, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, आवास सहायता योजना, पेंशन योजना, सौर ऊर्जा सहायता, साइकिल सहायता योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, मेधावी छात्र योजना और मध्याह्न भोजन सहायता जैसी योजनाएं संचालित होती हैं इनका लाभ विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को मिलता है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी शंकर जी ने बताया कि श्रम विभाग श्रमिकों के लिए समय-समय पर मजदूरी की दरें जारी करता है। यदि इन दरों से कम किसी श्रमिक को दिया जाता है तो गलत है। कहीं से भी श्रमिकों के शोषण की शिकायत मिलती है तो विभाग उस पर कार्रवाई करता है।
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बताते चलें कि ग्रामीण और खेतिहर मजदूरों के लिए सरकार जहां मनरेगा जैसी योजना चला रही है वहीं भवन एवं अन्य निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के लिए श्रम विभाग करीब 15 कल्याणकारी योजनाएं चला रहा है। बावजूद इसके मजदूरों की हालत बदतर है। हालत यह है पॉवर कारपोरेशन जैसे विभाग में भी मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं मिल पा रही है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से जहां आठ घंटे से अधिक काम लिया जाता है वहीं तय मजदूरी और बीमा जैसी अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि इसके पीछे जागरूकता का अभाव सबसे बड़ा कारण हैं। जिले में एक अनुमान के मुताबिक लगभग 70,000 श्रमिक हैं, इनमें से श्रम विभाग में मात्र 17,000 मजदूरों का पंजीकरण है। श्रम विभाग ने पिछले वर्ष श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत लगभग 700 श्रमिकों को साइकिल और 500 मजदूरों को सोलर लाइट बांटी थी लेकिन जागरूकता के अभाव में तमाम मजदूर इससे वंचित रह गए।
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नहीं बंटे 11 करोड़
जिले में श्रमिकों को लाभ देने के लिए लगभग 11 करोड़ से अधिक की धनराशि शेष है लेकिन श्रम विभाग योजनाओं का लाभ उन्हीं श्रमिकों को दे सकता है जो पंजीकृत हैं। इस कारण अभी तक केवल एक करोड़ चौरासी लाख रुपये का लाभ ही श्रमिकों को मिल पाया है। शेष रुपये विभाग के पास अवशेष हैं।
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यह हैं श्रमिकों के लिए योजनाएं
सहायक श्रमायुक्त एमके पांडे ने बताया कि श्रमिकों के लिए श्रम विभाग शिशु हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, बालिका मदद योजना, अक्षमता पेंशन योजना, दुर्घटना सहायता योजना, पुत्री विवाह अनुदान योजना, मृत्यु एवं अंत्येष्टि सहायता योजना, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, आवास सहायता योजना, पेंशन योजना, सौर ऊर्जा सहायता, साइकिल सहायता योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, मेधावी छात्र योजना और मध्याह्न भोजन सहायता जैसी योजनाएं संचालित होती हैं इनका लाभ विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को मिलता है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी शंकर जी ने बताया कि श्रम विभाग श्रमिकों के लिए समय-समय पर मजदूरी की दरें जारी करता है। यदि इन दरों से कम किसी श्रमिक को दिया जाता है तो गलत है। कहीं से भी श्रमिकों के शोषण की शिकायत मिलती है तो विभाग उस पर कार्रवाई करता है।