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Lakhimpur Kheri News: गांव का पता तो दर्ज, पर परदेसी हो गए वोटर
Fri, 05 Dec 2025 11:20 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 05 Dec 2025 11:20 PM IST
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बांकेगंज। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव-2026 की आहट के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने गांवों में सियासी हलचल बढ़ा दी है। शहरों में रह रहे ग्रामीणों के नाम ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट से हटने से प्रधान पद के दावेदारों में खलबली है। इसके चलते कई जगह मतदाता सूची को लेकर दबाव, मनुहार और खींचतान तक होने लगी है।
चुनाव आयोग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि एक मतदाता का नाम दो जगह दर्ज नहीं रह सकता। इस क्रम में ब्लॉक क्षेत्र में बूथ लेवल अफसर (बीएलओ ) घर-घर जाकर मतदाताओं के स्थायी निवास का सत्यापन कर रहे हैं। शहर में आधार या अन्य दस्तावेजों के आधार पर नाम जुड़वा चुके ग्रामीणों के नाम गांव की सूची से हटाए जा रहे हैं।
डुप्लीकेट, स्थानांतरित और स्थायी रूप से बाहर रह रहे मतदाताओं को सूची से विलोपित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके चलते प्रधान बनने का सपना देखने वाले बेचैन हैं।
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इंसेट
गांवों में मतदाता सूची बनी राजनीति का केंद्र
प्रशासन मतदाता सूची को शुद्ध करने की कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है। प्रत्याशी इस शुद्धीकरण को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए चुनौती मान रहे हैं। एसआईआर ने ऐसी स्थिति बना दी है कि गांवों में मतदाता सूची सिर्फ दस्तावेज नहीं रही। अब यह सत्ता समीकरण और चुनावी अस्तित्व का सबसे बड़ा आधार बन गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन मतदाता सूची को लेकर मचा यह घमासान बता रहा है कि आने वाले महीनों में पंचायत की राजनीति और भी गर्माने वाली है।
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चुनाव आयोग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि एक मतदाता का नाम दो जगह दर्ज नहीं रह सकता। इस क्रम में ब्लॉक क्षेत्र में बूथ लेवल अफसर (बीएलओ ) घर-घर जाकर मतदाताओं के स्थायी निवास का सत्यापन कर रहे हैं। शहर में आधार या अन्य दस्तावेजों के आधार पर नाम जुड़वा चुके ग्रामीणों के नाम गांव की सूची से हटाए जा रहे हैं।
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डुप्लीकेट, स्थानांतरित और स्थायी रूप से बाहर रह रहे मतदाताओं को सूची से विलोपित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके चलते प्रधान बनने का सपना देखने वाले बेचैन हैं।
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गांवों में मतदाता सूची बनी राजनीति का केंद्र
प्रशासन मतदाता सूची को शुद्ध करने की कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है। प्रत्याशी इस शुद्धीकरण को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए चुनौती मान रहे हैं। एसआईआर ने ऐसी स्थिति बना दी है कि गांवों में मतदाता सूची सिर्फ दस्तावेज नहीं रही। अब यह सत्ता समीकरण और चुनावी अस्तित्व का सबसे बड़ा आधार बन गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन मतदाता सूची को लेकर मचा यह घमासान बता रहा है कि आने वाले महीनों में पंचायत की राजनीति और भी गर्माने वाली है।