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आखिर पिंजरे में कैद हो गई खूनी बाघिन
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लखीमपुर खीरी। पिंजरे मे कैद बाघिन। विज्ञप्ति
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व से सटे मंझरा-खैरटिया में इंसानों को मार डालने वाली बाघिन भी बुधवार रात पिंजरे में कैद हो गई। पकड़ी गई बाघिन को पिंजरे समेत रात में ही कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार भेज दिया गया। स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन की उम्र आठ-नौ साल पाई गई और दो दांत टूटे मिले।
बाघ के पिंजरे में कैद होने के बाद बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग की मुहिम जारी थी। बुधवार को अलग-अलग जगहों पर छह पिंजरे लगाए गए थे। रात करीब नौ बजे बाघिन मंझरा कौड़ियाला रोड के किनारे लगाए गए पिंजरे में बंधे बकरे को खाने के लिए जैसे ही घुसी, कैद हो गई। बाघिन की दहाड़ सुनकर पेट्रोलिंग कर रही टीम जब मौके पर पहुंची तो बाघिन को कैद पाया।
सूचना पर उपनिदेशक सुंदरेश मौके पर पहुंच गए। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक उस समय कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार में थे। वह भी रात में ही पहुंच गए। पिंजरे में कैद हुई बाघिन को पिंजरे समेत कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार ले जाया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, डब्ल्यूटीआई के पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार, डॉ. खनिन चंगमाई, कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. नितेश ने फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन समेत कई वनाधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन का बारीकी से स्वास्थ्य परीक्षण किया।
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स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन के दो दांत टूटे पाए गए। अनुमान लगाया जा रहा है कि भारी शिकार को दबोचने में अक्षम हो जाने के कारण बाघिन आदमखोर बनी है। हालांकि अभी बाघिन को और वैज्ञानिक परीक्षणों से होकर गुजरना होगा। तभी बाघिन को आदमखोर घाषित किया जा सकेगा। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि बाघिन को पकड़ तो लिया गया है लेकिन क्षेत्रीय लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर अभी सर्च अभियान जारी रहेगा।
‘खैरटिया क्षेत्र में इंसानों को निवाला बनाने वाली बाघिन को बुधवार रात पिंजरे में कैद कर लिया गया है। स्वास्थ्य परीक्षण में इसके दो दांत टूटे पाए गए हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यही बाघिन इंसानों का शिकार कर रही थी। पूरी तरह इसकी पुष्टि होने के बाद ही इसे चिड़ियाघर भेजा जाएगा। फिलहाल इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही उनसे मार्गदर्शन मांगा गया है।’ - संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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बाघ के पिंजरे में कैद होने के बाद बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग की मुहिम जारी थी। बुधवार को अलग-अलग जगहों पर छह पिंजरे लगाए गए थे। रात करीब नौ बजे बाघिन मंझरा कौड़ियाला रोड के किनारे लगाए गए पिंजरे में बंधे बकरे को खाने के लिए जैसे ही घुसी, कैद हो गई। बाघिन की दहाड़ सुनकर पेट्रोलिंग कर रही टीम जब मौके पर पहुंची तो बाघिन को कैद पाया।
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सूचना पर उपनिदेशक सुंदरेश मौके पर पहुंच गए। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक उस समय कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार में थे। वह भी रात में ही पहुंच गए। पिंजरे में कैद हुई बाघिन को पिंजरे समेत कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार ले जाया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, डब्ल्यूटीआई के पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार, डॉ. खनिन चंगमाई, कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. नितेश ने फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन समेत कई वनाधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन का बारीकी से स्वास्थ्य परीक्षण किया।
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स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन के दो दांत टूटे पाए गए। अनुमान लगाया जा रहा है कि भारी शिकार को दबोचने में अक्षम हो जाने के कारण बाघिन आदमखोर बनी है। हालांकि अभी बाघिन को और वैज्ञानिक परीक्षणों से होकर गुजरना होगा। तभी बाघिन को आदमखोर घाषित किया जा सकेगा। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि बाघिन को पकड़ तो लिया गया है लेकिन क्षेत्रीय लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर अभी सर्च अभियान जारी रहेगा।
‘खैरटिया क्षेत्र में इंसानों को निवाला बनाने वाली बाघिन को बुधवार रात पिंजरे में कैद कर लिया गया है। स्वास्थ्य परीक्षण में इसके दो दांत टूटे पाए गए हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यही बाघिन इंसानों का शिकार कर रही थी। पूरी तरह इसकी पुष्टि होने के बाद ही इसे चिड़ियाघर भेजा जाएगा। फिलहाल इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही उनसे मार्गदर्शन मांगा गया है।’ - संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व