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दुधवा में कर्मचारियों की लापरवाही से मरी थी बाघिन, दो निलंबित

Wed, 02 Sep 2020 01:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 01:48 AM IST
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The tigress died due to negligence of employees in Dudhwa, two suspended
लखनऊ/लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क में बाघिन कर्मचारियों की लापरवाही से मरी थी। अगर उसे सही समय पर इलाज मिल गया होता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। इसका खुलासा उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट में किया गया है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रोजेक्ट टाइगर पीके शर्मा ने बताया कि इस मामले में संबंधित फॉरेस्ट गार्ड और फॉरेस्टर को निलंबित कर दिया गया है। दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन को जरूरी निर्देश भी दे दिए गए हैं। 11 अगस्त को दुधवा नेशनल पार्क के मैलानी रेंज के बफर जोन में स्थित गांव जटपुरा में एक खेत में बाघिन का शव मिला था। उसे नायलॉन की रस्सी से फंदा लगाया गया था। इस मामले की जांच मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव पश्चिमी सुनील चौधरी की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी को सौंपी गई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को दे दी है। वहीं, आईवीआरआई, इज्जतनगर के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ के पूर्व इंचार्ज व सेवानिवृत्त प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बी बीएम अरोरा ने इस जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। ब्यूरो
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जांच रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल
लखनऊ। आईवीआरआई, इज्जतनगर के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ के पूर्व इंचार्ज व सेवानिवृत प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बी बीएम अरोरा ने इस जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाघ या बाघिन के सामने फंदा आने पर पहले वह अपना पंजा इसमें मारता है। इसलिए गरदन के बजाय फंदे में पैर पहले फंसता है। ऐसी स्थिति में यह भी बताया जाना चाहिए कि उसके पैर (पंजे) में चोट लगी थी या नहीं। गर्दन में फंदा तभी फंस सकता है, जब इसे पेड़ या किसी ऊंचे स्थान पर फिट किया गया हो।
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डॉ. अरोरा का कहना है की नायलॉन की रस्सी इतना गहरा घाव नहीं कर सकती है, जिससे टाइगर को नुकसान हो। ज्यादा में ज्यादा उसके बालों में रगड़ लग सकती है। नायलॉन की रस्सी से बाघिन उसी स्थिति में मर सकती थी, जब उसकी सांस घुटती या मस्तिष्क को जाने वाली जुगलर वेन (नस) क्षतिग्रस्त होती। सांस घुटने या जुगलर वेन के नष्ट होने पर तत्काल ही बाघिन की मौत हो जाती। फंदे में फंसने के बाद वह तीन-चार दिन जिंदा नही रह सकती थी। इस बारे में सवाल किए जाने पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर पीके शर्मा ने बताया कि बाघिन के पंजे में चोट होने के बाबत रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसका भी उल्लेख नहीं है की फंदा जमीन पर था या उससे ऊपर टांगा गया था। ब्यूरो
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बाघ-बाघिन की मौत मामले में पहली बार बड़ी कार्रवाई
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज में करीब 21 दिन पहले बाघिन की मौत के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने के आरोप में अंतत: एक फारेस्टर और फारेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया। किसी बाघ या बाघिन की मौत के मामले में दुधवा टाइगर रिजर्व में यह पहली पहली बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में बीते 11 अगस्त को बाघिन का शव बरामद हुआ था। जिसके गले में नायलान की रस्सी का फंदा कसा हुआ था। जिससे फंदा लगाकर बाघिन का शिकार किए जाने की बात सामने आई थी। स्थानीय स्तर पर मामले की जांच होने के साथ-साथ दुधवा टाइगर रिजर्व के पूर्व एफडी सुनील चौधरी की अध्यक्षता में दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने भी मामले की जांच की थी। दूसरे सदस्य के रूप में वन संरक्षक नीरज कुमार भी शामिल थे। जांच के दौरान संबधित क्षेत्र के फारेस्टर मोहम्मद उमर और फारेस्ट गार्ड रामपाल यादव की लापरवाही सामने आने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। इस समय सवाल यह उठे थे कि बाघिन गले में फंसा फंदा लिए हुए इधर-उधर घूमती रही और वन कर्मियों को इसका पता तक नहीं चल सका। इस पर स्थानीय वन कर्मियों की लापरवाही माना गया और यह कार्रवाई की गई।
उधर सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघिन के चेहरे पर जख्म पाए गए थे और उसके पेट में सेही के कांटे फंसे थे। बाघिन की आंतों में टेपवर्म भी मिले हैं। इन सब बातों को भी बाघिन की मौत से जोड़ा गया। संवाद

डीटीआर बफरजोन की मैलानी रेंज में बाघिन की मौत मामले में जांच के दौरान प्रथम दृष्टया संबधित फील्ड स्टॉफ को लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है। इसके आधार पर ही फारेस्टर और फारेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया गया है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन
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