{"_id":"64c40bdff03ec4a8a209d274","slug":"the-tiger-clan-increased-in-the-shrinking-forests-making-the-fields-a-home-lakhimpur-news-c-4-1-knp1002-216341-2023-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: सिमटते जंगलों में बढ़ा बाघों का कुनबा, खेतों को बना रहे ठिकाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: सिमटते जंगलों में बढ़ा बाघों का कुनबा, खेतों को बना रहे ठिकाना
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। इसके उलट जंगल सिमट रहे हैं। कहीं कटान तो कहीं अतिक्रमण की वजह से बाघों का रिहायशी क्षेत्र घटा है। नतीजतन बाघ जंगल से सटे खेतों में अपना ठिकाना बना रहे हैं। इसका खामियाजा बाघ तो भुगत ही रहे हैं, इन्सानों को झेलना पड़ रहा है। दोनों के लिए कई तरह के खतरे भी बढ़ रहे हैं। बाघ शिकारियों के निशाने पर आ रहे हैं। मानव और बाघ संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं।
वर्ष 1977 में दुधवा टाइगर रिजर्व की स्थापना हुई। तब करीब 50 बाघ थे। वर्ष 1984 में कतर्निया घाट वन्यजीव विहार को जोड़कर दुधवा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। अब बाघों की संख्या 105 हो गई है। इधर, बाघ तो बढ़ रहे हैं लेकिन जंगल घट गया। दुधवा टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल करीब 2200 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से करीब 9900 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है।
बाघ साल दर साल
वर्ष बाघ
वर्ष 1977 50
वर्ष.1980 57
वर्ष 2000 77
वर्ष 2010 80
वर्ष 2014 68
वर्ष 2018 82
वर्ष 2022 105
गणना नहीं, अनुमानीकरण होता
बाघों की गणना नहीं होती। अनुमानीकरण किया जाता है। पूरे जंगल में कैमरे लगाकर बाघों की तस्वीरें ट्रैप की जाती हैं। धारियों का मिलानकर गिनती की जाती है। यह गणना हर चार साल बाद होती है। कई बार गन्ने के खेतों में रहने के कारण बाघ कैमरों की नजर में नहीं आ पाते। वर्ष 2022 में हुई गणना के संपूर्ण परिणाम अभी घोषित नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
वर्जन
बाघों के सरंक्षण के साथ जंगल में पूरी पारिस्थितिकी का संरक्षण होता है। दुधवा में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी संतोषजनक है।
-ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
वर्ष 1977 में दुधवा टाइगर रिजर्व की स्थापना हुई। तब करीब 50 बाघ थे। वर्ष 1984 में कतर्निया घाट वन्यजीव विहार को जोड़कर दुधवा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। अब बाघों की संख्या 105 हो गई है। इधर, बाघ तो बढ़ रहे हैं लेकिन जंगल घट गया। दुधवा टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल करीब 2200 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से करीब 9900 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है।
विज्ञापन
बाघ साल दर साल
वर्ष बाघ
वर्ष 1977 50
वर्ष.1980 57
वर्ष 2000 77
वर्ष 2010 80
वर्ष 2014 68
वर्ष 2018 82
वर्ष 2022 105
गणना नहीं, अनुमानीकरण होता
बाघों की गणना नहीं होती। अनुमानीकरण किया जाता है। पूरे जंगल में कैमरे लगाकर बाघों की तस्वीरें ट्रैप की जाती हैं। धारियों का मिलानकर गिनती की जाती है। यह गणना हर चार साल बाद होती है। कई बार गन्ने के खेतों में रहने के कारण बाघ कैमरों की नजर में नहीं आ पाते। वर्ष 2022 में हुई गणना के संपूर्ण परिणाम अभी घोषित नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
वर्जन
बाघों के सरंक्षण के साथ जंगल में पूरी पारिस्थितिकी का संरक्षण होता है। दुधवा में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी संतोषजनक है।
-ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व