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स्वदेश लौटे छात्रों ने बयां की अपने संघर्ष की कहानी
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अपने माता-पिता के साथ गोविंदनगर का छात्र शिवम सिंह।
बोले, भारत सरकार ने दिखाई होती थोड़ी और तेजी तो नहीं मांगनी पड़ती लोगों से मदद की भीख
संपूर्णानगर। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए खजुरिया व गोविंदनगर के छात्रों ने वापस लौटने पर अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। कहा कि दस-दस घंटे बार्डर पर खड़े रहे, बार्डर तक पहुंचने के लिए भी लोगों को मिन्नतें करनी पड़ीं। बोले, संकट में फंसे लोगों को निकालने के लिए जिस तेजी से भारत सरकार को काम करना चाहिए थे, वह भी नहीं हुआ।
खजुरिया निवासी बकरीदन अंसारी के पुत्र अब्दुल मन्ना अंसारी ने बताया कि उन्हें 27 फरवरी से तीन मार्च तक रोमानिया में फंसे रहना पड़ा। वहां से घर तक सरकार के खर्च से पहुंचे हैं। बताया कि वतन वापसी से संतुष्ट तो हैं, लेकिन प्रसन्न नहीं। क्योंकि जिस तेजी से भारत सरकार को काम करना चाहिए था उस तेजी से काम नहीं हुआ।
शनिवार रात डेढ़ बजे घर पहुंचे अब्दुल ने कहा कि उन्हें रोमानिया के शेल्टर होम में रखा गया था। बार्डर तक पहुंचाने में कई लोगों से मिन्नतें कीं। भारत व रोमानिया दूतावास के सहयोग से घर पहुंचे हैं।
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गोविंदनगर निवासी ओमप्रकाश सिंह के पुत्र शिवम सिंह भी बीती देर रात डेढ़ बजे अपने आवास पर पहुंचे और परिजन से गले मिलकर खुशी जताई। शिवम सिंह ने बताया कि सरकार ने देर से भारतीयों को लाने की मुहिम छेड़ी, जिसके कारण उन्हें बार्डर तक पहुंचने में लोगों से मदद की भीख मांगनी पड़ी। वहां के हालात काफी खराब हैं, बार्डर पर दस-दस घंटे खड़े रहने के बाद यूक्रेन से भारत आने में सफलता पाई है। इसके लिए सरकार के साथ ही मीडिया को भी धन्यवाद देते हैं जिन्होंने लगातार हमारी खोज खबर जारी रखी और सरकार पर खबरों के माध्यम से दबाव में रखा, जिससे हम सुरक्षित अपने देश पहुंच सके। अब भी करीब पांच हजार छात्र वहां फंसे हैं, हमारी अपील है कि भारत सरकार उन्हें भी सुरक्षित अपनों घरों तक पहुंचाए।
दिल्ली बार्डर पर बने यूपी भवन पहुंचे ऋषभ गोयल
पलियाकलां। मोहल्ला किसान द्वितीय निवासी मुकेश गोयल के पुत्र ऋषभ गोयल भी सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। ऋषभ के पिता मुकेश ने बताया कि दोपहर में पुत्र से बात हुई तो वह गाजियाबाद स्थित यूपी भवन में पहुंच गया था और कागजी कार्रवाई पूरी कर रहा था। अब यूपी सरकार द्वारा उसको घर तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। देर रात तक उसकी रवानगी होगी। यूक्रेन के स्लोवाकिया बार्डर से वह फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा था।
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संपूर्णानगर। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए खजुरिया व गोविंदनगर के छात्रों ने वापस लौटने पर अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। कहा कि दस-दस घंटे बार्डर पर खड़े रहे, बार्डर तक पहुंचने के लिए भी लोगों को मिन्नतें करनी पड़ीं। बोले, संकट में फंसे लोगों को निकालने के लिए जिस तेजी से भारत सरकार को काम करना चाहिए थे, वह भी नहीं हुआ।
खजुरिया निवासी बकरीदन अंसारी के पुत्र अब्दुल मन्ना अंसारी ने बताया कि उन्हें 27 फरवरी से तीन मार्च तक रोमानिया में फंसे रहना पड़ा। वहां से घर तक सरकार के खर्च से पहुंचे हैं। बताया कि वतन वापसी से संतुष्ट तो हैं, लेकिन प्रसन्न नहीं। क्योंकि जिस तेजी से भारत सरकार को काम करना चाहिए था उस तेजी से काम नहीं हुआ।
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शनिवार रात डेढ़ बजे घर पहुंचे अब्दुल ने कहा कि उन्हें रोमानिया के शेल्टर होम में रखा गया था। बार्डर तक पहुंचाने में कई लोगों से मिन्नतें कीं। भारत व रोमानिया दूतावास के सहयोग से घर पहुंचे हैं।
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गोविंदनगर निवासी ओमप्रकाश सिंह के पुत्र शिवम सिंह भी बीती देर रात डेढ़ बजे अपने आवास पर पहुंचे और परिजन से गले मिलकर खुशी जताई। शिवम सिंह ने बताया कि सरकार ने देर से भारतीयों को लाने की मुहिम छेड़ी, जिसके कारण उन्हें बार्डर तक पहुंचने में लोगों से मदद की भीख मांगनी पड़ी। वहां के हालात काफी खराब हैं, बार्डर पर दस-दस घंटे खड़े रहने के बाद यूक्रेन से भारत आने में सफलता पाई है। इसके लिए सरकार के साथ ही मीडिया को भी धन्यवाद देते हैं जिन्होंने लगातार हमारी खोज खबर जारी रखी और सरकार पर खबरों के माध्यम से दबाव में रखा, जिससे हम सुरक्षित अपने देश पहुंच सके। अब भी करीब पांच हजार छात्र वहां फंसे हैं, हमारी अपील है कि भारत सरकार उन्हें भी सुरक्षित अपनों घरों तक पहुंचाए।
दिल्ली बार्डर पर बने यूपी भवन पहुंचे ऋषभ गोयल
पलियाकलां। मोहल्ला किसान द्वितीय निवासी मुकेश गोयल के पुत्र ऋषभ गोयल भी सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। ऋषभ के पिता मुकेश ने बताया कि दोपहर में पुत्र से बात हुई तो वह गाजियाबाद स्थित यूपी भवन में पहुंच गया था और कागजी कार्रवाई पूरी कर रहा था। अब यूपी सरकार द्वारा उसको घर तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। देर रात तक उसकी रवानगी होगी। यूक्रेन के स्लोवाकिया बार्डर से वह फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा था।

अपने परिजन के साथ संपूर्णानगर के खजुरिया निवासी छात्र अब्दुल मन्नान।