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Lakhimpur Kheri News: रपटा पर बाढ़ की तेज धार ने रोकी रफ्तार, यात्री फंसे
Fri, 11 Sep 2026 01:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:00 AM IST
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पलिया दुधवा मार्ग के रपटा पुल पर चलता सुहेली नदी की बाढ़ का पानी। संवाद
पलियाकलां। सुहेली नदी की बाढ़ का असर बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। पलिया-दुधवा मार्ग के रपटा पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने और पानी के तेज बहाव के कारण वाहनों और पैदल आवागमन पर रोक जारी रही। प्रशासन ने बंसी नगर चौकी के पास बैरिकेडिंग कर पुलिस तैनात की है।
रपटा पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। पलिया से गौरीफंटा और चंदनचौकी जाने वाली बसों को बंसी नगर चौकी के पास रोक दिया गया है। दूसरी ओर से आने वाली बसों और अन्य वाहनों को भी पुल के उस पार रोका जा रहा है। मार्ग बंद होने से यात्रियों की भीड़ जमा है। सड़कों के ऊपर से बाढ़ का पानी बह रहा है। खेतों में कई फुट पानी होने से हजारों हेक्टेयर फसल डूबकर बर्बाद होने के कगार पर हैं।
एसडीएम पुष्पक तोमर और सीओ जितेंद्र सिंह परिहार ने टीम के साथ स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही आवागमन शुरू करने पर फैसला होगा, तब तक आमजन से पुल पार न करने की अपील की गई है। बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट का वितरण भी शुरू कर दिया गया है।
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लखीमपुर से आए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार यादव, सीओ जितेंद्र सिंह परिहार समेत अधिकारियों ने बंसी नगर स्थित रपटा पुल का निरीक्षण किया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल से वाहनों के साथ पैदल आवागमन पर भी प्रतिबंध जारी है। एसडीएम के मुताबिक शुक्रवार दोपहर 12 बजे के बाद अधिकारी दल दोबारा तकनीकी निरीक्षण करेगा। जांच और संतुष्टि के बाद ही आम जनता के लिए आवागमन बहाल करने पर निर्णय लिया जाएगा।
रपटा पुल पर आवागमन बंद होने से दिल्ली, मुंबई, गुजरात समेत महानगरों और पलिया आने वाले नेपाली नागरिक भी फंस गए हैं। वे अपने गंतव्य तक पहुंचने को लेकर परेशान हैं।
ग्राम पंचायत घोला के मजरा निषाद नगर, अतर नगर, गजरौला, मुजहा और बेलहिया समेत दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। निषाद नगर के कई घरों में दो से तीन फुट पानी भरा है। बसंतापुर कला के खालेपुरवा, सेमरीपुरवा, अफीमीपुरवा, फरसहिया टांडा, बसंतापुर खुर्द के पठाननपुरवा, तिलकपुरवा और पलिया देहात में भी जलस्तर कम नहीं हुआ है।
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डिग्री कॉलेज, महिला थाना और फायर स्टेशन जलमग्न
सुहेली में उफान के कारण डिग्री कॉलेज परिसर में बृहस्पतिवार को भी बाढ़ का पानी भरा रहा। फायर ब्रिगेड स्टेशन भी जलमग्न है। महिला थाने के प्रांगण के बाहर भी पानी भरा है।
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घोसियाना गांव बना टापू, नाव ही सहारा
महेवागंज/फूलबेहड़। तहसील सदर की ग्राम पंचायत जंगल नंबर 11 का मजरा घोसियाना बाढ़ के पानी से टापू बन गया है। घरों और पशुशालाओं में घुटनों तक पानी भरा है। फसलें भी डूबी हैं। ग्रामीणों के पास रात बिताने की जगह नहीं बची है।
गांव में करीब 80 कच्चे-पक्के घर हैं और आबादी लगभग 300 है। यह गांव शारदा नदी के पार खैर जंगल के किनारे बसा है। मुख्यालय से 23 और निघासन से 13 किलोमीटर दूर है। अधिकतर लोग दुग्ध व्यवसाय और खेती से जुड़े हैं।
गफ्फार अली, मजीद पप्पू, जियाउद्दीन, गुड्डू, मोबीन, अलीशेर, रियासत, जाफर और मोहम्मद तकदीर आलम ने बताया कि बाढ़ के दिनों में गांव से निकलने का एकमात्र जरिया नाव है। घरों में पानी भरने से कोई छप्पर के बड़ेर पर दिन गुजार रहा है तो कोई दूसरे की छत पर शरण लिए है।
ग्रामीणों ने बताया कि मिलपुरवा शारदा तटबंध आठ और झंडी सात किलोमीटर दूर है। उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से कोई सुविधा नहीं मिली है। राशन, पानी और दवा के लिए भी नाव से निकलना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान पति तेजलाल निषाद, लेखपाल रमाकांत वर्मा, विनोद यादव और लालू निषाद बिल्लू सिंह ने बुधवार शाम बाढ़ पीड़ित गांव घोसियाना का दौरा कर मदद का आश्वासन दिया। उधर टॉपरपुरवा, चिखुरीपुरवा और नयनपुरवा में खेत और मार्ग जलमग्न हैं। संवाद
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विधायक ने जसनगर में बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनीं
तिकुनिया। जसनगर में कटान रोकने के बंदोबस्त का काम बंद होने की सूचना पर विधायक शशांक वर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने मौके पर सिंचाई विभाग की ओर से बनाई गई ठोकरों का निरीक्षण किया।
विधायक ने कहा कि फिलहाल कटान रुक गया है, लेकिन अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने नयापिंड के बाढ़ पीड़ितों को खैरटिया ग्राम पंचायत स्थित दरबारा फॉर्म की डेढ़ एकड़ जमीन में घर बनाने को कहा। इस पर कमल सिंह समेत 41 परिवारों के ग्रामीणों ने अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। संवाद
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रपटा पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। पलिया से गौरीफंटा और चंदनचौकी जाने वाली बसों को बंसी नगर चौकी के पास रोक दिया गया है। दूसरी ओर से आने वाली बसों और अन्य वाहनों को भी पुल के उस पार रोका जा रहा है। मार्ग बंद होने से यात्रियों की भीड़ जमा है। सड़कों के ऊपर से बाढ़ का पानी बह रहा है। खेतों में कई फुट पानी होने से हजारों हेक्टेयर फसल डूबकर बर्बाद होने के कगार पर हैं।
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एसडीएम पुष्पक तोमर और सीओ जितेंद्र सिंह परिहार ने टीम के साथ स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही आवागमन शुरू करने पर फैसला होगा, तब तक आमजन से पुल पार न करने की अपील की गई है। बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट का वितरण भी शुरू कर दिया गया है।
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लखीमपुर से आए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार यादव, सीओ जितेंद्र सिंह परिहार समेत अधिकारियों ने बंसी नगर स्थित रपटा पुल का निरीक्षण किया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल से वाहनों के साथ पैदल आवागमन पर भी प्रतिबंध जारी है। एसडीएम के मुताबिक शुक्रवार दोपहर 12 बजे के बाद अधिकारी दल दोबारा तकनीकी निरीक्षण करेगा। जांच और संतुष्टि के बाद ही आम जनता के लिए आवागमन बहाल करने पर निर्णय लिया जाएगा।
रपटा पुल पर आवागमन बंद होने से दिल्ली, मुंबई, गुजरात समेत महानगरों और पलिया आने वाले नेपाली नागरिक भी फंस गए हैं। वे अपने गंतव्य तक पहुंचने को लेकर परेशान हैं।
ग्राम पंचायत घोला के मजरा निषाद नगर, अतर नगर, गजरौला, मुजहा और बेलहिया समेत दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। निषाद नगर के कई घरों में दो से तीन फुट पानी भरा है। बसंतापुर कला के खालेपुरवा, सेमरीपुरवा, अफीमीपुरवा, फरसहिया टांडा, बसंतापुर खुर्द के पठाननपुरवा, तिलकपुरवा और पलिया देहात में भी जलस्तर कम नहीं हुआ है।
डिग्री कॉलेज, महिला थाना और फायर स्टेशन जलमग्न
सुहेली में उफान के कारण डिग्री कॉलेज परिसर में बृहस्पतिवार को भी बाढ़ का पानी भरा रहा। फायर ब्रिगेड स्टेशन भी जलमग्न है। महिला थाने के प्रांगण के बाहर भी पानी भरा है।
घोसियाना गांव बना टापू, नाव ही सहारा
महेवागंज/फूलबेहड़। तहसील सदर की ग्राम पंचायत जंगल नंबर 11 का मजरा घोसियाना बाढ़ के पानी से टापू बन गया है। घरों और पशुशालाओं में घुटनों तक पानी भरा है। फसलें भी डूबी हैं। ग्रामीणों के पास रात बिताने की जगह नहीं बची है।
गांव में करीब 80 कच्चे-पक्के घर हैं और आबादी लगभग 300 है। यह गांव शारदा नदी के पार खैर जंगल के किनारे बसा है। मुख्यालय से 23 और निघासन से 13 किलोमीटर दूर है। अधिकतर लोग दुग्ध व्यवसाय और खेती से जुड़े हैं।
गफ्फार अली, मजीद पप्पू, जियाउद्दीन, गुड्डू, मोबीन, अलीशेर, रियासत, जाफर और मोहम्मद तकदीर आलम ने बताया कि बाढ़ के दिनों में गांव से निकलने का एकमात्र जरिया नाव है। घरों में पानी भरने से कोई छप्पर के बड़ेर पर दिन गुजार रहा है तो कोई दूसरे की छत पर शरण लिए है।
ग्रामीणों ने बताया कि मिलपुरवा शारदा तटबंध आठ और झंडी सात किलोमीटर दूर है। उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से कोई सुविधा नहीं मिली है। राशन, पानी और दवा के लिए भी नाव से निकलना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान पति तेजलाल निषाद, लेखपाल रमाकांत वर्मा, विनोद यादव और लालू निषाद बिल्लू सिंह ने बुधवार शाम बाढ़ पीड़ित गांव घोसियाना का दौरा कर मदद का आश्वासन दिया। उधर टॉपरपुरवा, चिखुरीपुरवा और नयनपुरवा में खेत और मार्ग जलमग्न हैं। संवाद
विधायक ने जसनगर में बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनीं
तिकुनिया। जसनगर में कटान रोकने के बंदोबस्त का काम बंद होने की सूचना पर विधायक शशांक वर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने मौके पर सिंचाई विभाग की ओर से बनाई गई ठोकरों का निरीक्षण किया।
विधायक ने कहा कि फिलहाल कटान रुक गया है, लेकिन अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने नयापिंड के बाढ़ पीड़ितों को खैरटिया ग्राम पंचायत स्थित दरबारा फॉर्म की डेढ़ एकड़ जमीन में घर बनाने को कहा। इस पर कमल सिंह समेत 41 परिवारों के ग्रामीणों ने अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। संवाद

पलिया दुधवा मार्ग के रपटा पुल पर चलता सुहेली नदी की बाढ़ का पानी। संवाद

पलिया दुधवा मार्ग के रपटा पुल पर चलता सुहेली नदी की बाढ़ का पानी। संवाद