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Lakhimpur Kheri News: बेहतर रोजगार की तलाश ले गई परदेश ... नहीं छूटा अपनी मिट्टी का अहसास
Thu, 08 Jan 2026 11:36 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:36 PM IST
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जाम्बिया में रह रहे लखीमपुर खीरी के गांव सेमरा के मूल निवासी रजनीश वर्मा व उनकी पत्नी श्वेता अ
पूर्णेश वर्मा
लखीमपुर खीरी। तराई की धरती से निकले कई सपने आज सात समंदर पार साकार हो रहे हैं। बेहतर रोजगार की तलाश में परदेश गए इन लोगों में अपने गांवों की सादगी, संस्कार और मिट्टी का अहसास आज भी कायम है। अपनी मेहनत के बलबूते विदेशों में पहचान बनाने वाले ये लोग न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। आइये आज प्रवासी भारतीय दिवस पर कुछ इसी तरह के लोगों के बारे जानते हैं...।
लखीमपुर सदर तहसील के सेमरा गांव के निवासी रजनीश वर्मा अपनी पत्नी श्वेता वर्मा के साथ करीब नौ वर्षों से अफ्रीकी देश जाम्बिया में रह रहे हैं। उनका एक छोटा बच्चा भी है। रजनीश एग्रोनॉमिस्ट हैं, जो जाम्बिया में कृषि फार्म मैनेजर के रूप में कार्य कर रहे हैं। रजनीश ने बताया कि सीमित संसाधनों से निकलकर विदेश में जीवन शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन मेहनत और धैर्य ने रास्ता बनाया।
आज वे वहां न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों को भी अपने बच्चे में जीवित रखे हुए हैं। त्योहार हो या अपनी संस्कृति, रजनीश का परिवार आज भी गांव से गहराई से जुड़ा है। खास मौकों, जैसे किसी अपने की शादी या परिवार में कोई और उत्सव के मौके पर वे गांव आने की काेशिश करते हैं।
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पलिया तहसील के गांव बिजौरिया के निवासी ओंकार सिंह जूटी (काजू) पिछले करीब 15 वर्षों से अपने परिवार के साथ कनाडा में रह रहे हैं। संघर्ष से शुरू हुई उनकी यात्रा आज स्थिरता और सम्मान तक पहुंच चुकी है। जूटी ने बताया कि जब वे कनाडा गए थे तो शुरुआत के कुछ साल तक अलग-अलग प्राइवेट नौकरी की। इसके बाद अपना ट्रांसपोर्ट का कारोबार खड़ा किया। बताया कि रोजगार के लिए अपना देश तो छोड़ दिया, लेकिन कहते हैं अपनी मिट्टी की याद तो अलग ही है। वे मानते हैं कि गांव में सीखी मेहनत और ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही। कनाडा की व्यस्त जिंदगी में भी वे भारतीय मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं को प्राथमिकता देते हैं।
भीरा क्षेत्र के गांव मझौरा के निवासी गुरप्रीत सिंह गोपी करीब 12 वर्षों से अपने परिवार के साथ अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में रह रहे हैं। गुरप्रीत वहां प्राइवेट नौकरी करते हैं। दुनिया के सबसे व्यस्त शहरों में से एक न्यूयार्क में जीवन बिताते हुए भी उनका दिल अपने गांव और देश के लिए धड़कता है। वे गर्व से खुद को भारतीय बताते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास करते हैं। संवाद
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लखीमपुर खीरी। तराई की धरती से निकले कई सपने आज सात समंदर पार साकार हो रहे हैं। बेहतर रोजगार की तलाश में परदेश गए इन लोगों में अपने गांवों की सादगी, संस्कार और मिट्टी का अहसास आज भी कायम है। अपनी मेहनत के बलबूते विदेशों में पहचान बनाने वाले ये लोग न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। आइये आज प्रवासी भारतीय दिवस पर कुछ इसी तरह के लोगों के बारे जानते हैं...।
लखीमपुर सदर तहसील के सेमरा गांव के निवासी रजनीश वर्मा अपनी पत्नी श्वेता वर्मा के साथ करीब नौ वर्षों से अफ्रीकी देश जाम्बिया में रह रहे हैं। उनका एक छोटा बच्चा भी है। रजनीश एग्रोनॉमिस्ट हैं, जो जाम्बिया में कृषि फार्म मैनेजर के रूप में कार्य कर रहे हैं। रजनीश ने बताया कि सीमित संसाधनों से निकलकर विदेश में जीवन शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन मेहनत और धैर्य ने रास्ता बनाया।
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आज वे वहां न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों को भी अपने बच्चे में जीवित रखे हुए हैं। त्योहार हो या अपनी संस्कृति, रजनीश का परिवार आज भी गांव से गहराई से जुड़ा है। खास मौकों, जैसे किसी अपने की शादी या परिवार में कोई और उत्सव के मौके पर वे गांव आने की काेशिश करते हैं।
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पलिया तहसील के गांव बिजौरिया के निवासी ओंकार सिंह जूटी (काजू) पिछले करीब 15 वर्षों से अपने परिवार के साथ कनाडा में रह रहे हैं। संघर्ष से शुरू हुई उनकी यात्रा आज स्थिरता और सम्मान तक पहुंच चुकी है। जूटी ने बताया कि जब वे कनाडा गए थे तो शुरुआत के कुछ साल तक अलग-अलग प्राइवेट नौकरी की। इसके बाद अपना ट्रांसपोर्ट का कारोबार खड़ा किया। बताया कि रोजगार के लिए अपना देश तो छोड़ दिया, लेकिन कहते हैं अपनी मिट्टी की याद तो अलग ही है। वे मानते हैं कि गांव में सीखी मेहनत और ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही। कनाडा की व्यस्त जिंदगी में भी वे भारतीय मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं को प्राथमिकता देते हैं।
भीरा क्षेत्र के गांव मझौरा के निवासी गुरप्रीत सिंह गोपी करीब 12 वर्षों से अपने परिवार के साथ अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में रह रहे हैं। गुरप्रीत वहां प्राइवेट नौकरी करते हैं। दुनिया के सबसे व्यस्त शहरों में से एक न्यूयार्क में जीवन बिताते हुए भी उनका दिल अपने गांव और देश के लिए धड़कता है। वे गर्व से खुद को भारतीय बताते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास करते हैं। संवाद

जाम्बिया में रह रहे लखीमपुर खीरी के गांव सेमरा के मूल निवासी रजनीश वर्मा व उनकी पत्नी श्वेता अ

जाम्बिया में रह रहे लखीमपुर खीरी के गांव सेमरा के मूल निवासी रजनीश वर्मा व उनकी पत्नी श्वेता अ