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लेटकर भोलेनाथ के दर्शन करने आया श्रद्धालु
गोला गोकर्णनाथ।
Updated Fri, 29 Jul 2016 11:01 PM IST
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bhole
- फोटो : amar ujala
भगवान शिव की नगरी छोटी काशी में भगवान भोलेनाथ के श्रद्धालु अलग अलग ढंग से श्रद्धा के साथ आकर जलाभिषेक कर रहे हैं। जहां एक ओर श्रद्धालुु बम भोले के जयकारे लगाते हुए भजनों पर थिरकते, भगवा चोला पहने झूमते, नाचते, गाते आते हैं वहीं कुछ भक्त दंडवत साष्टांग प्रणाम करते हुए सड़क पर लेटकर मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
मोहल्ला पूर्वी दीक्षिताना निवासी विमल कुमार कश्यप चार वर्षों से सावन माह में भोलेनाथ को कांवड़ चढ़ाने के लिए फर्रुखाबाद से गंगाजल लाकर अभिषेक करते हैं। वह अपने साथी देवेश शुक्ला, दिनेश कश्यप, राहुल, नन्हें के साथ फर्रुखाबाद से पैदल कांवड़ लेकर नगर से तीन किलोमीटर पहले कंजा देवस्थान तक आते हैं। वहां कावड़ियों की अगवानी करने के लिए परिवार के लोग जाते हैं। विश्राम करने के बाद से विमल कुमार कश्यप कंजा से सड़क पर लेट कर साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर जाते हैं। कंजा से उनकी मां, पत्नी सुनैना, पुत्री तृप्ति, समृद्धि, पुत्र अभिषेक, शिवांश सड़क को साफ करते हुए चलते हैं। जिसके पीछे विमल बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान का सुमिरन करता हुआ शिव मंदिर पहुंचा। पौराणिक शिव मंदिर में उसने साथी कांवड़ियों के साथ भगवान का जलाभिषेक कर परिवार के सुख समृद्धि की कामना की।
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मोहल्ला पूर्वी दीक्षिताना निवासी विमल कुमार कश्यप चार वर्षों से सावन माह में भोलेनाथ को कांवड़ चढ़ाने के लिए फर्रुखाबाद से गंगाजल लाकर अभिषेक करते हैं। वह अपने साथी देवेश शुक्ला, दिनेश कश्यप, राहुल, नन्हें के साथ फर्रुखाबाद से पैदल कांवड़ लेकर नगर से तीन किलोमीटर पहले कंजा देवस्थान तक आते हैं। वहां कावड़ियों की अगवानी करने के लिए परिवार के लोग जाते हैं। विश्राम करने के बाद से विमल कुमार कश्यप कंजा से सड़क पर लेट कर साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर जाते हैं। कंजा से उनकी मां, पत्नी सुनैना, पुत्री तृप्ति, समृद्धि, पुत्र अभिषेक, शिवांश सड़क को साफ करते हुए चलते हैं। जिसके पीछे विमल बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान का सुमिरन करता हुआ शिव मंदिर पहुंचा। पौराणिक शिव मंदिर में उसने साथी कांवड़ियों के साथ भगवान का जलाभिषेक कर परिवार के सुख समृद्धि की कामना की।
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