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Lakhimpur Kheri News: महाभारत कालीन अंतर्वेद सहित प्राचीन धार्मिक स्थलों की बदलेगी तस्वीर

Sun, 04 Jan 2026 12:32 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sun, 04 Jan 2026 12:32 AM IST
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The picture of ancient religious places including the Mahabharata period Antarveda will change
चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद
लखीमपुर खीरी। अपना जिला महाभारतकालीन इतिहास से जुड़ा है। कई ऐतिहासिक स्थल महाभारत काल के समय के हैं। प्रशासनिक अनदेखी के चलते उनकी पहचान धुंधली होती जा रही है लेकिन अब ये स्थान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
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प्राचीन स्थानों की पहचान वापस दिलाकर उन्हें पर्यटन से जोड़ने के लिए सरकार इन स्थानों का कायाकल्प कराने जा रही है। इसकी जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को दी गई है।पर्यटन सूचना अधिकारी संजय भंडारी ने बताया कि शासन की कार्ययोजना के अनुसार, विधानसभा मोहम्मदी के शिवनगरा गांव के महाभारत कालीन पांडवों द्वारा स्थापित ओछयानाथ शिव मंदिर का पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। निघासन के ढखरेवा चौराहे के आगे अंतर्वेद नाम के प्राचीन स्थल व सिंगाही के खैरीगढ़ में स्थित बाबा रामदास मंदिर का सौंदर्यीकरण व पर्यटन विकास कराया जाना है। शासन ने प्रत्येक स्थल के लिए डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये बजट की मंजूरी दी है।
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शिवनगरा गांव का उचवा आश्रम

मोहम्मदी। शिवनगरा गांव के पास गोमती नदी किनारे बने उचवा आश्रम महाभारत काल से जुड़ा है। मान्यता है कि अज्ञात वास के समय पांडवों ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर में आने-जाने के लिए रास्ता भी ठीक नहीं है। पुजारी महात्मा राम भूषण ने बताया कि मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। घाट, सत्संग भवन, शौचालय, आवास, बाउंड्री वॉल आदि काफी कार्य होने हैं। राज सभापति लोकेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि काफी प्रयास के बाद आश्रम के लिए धनराशि स्वीकृत हुई है। संवाद
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रमियाबेहड़ स्थित अंतर्वेद

रमियाबेहड़। अंतर्वेद की ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में अज्ञात वास के समय पांडवों ने यहां 13 माह का समय बिताया था। सुरक्षा के लिए महाबली भीम ने चारों तरफ झील बनाई। पूर्व दिशा में द्वार बनाया, जो कि आज भी गवाह है। यह पांडवों की तपोभूमि के नाम से विख्यात है। बताया जाता है कि तपोभूमि की महानता को देखते हुए पांच सौ वर्ष पूर्व झंडी स्टेट के राजा रघुवर सिंह ने कई हेक्टेयर भूमि दान में देते हुए बीच वन में श्रीराम जानकी मंदिर बनवाया लेकिन देखरेख के अभाव में यह धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
अंतर्वेद आश्रम के महंत गोकुल दास उर्फ राजू महाराज ने बताया कि यह स्थान जंगल में होने से यहां न तो बिजली है और न ही यहां आने-जाने के लिए सड़क। हर साल यहां भंडारा कराते हैं। सड़क न होने से वाहन फंस जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या विद्युत कनेक्शन न होना है। वे 50 साल से यहां सेवा करते आ रहे हैं। संवाद
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खैरीगढ का सिद्ध पुरुष रामदास बाबा का पावन स्थल

सिंगाही। खैरीगढ़ में रामदास बाबा का पावन स्थल सुहेली नदी के किनारे है। बुजुर्गों ने बताया कि रामदास बाबा सिद्ध पुरुष थे। नदी के किनारे जमीन के भीतर 6 कोठरी बनाई थी, जहां वे साधना करते थे। पांच कोठरी बंद हो गईं लेकिन एक कोठरी अब भी सुरक्षित है। नदी कटान एरिया होने बाद भी यह स्थान पूरी तरह सुरक्षित है। यहां पर हर साल मांगलिक कार्य, भंडारा आदि बड़े आयोजन होते हैं। संवाद


ग्राम पंचायत दरियाबाद स्थित चौसंधे बाबा स्थान


बिजुआ। ग्राम पंचायत दरियाबाद स्थित चौसंधे बाबा मंदिर का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार होगा। विधायक अमन गिरि ने शुक्रवार को चौसंधे बाबा आश्रम के प्रमुख ब्रह्मचारी जी और क्षेत्र की जनता के बीच इस महत्वपूर्ण जानकारी की घोषणा की। उन्होंने बताया कि जल्द ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चौसंधे बाबा मंदिर परिसर में भूमि पूजन किया जाएगा। बिजुआ भाजपा मंडल अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह ने बताया कि स्वीकृत धनराशि से मंदिर परिसर में कई विकास कार्य कराए जाएंगे।

चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद

चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद

चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद

चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद

चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद

चौसंधे बाबा आश्रम में मौजूद संत व ग्रामीण। संवाद

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