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Lakhimpur Kheri News: बजट की बेड़ियों में बंधा 78 हजार लाभार्थियों का पोषण

Tue, 06 Oct 2026 12:26 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Tue, 06 Oct 2026 12:26 AM IST
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The nutrition of 78,000 beneficiaries is tied to the shackles of the budget
लखीमपुर खीरी। बजट के अभाव में जिले के तीन टेक होम राशन (टीएचआर) प्लांट बंद हो गए हैं। वेंडरों का कई महीनों से भुगतान बकाया है। लगातार मांग के बाद भी भुगतान न मिलने पर उन्होंने कच्चे माल की सप्लाई रोक दी। इससे नकहा, धौरहरा और निघासन के प्लांटों की मशीनें बंद हो गईं।
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तीनों प्लांटों से हर माह 78,405 लाभार्थियों के लिए पुष्टाहार तैयार होता है। अब इन लाभार्थियों तक पुष्टाहार की आपूर्ति प्रभावित है। जिले के बिजुआ, पलिया, पसगवां, मोहम्मदी, लखीमपुर, निघासन, मितौली, नकहा और धौरहरा में टीएचआर प्लांट संचालित हैं। प्रत्येक प्लांट में प्रतिदिन पांच मीट्रिक टन पुष्टाहार तैयार किया जाता है। इसे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं तक पहुंचाया जाता है।
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नकहा, धौरहरा और निघासन के प्लांट बंद हैं। निघासन में चार महीने से, जबकि नकहा और धौरहरा में दो महीने से कच्चे माल की सप्लाई नहीं मिलने की बात कही जा रही है। निघासन के 30,459, नकहा के 28,659 और धौरहरा के 19,287 लाभार्थी प्रभावित हैं।
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60 से अधिक महिलाओं का रोजगार भी प्रभावित
प्रत्येक प्लांट में दो शिफ्टों में स्वयं सहायता समूह की करीब 20 महिलाएं पुष्टाहार तैयार करती हैं। दो से तीन कर्मचारी इसे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था में लगे रहते हैं। तीनों प्लांट बंद होने से 60 से अधिक महिलाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अन्य कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ा है।
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इन प्लांटों में तैयार होता है पुष्टाहार
टीएचआर प्लांटों में आटा-बेसन हलवा, आटा-बेसन बर्फी, धनिया-मूंग-सोया खिचड़ी, ऊर्जा युक्त हलवा मीठा और ऊर्जा युक्त दलिया नमकीन तैयार किया जाता है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए पौष्टिक आहार के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी अलग पोषाहार तैयार किया जाता है।
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बाल विकास विभाग पर 6.92 करोड़ रुपये बकाया
टीएचआर प्लांट राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से संचालित होते हैं, जबकि बजट बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से दिया जाता है। विभाग पर करीब 6.92 करोड़ रुपये की उधारी बताई जा रही है। इसमें नकहा का 2.55 करोड़, धौरहरा का 2.36 करोड़ और निघासन का 2.01 करोड़ रुपये बकाया है।

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जिम्मेदारों का ये है कहना...
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त (स्वतः रोजगार) जितेंद्र मिश्र ने बताया कि वेंडरों को बजट न मिलने के कारण सप्लाई रोक दी गई है। इससे नकहा, निघासन और धौरहरा के टीएचआर प्लांट बंद हैं। भुगतान बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को करना है, जिसके लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी भारत प्रसाद ने कहा कि उन्हें प्लांट बंद होने की जानकारी नहीं है।
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