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Lakhimpur Kheri News: तीन घरों के बुझ गए चिराग, गांव में छाया सन्नाटा

Wed, 08 Apr 2026 12:07 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 08 Apr 2026 12:07 AM IST
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The lights of three houses went out, silence prevailed in the village
अरबाज व तौहिद के घर के रोते बिलखते परिजन। संवाद
भीरा। थाना क्षेत्र के मूसेपुर स्थित पीके इंटर कॉलेज के पास सोमवार रात हुए सड़क हादसे ने तीन घरों की खुशियां छीन लीं। मंगलवार को पोस्टमाॅर्टम के बाद जैसे ही तीनों युवकों के शव गांव पहुंचे, परिजनों में कोहराम मच गया। पूरे गांव में मातम पसरा है।
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थाना भीरा क्षेत्र के ग्राम राड़ा देवरिया निवासी तौहीद (20) पुत्र मुजिम और अरबाज (14) पुत्र मुबारिक एक मोटरसाइकिल से सोमवार रात लखीमपुर-भीरा हाईवे पर जा रहे थे। दोनों चचेरे भाई थे। सामने से दूसरी बाइक पर अमरीश (20) पुत्र बालक राम निवासी हरैया थाना भीरा और पवन (30) पुत्र श्रीपाल निवासी तिखड़ा थाना भीरा आ रहे थे। मूसेपुर में पीके इंटर कॉलेज के पास दोनों बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में चारों गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने सभी को एंबुलेंस से सीएचसी बिजुआ भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने अमरीश कुमार, तौहीद और अरबाज को मृत घोषित कर दिया, जबकि घायल पवन को जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
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परिवार का सहारा था तौहीद
मृतक तौहीद तीन भाइयों में सबसे बड़ा था और परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। वह अपने भाई के साथ गुलरिया चीनी मिल में खाना देने गया था और लौटते समय हादसे का शिकार हो गया। तौहीद पुणे की एक कंपनी में काम करता था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था।
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कम उम्र में ही संभाल ली जिम्मेदारी
अरबाज पढ़ाई के साथ-साथ मोटरसाइकिल की दुकान पर काम करता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह कम उम्र में ही घर का सहारा बन गया था।

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शादी से 18 दिन पहले ही बुझ गया घर का चिराग
भीरा। जिस घर में 18 दिन बाद शहनाई गूंजनी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। पड़रिया के तिखड़ा गांव निवासी अमरीश की शादी 26 अप्रैल को तय थी। घर में तैयारियां चल रही थीं और परिवार में उत्साह का माहौल था। अमरीश अपने परिवार में सबसे छोटा था और मजदूरी करता था। वह अपनी शादी के कार्ड बांटने ननिहाल गया था और लौटते समय हादसे का शिकार हो गया। अमरीश मिलनसार स्वभाव का था और पूरे परिवार का लाडला था। घर के अंदर मां बेसुध होकर रो रही हैं, बाहर खड़े लोग खामोशी से एक-दूसरे को ढांढस बंधा रहे हैं। हर आंख नम है—जिस बेटे की बारात निकलनी थी, आज उसी को कंधा देने की नौबत आ गई। संवाद

अरबाज व तौहिद के घर के रोते बिलखते परिजन। संवाद

अरबाज व तौहिद के घर के रोते बिलखते परिजन। संवाद

अरबाज व तौहिद के घर के रोते बिलखते परिजन। संवाद

अरबाज व तौहिद के घर के रोते बिलखते परिजन। संवाद

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