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Lakhimpur Kheri News: लिफ्ट खराब, जीना चढ़ने में फूल रहीं मरीजों की सांसें
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दूसरी मंजिल पर वृद्धजन के वार्ड में भर्ती मरीज। स्रोत : संवाद
ओयल। करीब 98 करोड़ की लागत से तैयार हुई जिला अस्पताल की इमारत में मरीजों का दम फूल रहा है। करीब एक साल से तीन मंजिला इमारत की दोनों लिफ्ट नहीं चल रही हैं। मरीजों और तीमारदारों को जीने व रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उनकी सांसें फूल रही हैं। वहीं अधिकारी इसे जल्द चालू कराने का आश्वासन दे रहे हैं।
गर्मी का मौसम आते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी में करीब 1100-1200 नए और करीब एक हजार पुराने मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के तीन मंजिला भवन में ओपीडी कक्ष संख्या एक से नौ तक भू-तल होती हैं। द्वितीय तल पर 10 से 26 तक कक्षों में डॉक्टर मरीजों को देखते हैं।
द्वितीय मंजिला पर कक्ष संख्या 11 में फिजियोथेरिपी, 16 में छाती रोग, 18-19 में आंख के मरीज देखे जाते हैं। जहां उम्रदराज मरीज सबसे अधिक संख्या में पहुंचते हैं। दूसरी मंजिल पर ही बच्चों, जनरल पुरुष, महिला, वृद्धजन के लिए वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर आयुष, आइशोलेशन, अस्थिरोग, टीवी व प्राइवेट वार्ड है।
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पहली मंजिला पर आईसीयू, पुरुष और महिला सर्जिकल वार्ड सहित ओटी स्थित है, जहां 163 मरीज भर्ती हैं। सभी मरीजों के पास उनकी देखरेख करने के लिए एक से दो तीमारदार होते हैं। जिला अस्पताल में लगीं लिफ्ट एक वर्ष से अधिक समय से बंद पड़ी है। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाना हो या एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड के लिए वार्ड जाना, जीने व रैंप से ही कई-कई बार चढ़ना-उतरना पड़ता है।
बुजुर्ग के लिए यह समस्या और विकराल हो जाती है। कई बार बुजुर्ग थककर सीढ़ियों पर ही बैठ जा रहे हैं। अस्पताल की सीढ़ियों से चढ़ना-उतरना भी जान जोखिम में डालने वाला है। यहां लगी स्टील की ग्रिलें टूट चुकीं हैं और नुकीले हिस्से बाहर निकल आए हैं।
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गर्मी का मौसम आते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी में करीब 1100-1200 नए और करीब एक हजार पुराने मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के तीन मंजिला भवन में ओपीडी कक्ष संख्या एक से नौ तक भू-तल होती हैं। द्वितीय तल पर 10 से 26 तक कक्षों में डॉक्टर मरीजों को देखते हैं।
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द्वितीय मंजिला पर कक्ष संख्या 11 में फिजियोथेरिपी, 16 में छाती रोग, 18-19 में आंख के मरीज देखे जाते हैं। जहां उम्रदराज मरीज सबसे अधिक संख्या में पहुंचते हैं। दूसरी मंजिल पर ही बच्चों, जनरल पुरुष, महिला, वृद्धजन के लिए वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर आयुष, आइशोलेशन, अस्थिरोग, टीवी व प्राइवेट वार्ड है।
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पहली मंजिला पर आईसीयू, पुरुष और महिला सर्जिकल वार्ड सहित ओटी स्थित है, जहां 163 मरीज भर्ती हैं। सभी मरीजों के पास उनकी देखरेख करने के लिए एक से दो तीमारदार होते हैं। जिला अस्पताल में लगीं लिफ्ट एक वर्ष से अधिक समय से बंद पड़ी है। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाना हो या एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड के लिए वार्ड जाना, जीने व रैंप से ही कई-कई बार चढ़ना-उतरना पड़ता है।
बुजुर्ग के लिए यह समस्या और विकराल हो जाती है। कई बार बुजुर्ग थककर सीढ़ियों पर ही बैठ जा रहे हैं। अस्पताल की सीढ़ियों से चढ़ना-उतरना भी जान जोखिम में डालने वाला है। यहां लगी स्टील की ग्रिलें टूट चुकीं हैं और नुकीले हिस्से बाहर निकल आए हैं।

दूसरी मंजिल पर वृद्धजन के वार्ड में भर्ती मरीज। स्रोत : संवाद

दूसरी मंजिल पर वृद्धजन के वार्ड में भर्ती मरीज। स्रोत : संवाद

दूसरी मंजिल पर वृद्धजन के वार्ड में भर्ती मरीज। स्रोत : संवाद

दूसरी मंजिल पर वृद्धजन के वार्ड में भर्ती मरीज। स्रोत : संवाद

दूसरी मंजिल पर वृद्धजन के वार्ड में भर्ती मरीज। स्रोत : संवाद