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‘षड्यंत्र के तहत दर्ज किया गया है मुकदमा’
पलियाकलां।
Updated Mon, 04 May 2015 08:23 PM IST
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नगर पालिकाध्यक्ष केबी गुप्ता धोधाधड़ी समेत संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होने के दूसरे दिन पालिका सभागार में पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि उन पर षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। उन्होंने ईओ और लेखाकार पर भी कई आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने यहां कभी सीए को देखा ही नहीं और लेखाकार ने उनके समक्ष नौ लाख रुपये का संदिग्ध बिल प्रस्तुत किया और पांच लाख रुपये का चेक धोखाधड़ी कर हस्ताक्षर कराना चाहा। आरोप लगाया गया कि ठेकेदार विनोद कुमार को चोरी छिपे टेंडर बेच दिया गया। उनके मुताबिक ईओ ने पिछली तारीखों के चेक काटकर हस्ताक्षर कराना चाहा, जबकि डीएम के आदेशानुसार किसी भी भुगतान पर उनकी सहमति होनी चाहिए थी, इसीलिए उन्होंने चेक अपने पास डीएम से वार्ता करने के लिए रख लिया। ईओ की ओर से असंवैधानिक रूप से भुगतान के लिए दबाव बनाया गया, जबकि उन्होंने संबंधित पत्रावलियों में अनियमितताओं का विरोध किया। गुप्ता ने कहा कि इससे भयभीत होकर ईओ ने उच्चाधिकारियों को गुमराह कर गलत ढंग से मुकदमा दर्ज करा दिया।
ईओ ने भी रखा पक्ष
ईओ नीलम चौधरी ने कहा है कि सभी को पता है कि टेंडर खुलने से पहले एफडीआर लगता है। ऐसे में पालिकाध्यक्ष का कथन बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि शासन ने वर्षों पहले सीए की नियुक्ति कर दी थी और ईओ को भी इसके लिए ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने कहा कि अगर चेकों को लेकर ऐतराज है तो उन्हें चेकबुक में ही कैंसिल कर देना चाहिए था लेकिन उनको बुक से फाड़कर रख लेना कहां का नियम है। जहां तक टेंडर बेचने की बात है तो इस पर ईओ के साथ अगर जेई के हस्ताक्षर हो जाएं तो इसे बेचा जा सकता है। जरूरी नहीं है कि पालिकाध्यक्ष के हस्ताक्षर न हों तो इसे फर्जी करार दिया जाए। पत्रावलियों में उन्होंने पेज नंबरिंग की है और इसमें 45 नंबर पेज गायब हैं। उन्होंने कहा कि तहरीर में लगाया गया कोई भी आरोप निराधार नहीं है सभी के साक्ष्य हैं।
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उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने यहां कभी सीए को देखा ही नहीं और लेखाकार ने उनके समक्ष नौ लाख रुपये का संदिग्ध बिल प्रस्तुत किया और पांच लाख रुपये का चेक धोखाधड़ी कर हस्ताक्षर कराना चाहा। आरोप लगाया गया कि ठेकेदार विनोद कुमार को चोरी छिपे टेंडर बेच दिया गया। उनके मुताबिक ईओ ने पिछली तारीखों के चेक काटकर हस्ताक्षर कराना चाहा, जबकि डीएम के आदेशानुसार किसी भी भुगतान पर उनकी सहमति होनी चाहिए थी, इसीलिए उन्होंने चेक अपने पास डीएम से वार्ता करने के लिए रख लिया। ईओ की ओर से असंवैधानिक रूप से भुगतान के लिए दबाव बनाया गया, जबकि उन्होंने संबंधित पत्रावलियों में अनियमितताओं का विरोध किया। गुप्ता ने कहा कि इससे भयभीत होकर ईओ ने उच्चाधिकारियों को गुमराह कर गलत ढंग से मुकदमा दर्ज करा दिया।
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ईओ ने भी रखा पक्ष
ईओ नीलम चौधरी ने कहा है कि सभी को पता है कि टेंडर खुलने से पहले एफडीआर लगता है। ऐसे में पालिकाध्यक्ष का कथन बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि शासन ने वर्षों पहले सीए की नियुक्ति कर दी थी और ईओ को भी इसके लिए ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने कहा कि अगर चेकों को लेकर ऐतराज है तो उन्हें चेकबुक में ही कैंसिल कर देना चाहिए था लेकिन उनको बुक से फाड़कर रख लेना कहां का नियम है। जहां तक टेंडर बेचने की बात है तो इस पर ईओ के साथ अगर जेई के हस्ताक्षर हो जाएं तो इसे बेचा जा सकता है। जरूरी नहीं है कि पालिकाध्यक्ष के हस्ताक्षर न हों तो इसे फर्जी करार दिया जाए। पत्रावलियों में उन्होंने पेज नंबरिंग की है और इसमें 45 नंबर पेज गायब हैं। उन्होंने कहा कि तहरीर में लगाया गया कोई भी आरोप निराधार नहीं है सभी के साक्ष्य हैं।
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