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Lakhimpur Kheri News: विद्यार्थियों को बताया पक्षियों का महत्व
Mon, 05 Jan 2026 11:40 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:40 PM IST
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राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर हुए कार्यक्रम में हिस्सा लेती छात्राएं। स्रोत : दुधवा
- फोटो : सांकेतिक
पलियाकलां। राष्ट्रीय पक्षी दिवस के उपलक्ष्य में दुधवा टाइगर रिजर्व की बायोलॉजिस्ट टीम ने इंडियन एकेडमी स्कूल में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पक्षियों के महत्व, उनकी पारिस्थितिक भूमिका और संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना था।
वन विभाग के कर्मचारियों ने निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन-जागरूकता अभियान चलाया, ताकि स्थानीय समुदायों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि तराई क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोर समेत दुर्लभ प्रजातियां सारस क्रेन, ग्रेट हॉर्नबिल, लेसर एडजुटेंट स्टॉर्क और जलीय पक्षी ओरिएंटल डार्टर, पेंटेड स्टॉर्क और ब्राह्मणी बतख पाए जाते हैं। शीतकाल में मध्य एशिया और साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी यहां की जैव-विविधता को और अधिक समृद्ध बना देते हैं। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि पक्षी न केवल बीज प्रसार और कीट नियंत्रण में सहायक होते हैं, बल्कि वे आर्द्र भूमियों के स्वास्थ्य के सूचक भी हैं। वन पारितंत्र के संतुलन के लिए इनका अस्तित्व अनिवार्य है। संवाद
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वन विभाग के कर्मचारियों ने निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन-जागरूकता अभियान चलाया, ताकि स्थानीय समुदायों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि तराई क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोर समेत दुर्लभ प्रजातियां सारस क्रेन, ग्रेट हॉर्नबिल, लेसर एडजुटेंट स्टॉर्क और जलीय पक्षी ओरिएंटल डार्टर, पेंटेड स्टॉर्क और ब्राह्मणी बतख पाए जाते हैं। शीतकाल में मध्य एशिया और साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी यहां की जैव-विविधता को और अधिक समृद्ध बना देते हैं। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि पक्षी न केवल बीज प्रसार और कीट नियंत्रण में सहायक होते हैं, बल्कि वे आर्द्र भूमियों के स्वास्थ्य के सूचक भी हैं। वन पारितंत्र के संतुलन के लिए इनका अस्तित्व अनिवार्य है। संवाद
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