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नदियों के उफान का असर, पनपने लगे संक्रामक रोग
लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:24 PM IST
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health
- फोटो : amar ujala
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शारदा और घाघरा के उफान का ही असर है कि गांवों में संक्रामक रोग फैलने लगे हैं। इसकी एक वजह बारिश के साथ निकल रही तेज धूप से उमस भरी गर्मी भी है। जगह जगह होने वाले जलभराव ने मच्छर जनित बीमारियों को जन्म देना शुरू कर दिया है वहीं उमस भरी गर्मी से बच्चों में डायरिया होने लगा है। नतीजतन जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल हो गया है तो अन्य वार्डों में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। वहीं निघासन के गांव में बाढ़ और बरसात का पानी भरा होने से मोतीपुरवा और भदुरहिया गांव के बाशिंदे उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित हैं। यहां पर बच्चों से लेकर बूढ़े तक बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का दावा फेल नजर आ रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच रही हैं।
जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल, एक बेड पर भर्ती हैं दो-दो बच्चे
लखीमपुर खीरी। संक्रामक रोगों सेपीड़ित बच्चों की संख्या बढने से अस्पताल का चिल्ड्रन वार्ड फुुुुल हो गया है, लेकिन बच्चों की बढ़ती तादात के कारण अब एक बेड पर दो दो बच्चों को भर्ती किया जाने लगा है। रुक-रुक कर हो रही बारिश और इसके बाद निकल रही तेज धूप से संक्रामक रोग बढ़े हैं। बारिश से जगह जगह जलभराव से मच्छर जनित बीमारियों में बढ़ोतरी होने लगी है वहीं उमस भरी गर्मी के कारण बच्चे डायरिया की चपेट में आने लगे हैं। बुधवार तक चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या जहां छह थी वह शुक्रवार को 17 तक पहुंच गई। इससे चिल्ड्रन वार्ड फुल हो गया। वार्ड की हालत यह हो गई है कि बीमार बच्चों की संख्या के आगे बेड कम पड़ने लगे हैं, जिससे स्टाफ को अब एक बेड़ पर दो-दो बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। शुक्रवार की दोपहर तक वार्ड में चार बच्चों को भर्ती किया गया। जिसमें संपूर्णानगर के पडुहा निवासी करन ने अपने एक साल के पुत्र दीपक, शहर के मोहल्ला हांथीपुर निवासी सोनू ने अपने तीन साल के पुत्र सुमित, पड़रिया निवासी आरिफ ने अपने दस साल के पुत्र हसनैन और फूलबेहड़ ब्लाक के जमुनिहां निवासी कुंज बिहारी ने अपने दस साल के पुत्र मोहित को डायरिया और बुखार की चपेट में आने पर चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कराया।
मोतीपुर और भदुरहिया के हर घर में मरीज
निघासन। भदुरहिया, मोतीपुरवा गांव में गंदगी और जलभराव के कारण बीमारियों ने पांव पसार लिए हैं। मोतीपुरवा निवासी गोकुल प्रसाद की दो वर्षीय पुत्री धन देवी, छोटी देवी (36) , छोटकन्नी पुत्री प़ुत्तू, चार वर्षीय पुष्पा पुत्री मोलहे, राधेश्याम का छह वर्षीय पुत्र राहुल, राजू का दो वर्षीय पुत्र गुड्डू उल्टी दस्त और बुखार से पीड़ित हैं। गांव भदुरहिया निवासी रियाजुद्दीन का पांच वर्षीय पुत्र दिलशेर, जमीला (45) पत्नी मन्ने, खलील (50), नजमा बानो (52) पत्नी गनी समेत करीब एक दर्जन से अधिक लोग उल्टी दस्त और तेज बुखार से पीड़ित हैं।
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भदुरहिया और मोतीपुर गांव के अंदर खड़ंजे पर घूरा और कूड़ा आदि लगा है। जलभराव के कारण वह सड़ गया है, जिससे जरा सी बरसात में गंदा पानी सड़क पर तथा लोगों के घरों में भरने लगता है, जिससे बीमारी फैलने की आशंका प्रबल हो जाती हैं।
क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप फैलने के बाद भी छेदुई पतिया में स्थित पीएचसी में ताला लटकता रहता है। ग्रामीण अपना इलाज झोलाछाप डॉक्टरों के यहां कराने को मजबूर हैं।
गांवों में बीमारी फैलने की जानकारी नहीं है। यदि गांव में बीमारी फैली है तो टीम भेजकर लोगों को दवा का वितरण कराया जाएगा।
-लालजी पासी, सीएचसी प्रभारी।
डॉक्टरों की सलाह, इस मौसम में सेहत का रखें ख्याल
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में फिजीशियन डॉ आरएस मधौरिया बताते हैं कि गलत खानपान से पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। लापरवाही होने और गंदे पानी के कारण पीलिया भी हो जाता है। आंख का पीला होना, भूख न लगना, पीला पेशाब आना पीलिया के शुरुआती लक्षण होते हैं। फिजीशियन डॉ अनुराग सेठ बताते हैं कि हैजा और डायरिया भी जलभराव के कारण इसी मौसम में होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वी. कुमार बताते हैं कि बरसात के मौसम में बच्चों और बूढ़ों में डिहाइड्रेशन की दिक्कत हो जाती है। समस्या बढ़ने पर गुर्दों में भी दिक्कत हो जाती है। हालांकि अभी उनके यहां ऐसा कोई मरीज इस साल नहीं आया है। डॉक्टर बताते हैं, हर मौसम में स्वच्छ और अधिक पानी पीना बहुत जरूरी होता है। शरीर में पांच लीटर पानी होता है। इसकी मात्रा कम नहीं होनी चाहिए। साफ पानी न मिले तो उबालकर पीना चाहिए।
ये करें तो जरूर रहेंगे निरोग
- बासी खाना बिल्कुल न खाएं, हाथों को अच्छी तरह धोकर खाना खाएं, घर में सफाई का विशेष ध्यान रखें, बर्तन, बिस्तर साफ रखें, साफ और सूखा तौलिए का उपयोग करें, हरी सब्जियों का सेवन करें-फल खूब खाएं।
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जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल, एक बेड पर भर्ती हैं दो-दो बच्चे
लखीमपुर खीरी। संक्रामक रोगों सेपीड़ित बच्चों की संख्या बढने से अस्पताल का चिल्ड्रन वार्ड फुुुुल हो गया है, लेकिन बच्चों की बढ़ती तादात के कारण अब एक बेड पर दो दो बच्चों को भर्ती किया जाने लगा है। रुक-रुक कर हो रही बारिश और इसके बाद निकल रही तेज धूप से संक्रामक रोग बढ़े हैं। बारिश से जगह जगह जलभराव से मच्छर जनित बीमारियों में बढ़ोतरी होने लगी है वहीं उमस भरी गर्मी के कारण बच्चे डायरिया की चपेट में आने लगे हैं। बुधवार तक चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या जहां छह थी वह शुक्रवार को 17 तक पहुंच गई। इससे चिल्ड्रन वार्ड फुल हो गया। वार्ड की हालत यह हो गई है कि बीमार बच्चों की संख्या के आगे बेड कम पड़ने लगे हैं, जिससे स्टाफ को अब एक बेड़ पर दो-दो बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। शुक्रवार की दोपहर तक वार्ड में चार बच्चों को भर्ती किया गया। जिसमें संपूर्णानगर के पडुहा निवासी करन ने अपने एक साल के पुत्र दीपक, शहर के मोहल्ला हांथीपुर निवासी सोनू ने अपने तीन साल के पुत्र सुमित, पड़रिया निवासी आरिफ ने अपने दस साल के पुत्र हसनैन और फूलबेहड़ ब्लाक के जमुनिहां निवासी कुंज बिहारी ने अपने दस साल के पुत्र मोहित को डायरिया और बुखार की चपेट में आने पर चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कराया।
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मोतीपुर और भदुरहिया के हर घर में मरीज
निघासन। भदुरहिया, मोतीपुरवा गांव में गंदगी और जलभराव के कारण बीमारियों ने पांव पसार लिए हैं। मोतीपुरवा निवासी गोकुल प्रसाद की दो वर्षीय पुत्री धन देवी, छोटी देवी (36) , छोटकन्नी पुत्री प़ुत्तू, चार वर्षीय पुष्पा पुत्री मोलहे, राधेश्याम का छह वर्षीय पुत्र राहुल, राजू का दो वर्षीय पुत्र गुड्डू उल्टी दस्त और बुखार से पीड़ित हैं। गांव भदुरहिया निवासी रियाजुद्दीन का पांच वर्षीय पुत्र दिलशेर, जमीला (45) पत्नी मन्ने, खलील (50), नजमा बानो (52) पत्नी गनी समेत करीब एक दर्जन से अधिक लोग उल्टी दस्त और तेज बुखार से पीड़ित हैं।
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भदुरहिया और मोतीपुर गांव के अंदर खड़ंजे पर घूरा और कूड़ा आदि लगा है। जलभराव के कारण वह सड़ गया है, जिससे जरा सी बरसात में गंदा पानी सड़क पर तथा लोगों के घरों में भरने लगता है, जिससे बीमारी फैलने की आशंका प्रबल हो जाती हैं।
क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप फैलने के बाद भी छेदुई पतिया में स्थित पीएचसी में ताला लटकता रहता है। ग्रामीण अपना इलाज झोलाछाप डॉक्टरों के यहां कराने को मजबूर हैं।
गांवों में बीमारी फैलने की जानकारी नहीं है। यदि गांव में बीमारी फैली है तो टीम भेजकर लोगों को दवा का वितरण कराया जाएगा।
-लालजी पासी, सीएचसी प्रभारी।
डॉक्टरों की सलाह, इस मौसम में सेहत का रखें ख्याल
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में फिजीशियन डॉ आरएस मधौरिया बताते हैं कि गलत खानपान से पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। लापरवाही होने और गंदे पानी के कारण पीलिया भी हो जाता है। आंख का पीला होना, भूख न लगना, पीला पेशाब आना पीलिया के शुरुआती लक्षण होते हैं। फिजीशियन डॉ अनुराग सेठ बताते हैं कि हैजा और डायरिया भी जलभराव के कारण इसी मौसम में होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वी. कुमार बताते हैं कि बरसात के मौसम में बच्चों और बूढ़ों में डिहाइड्रेशन की दिक्कत हो जाती है। समस्या बढ़ने पर गुर्दों में भी दिक्कत हो जाती है। हालांकि अभी उनके यहां ऐसा कोई मरीज इस साल नहीं आया है। डॉक्टर बताते हैं, हर मौसम में स्वच्छ और अधिक पानी पीना बहुत जरूरी होता है। शरीर में पांच लीटर पानी होता है। इसकी मात्रा कम नहीं होनी चाहिए। साफ पानी न मिले तो उबालकर पीना चाहिए।
ये करें तो जरूर रहेंगे निरोग
- बासी खाना बिल्कुल न खाएं, हाथों को अच्छी तरह धोकर खाना खाएं, घर में सफाई का विशेष ध्यान रखें, बर्तन, बिस्तर साफ रखें, साफ और सूखा तौलिए का उपयोग करें, हरी सब्जियों का सेवन करें-फल खूब खाएं।